HomeMarqueeचुनाव आयुक्तों की नियुक्ति पर मणिशंकर अय्यर के तीखे सवाल

चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति पर मणिशंकर अय्यर के तीखे सवाल

नई दिल्ली। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता एवं पूर्व केंद्रीय मंत्री मणिशंकर अय्यर ने मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार की कार्यशैली और चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति प्रक्रिया को लेकर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति का मौजूदा तरीका पूरी तरह पारदर्शी नहीं है और इससे निर्वाचन आयोग जैसी संवैधानिक संस्था की स्वतंत्रता एवं विश्वसनीयता को लेकर सवाल खड़े होते हैं।

अय्यर ने पत्रकारों से बातचीत में मुख्य चुनाव आयुक्त की कार्यशैली को ‘शर्मनाक’ बताते हुए मौजूदा निर्वाचन आयोग को अब तक का सबसे खराब आयोग तक करार दिया। उन्होंने यह भी कहा कि दोनों चुनाव आयुक्तों का काम करने का तरीका भी संतोषजनक नहीं रहा, क्योंकि उनके द्वारा लिखे गए कई नोटों और आपत्तियों को सार्वजनिक रूप से पर्याप्त समर्थन नहीं मिला।

नियुक्ति प्रक्रिया पर उठाया बड़ा सवाल

मणिशंकर अय्यर ने कहा कि चुनाव आयोग देश में लोकतांत्रिक व्यवस्था की बेहद महत्वपूर्ण संस्था है। ऐसे में उसके शीर्ष पदों पर नियुक्ति की प्रक्रिया ऐसी होनी चाहिए, जिस पर आम जनता और राजनीतिक दलों को पूरा भरोसा हो। उनका कहना है कि मौजूदा व्यवस्था में नियुक्तियों को लेकर पारदर्शिता का अभाव दिखाई देता है।

उन्होंने कहा कि केवल किसी संस्था को संवैधानिक दर्जा दे देने से उसकी स्वतंत्रता अपने आप सुनिश्चित नहीं हो जाती। संस्था के प्रमुखों की नियुक्ति की प्रक्रिया भी निष्पक्ष और पारदर्शी होनी चाहिए।

सीईसी की कार्यशैली पर भी निशाना

अय्यर का बयान ऐसे समय आया है, जब निर्वाचन आयोग की कार्यप्रणाली और विशेष गहन पुनरीक्षण को लेकर राजनीतिक बहस तेज है। रिपोर्टों के अनुसार, दोनों चुनाव आयुक्तों की ओर से पिछले महीनों में कई मामलों पर लिखित आपत्तियां दर्ज किए जाने की चर्चा सामने आई है।

इसी को लेकर अय्यर ने सवाल उठाया कि यदि निर्वाचन आयोग के भीतर ही महत्वपूर्ण मुद्दों पर मतभेद सामने आ रहे हैं, तो इसके पीछे की प्रक्रिया और निर्णय लेने के तरीके को लेकर जनता के सामने पूरी स्पष्टता होनी चाहिए।

चुनाव आयोग की स्वतंत्रता पर बहस तेज

चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति का मुद्दा पिछले कुछ समय से कानूनी और राजनीतिक बहस का विषय बना हुआ है। मुख्य चुनाव आयुक्त और अन्य चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति से जुड़े 2023 के कानून को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सितंबर 2026 में सुप्रीम कोर्ट की दो सदस्यीय पीठ का फैसला विभाजित रहा। इसके बाद मामला आगे संवैधानिक पीठ के समक्ष जाने की संभावना से जुड़ गया है।

मौजूदा व्यवस्था में चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति के लिए तीन सदस्यीय चयन समिति की व्यवस्था है। इसी प्रक्रिया को लेकर विपक्ष और अन्य आलोचक अधिक पारदर्शिता तथा व्यापक संस्थागत भागीदारी की मांग करते रहे हैं।

विपक्ष लगातार उठा रहा है सवाल

निर्वाचन आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर विपक्षी दलों की ओर से भी लगातार सवाल उठाए जा रहे हैं। मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण और आयोग के भीतर निर्णय प्रक्रिया को लेकर राजनीतिक दलों के बीच तीखी बहस चल रही है। दूसरी ओर, निर्वाचन आयोग ने अपने फैसलों को लेकर सर्वसम्मति का पक्ष रखा है।

मणिशंकर अय्यर के ताजा बयान ने इस बहस को और तेज कर दिया है। उनके मुताबिक, लोकतंत्र में चुनाव कराने वाली संस्था पर जनता का भरोसा सबसे महत्वपूर्ण है और उस भरोसे को कायम रखने के लिए नियुक्ति प्रक्रिया से लेकर आयोग के कामकाज तक में पारदर्शिता जरूरी है।

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