Monday, April 27, 2026
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देदीप्यमान नक्षत्र थे पूर्व प्रधानमंत्री पं. अटल बिहारी बाजपेयी- देवांश पांडेय

अवधनामा संवाददाता
सिद्धार्थनगर। देश के पूर्व प्रधानमंत्री, पत्रकार व कवि हृदय भारत रत्न पंडित अटल बिहारी बाजपेयी एक देदीप्यमान नक्षत्र थे जिनके व्यक्तित्व ने हर किसी को उनकी ओर आकर्षित किया। उनके इसी उदार चरित्र के कारण ही राजनीतिक प्रतिद्वंदी भी उनकी मुक्त कंठ से प्रशंसा करते थे इसके अलावा इन्होंने भी अपने विरोधियों के सही कामों को हमेशा सराहा है ।
उक्त बातें रघुवर प्रसाद जायसवाल सरस्वती शिशु मंदिर इंटरमीडिएट कॉलेज तेतरी बाजार में पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेई की जयंती के अवसर पर विद्यालय के प्रधानमंत्री भैया देवांश पांडेय ने बतौर कार्यक्रम मुख्य अतिथि कही। उन्होंने कहा कि पं अटल बिहारी बाजपेयी जी, जिन्होंने हमेशा राजनीति की स्वच्छ परिभाषा गढ़ने की कोशिश। उनका पूरा जीवन निर्धन व वंचितों की सेवा के लिए समर्पित रहा। वे देश के पहले विदेश मंत्री थे जिन्होंने संयुक्त राष्ट्र संघ की महासभा में हिंदी में भाषण दिया।  पाकिस्तान के साथ कारगिल युद्ध में अटल जी के नेतृत्व में भारतीय सेना ने अद्वितीय पराक्रम का परिचय देते हुए पाकिस्तानी घुसपैठियों का पूरी तरह सफाया कर दिया। उनके कार्यकाल में अनेक महत्वपूर्ण आर्थिक व संरचनात्मक सुधार किए गए। स्वर्णिम चतुर्भुज परियोजना व प्रधानमंत्री सड़क योजना के अंतर्गत गांव शहरों को सड़क से जोड़ा गया जिसके कारण  भारत में आर्थिक विकास को एक नई गति मिली।
 विद्यालय के जयंती प्रमुख आचार्य दिलीप श्रीवास्तव ने पं0 अटल बिहारी वाजपेयी के व्यक्तित्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि उन्होंने देश को शिखर पर ले जाने के लिए इतनी दृढ़ता से के साथ फैसला लिए उनके बलिदान को कभी भुलाया नहीं जा सकता। विद्यालय के भैया अरुण पांडेय व आचार्य नरेंद्र पाल ने कहा कि पं अटल बिहारी बाजपेयी भारत ही नहीं बल्कि दुनिया भर के लोकप्रिय नेता थे।
 कार्यक्रम का संचालन आचार्य वेंकटेश्वर चंद्र मिश्र ने किया। कार्यक्रम के अंत में विद्यालय के सेनापति भैया मानकित राज ने  कार्यक्रम के समापन की घोषणा की।
इस अवसर पर विद्यालय के वरिष्ठ आचार्य सुभाष सिंह , गोविंद सिंह, निमिष शुक्ल,  सत्येंद्र श्रीवास्तव, अचल बिहारी पांडेय, कृष्ण कांत दूबे, विशंभर नाथ द्विवेदी, आलोक मिश्र व सुनील त्रिपाठी समेत समस्त आचार्य बंधुओं की उपस्थिति उल्लेखनीय रही।
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