हजपुरा, अंबेडकरनगर हजरत इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम की शहादत का मकसद सिर्फ मानवता को बचाना था। इमाम हुसैन ने यजीद से जंग नहीं की, बल्कि इस्लाम के सच्चे संदेश को बचाने के लिए कर्बला के मैदान में अपनी जान कुर्बान कर दी। इमाम हुसैन ने अपने नाना हजरत मोहम्मद (स.अ) के दिखाए रास्ते पर चलकर इस्लाम को बचाया। उक्त बातें मौलाना सैयद हैदर अब्बास ने कही। वह मंगलवार को कटघर मूसा में दिवंगत सैयद अलमदार हुसैन के अजाखाने में सैयद नैय्यर अब्बास की तरफ से 5 मोहर्रम की आयोजित मजलिस को संबोधित करते हुए कर्बला के शहीदों को याद किया और उनके बलिदान को श्रद्धांजलि अर्पित की।
उन्होंने कहा कि इमाम हुसैन का संदेश आज भी प्रासंगिक है और हमें उनके दिखाए मार्ग पर चलना चाहिए। मौलाना अब्बास ने आगे बताया कि यजीद और यजीद के लश्कर वाले सच्चाई को खत्म करना चाहते थे और हर तरफ की बुराई फैलाना चाह रहे थे लेकिन इमाम हुसैन ने कहा कि उनके रहते उनके नाना का दीन इस्लाम और उनका पैगाम खत्म नहीं होगा।इसी उद्देश्य के लिए इमाम हुसैन ने कर्बला में अजीम कुर्बानी दिया और इस्लाम को बचा लिया। अंत में मौलाना ने कर्बला के शहीदों का जिक्र किया जिसे सुनकर हर कोई भावुक हो उठा। बाद मजलिस अंजुमन गुंच- ए- हुसैनी की तरफ से नायाब हुसैन व अजहर अब्बास ने अपने अंदाज में पुरदर्द नौहा पेश किया, जिसे सुनकर मजलिस में मौजूद मोमनीन की आंखे नम हो गई। मजलिस से पूर्व नजफ अब्बास, अली मोहम्मद (आमिर), नैय्यर अब्बास व शहनवाज हैदर ने पेशख्वानी की।