अलीगढ़। उप कृषि निदेशक (कृषि रक्षा) डा0 सतीश मलिक ने प्रेस विज्ञप्ति के माध्यम से अवगत कराया है कि धान की फसल की रोपाई का समय चल रहा है। खरपतवार से धान की फसल में अत्यधिक नुकसान होता है। उन्होंने खरपतवार द्वारा नुकसान से बचने के लिये खरपतवार नियन्त्रण में प्रयोग होने वाले रसायनो का नाम, प्रयोग होने वाले रसायन की मात्रा, प्रयोग विधि व समय की जानकारी देते हुए बताया कि अंकुरण से पूर्व धान फसल के सभी खरपतवार से बचाव के लिए ब्यूयटाक्लोर 50 प्रतिशत को 3-4 लीटर प्रति हैक्टेयर की दर से या एनीलोफास 30 प्रतिशत को 1.25-1.5 लीटर प्रति हैक्टेयर की दर से या प्रेटिलाक्लोर 50 प्रतिशत को 1.5 लीटर प्रति हैक्टेयर की दर से या पाइरोजोसलफ्पूरान इथाईल 10 प्रतिशत को 150 से 200 मिली लीटर प्रति हैक्टेयर की दर से 500 लीटर पानी में घोल बनाकर दो इंच खडे पानी से रोपाई के 2-5 दिन के बाद प्रयोग करना चाहिए। संकरी पत्ती वाले खरपतवार से बचाव के लिए बिसपाइरीवैक सोडियम 10 प्रतिशत को 200 मिली लीटर प्रति हैक्टेयर की दर से रोपाई के लगभग 20 से 25 दिन बाद स्पे करनी चाहिए। इसी प्रकार चौडी पत्ती वाले खरपतवार से बचाव के लिए मेटसलफ्पूरान मिथाइल 20 प्रतिशत को 20 ग्राम प्रति हैक्टेयर की दर से या इथाक्सीसलफ्यूरान 15 प्रतिशत को 100 ग्राम प्रति हैक्टेयर की दर से या 2,4 डी इथाइलईस्टर 38 प्रतिशत को 20 ग्राम प्रति हैक्टेयर की दर से रोपाई के लगभग 20 से 25 दिन बाद स्प्रे कर उपयोग करना चाहिए।





