श्रद्धालुओं की जान को खतरा: ठेकेदार ने पल्ला झाड़ा
इटावा। एक साल भी नहीं बीता और पर्यटन विभाग उत्तर प्रदेश के सौजन्य से शहर के प्रसिद्ध नीलकंठ मंदिर के सामने लाल पत्थर से बनवाए गए प्रवेश द्वार के पत्थर टूट कर गिरने लगे हैं,जिससे मंदिर आने वाले भक्त श्रद्धालुओं की जान जोखिम में पड़ने का खतरा बढ़ गया है। उल्लेखनीय है कि प्रदेश सरकार द्वारा पर्यटन मंत्रालय की ओर से विभिन्न जिलों में स्थित प्रसिद्ध मंदिरों का सौंदर्यीकरण के साथ जीर्णोद्धार और विस्तार किया गया है,उसी क्रम में शहर के नीलकंठ मंदिर का भी सौंदर्यीकरण हुआ है,जहां लाल पत्थरों का एक ऊंचा प्रवेश द्वार भी बनाया गया है,जिसके वर्चुअल लोकार्पण की शिला भी स्थापित की गई है।
लेकिन कार्यदायी संस्था ने जल्दबाजी में काम निपटाने के चलते इस प्रवेश द्वार में पत्थरों को इस तरह चलताऊ तौर पर लगाया है,जिसके कारण ऊपर दोनों तरफ से कई पत्थर निकल कर गिर गए हैं और लोग घायल होते-होते बचे।मंदिर कमेटी के लोगों को जब पत्थर गिरने की जानकारी हुई तो उन्होंने कार्यदाई संस्था के ठेकेदार से मरम्मत के लिए कहा तो वह बोला कि हमारा काम तो पूरा हो चुका,अब हम कुछ नहीं करेंगे।
जबकि नियम यह है कि नव निर्माण कार्य में किसी भी टूट फूट और मरम्मत आदि के लिए कार्यदायी संस्था को एक साल तक उसका मेंटीनेंस देखना पड़ता है,लेकिन पर्यटन विभाग का कार्य देखने वाली उक्त संस्था का ठेकेदार मंदिर जाने वाले भक्त श्रद्धालुओं,जिनमें बच्चे और महिलाएं भी होती हैं,की जान की परवाह किए बिना अपनी जिम्मेदारी से साफ पल्ला झाड़ रहा है।अब यदि उस प्रवेश द्वार से कभी कोई पत्थर गिरने से कोई जनहानि होती है,तो इसका जिम्मेदार कौन होगा ?





