हमीरपुर।कानपुर से सागर को जोड़ने वाला राष्ट्रीय राजमार्ग-34 (NH-34) में विगत कई वर्षों से लगातार हो रहे सड़क हादसों से सदेव चर्चा में रहता है। सड़क की स्थिति ठीक होने के बावजूद इसकी चौड़ाई से अधिक ट्रैफिक दबाव के कारण यह मार्ग राहगीरों के लिए जोखिम भरा होता रहता है। हर वक्त मौत का नंगा नाच देखने को मिलता है। इस रोड पर सफर करना किसी डरावने सपनें जैसा होगया है। हाल ही में डामर गांव के पास हुई दुर्घटना में चार युवकों की मौत के बाद स्थानीय लोगों में आक्रोश व्याप्त है।
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि इस मार्ग पर ओवरलोड डंपर और भारी वाहनों की संख्या छमता से बहुत अधिक है। डिवाइडर न होने के कारण ओवरटेकिंग के दौरान आमने-सामने की टक्कर का खतरा बना रहता है, जो अक्सर हादसों का कारण बनता है। लोगों के अनुसार कानपुर से कबरई के बीच का यह खंड ट्रैफिक दबाव के लिहाज से अब मौजूदा चौड़ाई में पर्याप्त नहीं रह गया है।
इस संबंध में जनप्रतिनिधि भी समय-समय पर आवाज उठा चुके हैं। हमीरपुर के सांसद कुंवर पुष्पेंद्र सिंह चंदेल ने लोकसभा में इस मार्ग के चौड़ीकरण की आवश्यकता बताई थी। वहीं राज्यसभा में सांसद बाबूराम निषाद ने भी खनन क्षेत्र से गुजरने वाले भारी वाहनों के कारण बढ़ते खतरे का मुद्दा उठाया। विधानसभा में भी इस मार्ग को फोरलेन करने और सुरक्षा उपाय बढ़ाने की मांग कई बार की जा चुकी है।
सूत्रों के अनुसार कानपुर-कबरई के बीच ग्रीन फील्ड हाईवे निर्माण की योजना प्रस्तावित है और इसके लिए भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया प्रारंभिक स्तर पर है। हालांकि, जब तक यह परियोजना पूरी नहीं होती, तब तक मौजूदा मार्ग पर सुरक्षा व्यवस्था सुदृढ़ करने की आवश्यकता बनी हुई है।
स्थानीय लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि मार्ग का शीघ्र चौड़ीकरण कराया जाए, दुर्घटना संभावित स्थानों पर डिवाइडर और क्रैश बैरियर लगाए जाएं तथा ओवरलोड वाहनों और तेज रफ्तार पर सख्ती से नियंत्रण किया जाए। लगातार हो रहे हादसों को देखते हुए अब यह मांग जोर पकड़ रही है कि NH-34 पर तत्काल प्रभाव से सुरक्षा उपाय लागू किए जाएं, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोका जा सके।





