Monday, September 1, 2025
spot_img
HomeEntertainment"जीने का अधिकार, बोलने के अधिकार से ऊपर": सुप्रीम कोर्ट ने 'उदयपुर...

“जीने का अधिकार, बोलने के अधिकार से ऊपर”: सुप्रीम कोर्ट ने ‘उदयपुर फाइल्स’ पर कहा

सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को ‘उदयपुर फाइल्स: कन्हैया लाल टेलर मर्डर’ फिल्म से जुड़ी याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए केंद्र सरकार की समिति से कहा कि वह इस मामले में “तत्काल, बिना किसी देरी के” निर्णय ले, क्योंकि फिल्म निर्माताओं ने इस मुद्दे पर तात्कालिकता जताई है।

जब फिल्म के निर्माताओं ने यह दलील दी कि दिल्ली हाईकोर्ट द्वारा फिल्म की रिलीज़ पर रोक लगाना अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के अधिकार का उल्लंघन है, तो सुप्रीम कोर्ट ने साफ कहा कि संविधान का अनुच्छेद 21 यानी ‘जीवन का अधिकार’, अनुच्छेद 19 यानी ‘अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता’ पर प्राथमिकता रखता है।

न्यायमूर्ति सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची की पीठ ने निर्देश दिया कि फिल्म से जुड़ी पुनरीक्षण याचिका पर केंद्र सरकार की ‘सक्षम प्राधिकारी’ आज दोपहर 2:30 बजे सुनवाई करेगी और सभी पक्षों को सुनने के बाद तुरंत फैसला ले। इस दौरान कोर्ट ने फिल्म निर्माताओं को फिलहाल केंद्र के फैसले का इंतजार करने को कहा और याचिकाओं पर अगली सुनवाई सोमवार तक के लिए टाल दी।

सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा कि इस फिल्म से अगर आरोपी मोहम्मद जावेद की छवि को नुकसान पहुंचता है, तो उसकी भरपाई संभव नहीं, जबकि फिल्म निर्माताओं को आर्थिक मुआवज़ा दिया जा सकता है।

न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने यह भी कहा कि फिल्म इंडस्ट्री में तो यह माना जाता है कि जितना ज़्यादा सस्पेंस रहेगा, फिल्म उतनी ज़्यादा चलेगी।

फिल्म निर्माताओं की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता गौरव भाटिया ने बताया कि फिल्म के निर्देशक, निर्माता और मृतक कन्हैया लाल के बेटे को जान से मारने की धमकियां मिल रही हैं। इस पर कोर्ट ने उन्हें स्थानीय पुलिस से संपर्क करने और सुरक्षा की मांग करने की अनुमति दी। पुलिस को निर्देश दिया गया कि अगर खतरे की आशंका वास्तविक लगे, तो सुरक्षा प्रदान की जाए।

इस पूरे मामले में सुप्रीम कोर्ट दो याचिकाओं पर सुनवाई कर रहा है—एक आरोपी मोहम्मद जावेद की ओर से दायर याचिका और दूसरी फिल्म निर्माताओं की ओर से दिल्ली हाईकोर्ट के उस आदेश को चुनौती देने वाली याचिका, जिसमें फिल्म की रिलीज़ पर रोक लगाई गई थी।

सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार की समिति को यह भी निर्देश दिया कि वह आरोपी मोहम्मद जावेद को भी सुनवाई का पूरा अवसर दे। कोर्ट ने कहा, “हम मोहम्मद जावेद को अपने वकील के माध्यम से समिति के समक्ष पेश होने की अनुमति देते हैं और समिति से अपेक्षा करते हैं कि वह इस याचिका पर यथाशीघ्र फैसला ले।”

यह फिल्म 11 जुलाई को रिलीज़ होने वाली थी, लेकिन दिल्ली हाईकोर्ट ने 10 जुलाई को केंद्र के निर्णय तक फिल्म पर रोक लगा दी। हाईकोर्ट में जमीअत उलमा-ए-हिंद के अध्यक्ष और दारुल उलूम देवबंद के प्रमुख मौलाना अरशद मदनी ने याचिका दायर कर फिल्म पर स्थायी प्रतिबंध की मांग की थी। उनका कहना था कि 26 जून को रिलीज़ हुए ट्रेलर में कई संवाद और दृश्य ऐसे हैं जो पहले 2022 में सांप्रदायिक तनाव फैला चुके हैं, और अब फिर से वैसा ही माहौल बना सकते हैं।

गौरतलब है कि उदयपुर के टेलर कन्हैया लाल की हत्या जून 2022 में मोहम्मद रियाज़ और मोहम्मद ग़ौस ने कथित तौर पर की थी। दोनों ने हत्या के बाद एक वीडियो जारी कर दावा किया था कि यह घटना पूर्व बीजेपी नेता नूपुर शर्मा के समर्थन में कन्हैया द्वारा सोशल मीडिया पोस्ट शेयर करने के कारण अंजाम दी गई।

यह मामला एनआईए ने संभाला था और आरोपियों पर UAPA और भारतीय दंड संहिता की गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया है। मामला वर्तमान में जयपुर की एनआईए अदालत में लंबित है।

RELATED ARTICLES

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

- Advertisment -spot_img
- Advertisment -spot_img
- Advertisment -spot_img
- Advertisment -spot_img

Most Popular