Sunday, August 31, 2025
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पांच सालों में बिजली सेक्टर को चाहिए 42 लाख करोड़ रुपये, बिजली बिल में बड़े बदलाव की तरफ मंत्री का इशारा

भारत अपनी वर्तमान बिजली जरूरतों को पूरा करने में सक्षम है और नवीकरणीय ऊर्जा में प्रगति कर रहा है। हालांकि, बढ़ती अर्थव्यवस्था के लिए 2032 तक बिजली क्षेत्र में 42 लाख करोड़ रुपये के बड़े निवेश की आवश्यकता होगी। बिजली मंत्री ने राज्यों से शुल्क ढांचे में सुधार और वितरण कंपनियों को सूचीबद्ध करने का आग्रह किया है, ताकि आवश्यक निवेश आकर्षित हो सके। उन्होंने चेतावनी दी कि बिना सुधारों के भविष्य की बढ़ती मांग को पूरा करना और वित्तीय स्थिरता लाना चुनौतीपूर्ण होगा। भारत नई बिजली क्षमता जोड़ने में विश्व में तीसरे स्थान पर है।

भारत अभी अपनी जरूरत के लिए पर्याप्त बिजली आपूर्ति करने में सक्षम है। नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र में भी भारत की प्रगति बहुत संतोषजनक है। लेकिन आने वाले वर्षों में जिस तेजी से देश की इकोनमी बढ़ रही है उसे देखते हुए बिजली सेक्टर में वर्ष 2032 तक 42 लाख करोड़ रुपये के नये निवेश की जरूरत होगी। इस निवेश का एक बड़ा हिस्सा बिजली ट्रांसमिशन व्यवस्था को दुरूस्त करने और नई बिजली उत्पादन क्षमता को जोड़ने में किया जाएगा।

बिजली मंत्री मनोहर लाल मानते हैं कि अगर मौजूदा शुल्क ढांचे में बड़ा बदलाव नहीं किया गया तो उक्त निवेश की राशि को आकर्षित करना काफी चुनौतीपूर्ण हो जाएगा। यह बात बिजली मंत्री ने पूर्वी क्षेत्र के राज्यों के साथ एक विशेष बैठक में कही है।इस बैठक में बिजली मंत्री ने साफ तौर पर राज्यों को चेतावनी दी है कि अगर शुल्क ढांचे में बड़े बदलाव नहीं किये गये तो बिजली क्षेत्र में सुधार के लिए आवश्यक निवेश जुटाना मुश्किल होगा।

बैठक में बिजली खपत की बिलिंग करना, उनके कलेक्शन करना और सब्सिडी से जुड़े मुद्दों पर भी चर्चा हुई है। बिजली मंत्री ने इन मुद्दों को एक बड़ी चुनौती के तौर पर पेश करते हुए कहा कि, “अब समय आ गया है कि राज्य बिजली ट्रांसमिशन कंपनियों को बाजार में सूचीबद्ध कराने की कोशिश करे।” यह दो तरह से बिजली वितरण क्षेत्र में मदद करेगा। पहला, बिजली वितरण कंपनियों की स्थिति सुधारने पर राज्य सरकारें ज्यादा ध्यान देंगी और दूसरा, इनकी माली हालात सुधारने के लिए केंद्र पर निर्भरता कम होगी। पिछले एक दशक में केंद्र सरकार कई बार राज्यों की बिजली वितरण कंपनियों की स्थिति सुधारने के लिए पैकेज दे चुकी है।

आम बजट 2025-25 में भी 1.50 लाख करोड़ रुपये के एक पैकेज की घोषणा की गई है जिसके जरिए बिजली सुधार करने वाले राज्यों को 50 वर्षों के लिए ब्याज मुक्त मदद दी जाएगी। लेकिन इसका फायदा उन्हीं राज्यों को मिलेगा जो आवश्यक सुधारवादी कदम उठाएंगे।केंद्रीय बिजली मंत्री के इस बयान से तीन दिन पहले ही इंटरनेशनल इनर्जी एजेंसी (आइईए) ने अपनी एक रिपोर्ट में भारत को नई बिजली उत्पादन क्षमता जोड़ने वाले देशो में तीसरे स्थान पर रखा है। भारत से ज्यादा बिजली क्षमता सिर्फ अमेरिका और चीन जोड़ रहे हैं।

भारत में इस महीने बिजली की उच्चतम खपत का स्तर 2.41 लाख मेगावाट तक गया है और उसकी आपूर्ति में कोई समस्या नहीं आई है। बिजली मंत्रालय ने इस साल 2.70 लाख मेगावाट की उच्चतम बिजली की मांग पूरा करने की तैयारी की है। लेकिन समस्या यह है कि वर्ष 2034-35 तक बिजली की मांग 4.46 लाख मेवागाट पहुंच जाने का अनुमान है। भारत बिजली की इस मांग को पूरा करने में सक्षम तो दिखता है लेकिन बिजली वितरण और ट्रांसमिशन की समस्या एक बड़ी चुनौती है। राजनीतिक वजहों से राज्य बिजली क्षेत्र में वैसा सुधार करने की हिम्मत नहीं दिखा पा रहे जिसकी जरूरत है। सभी ग्राहकों से बिजली की खपत के मुताबिक उनसे शुल्क वसूलना आसान नहीं है। बिजली मंत्री ने इस समस्या को दूर करने का सुझाव राज्यों को दिया है।

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