वन अधिकारियों की लापरवाही पर उठे सवाल, दो माह में रिपोर्ट तलब
आगरा। राष्ट्रीय हरित अधिकरण प्रधान पीठ नई दिल्ली ने आगरा के हज़ूरी बाग-दयालबाग क्षेत्र में हुए पेड़ों की अवैध कटाई के मामले पर सख्त रुख अपनाया है। अधिकरण ने वन विभाग को दो माह के भीतर विस्तृत जांच रिपोर्ट पेश करने के निर्देश दिए हैं।
यह मामला मूल आवेदन संख्या 467/2025 से संबंधित है।
याचिका मनोज जुरैल द्वारा दायर की गई थी। याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया कि जुलाई 2023 से जून 2024 के बीच क्षेत्र में 100 से अधिक हरे-भरे वृक्षों को अवैध रूप से काटा गया। कटे हुए पेड़ों में नीम, शीशम, पीपल, बरगद, जामुन, बेलपत्र सहित कई प्रजातियों के वृक्ष शामिल हैं। याचिकाकर्ता का कहना है कि इन वृक्षों को बिना किसी अनुमति के काटा गया और लकड़ी को अवैध रूप से बेचा गया।
उन्होंने बताया कि इस संबंध में वन अधिकारियों को मौखिक और ऑनलाइन शिकायतें दी गईं।
शिकायतें सीएम पोर्टल पर भी दर्ज की गईं, लेकिन विभाग की ओर से कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई।
वन विभाग के अधिकारियों पर लापरवाही और अनुचित व्यवहार के आरोप भी लगाए गए हैं। याचिका में कहा गया है कि हज़ूरी बाग-दयालबाग क्षेत्र ताज ट्रेपेजियम जोन टीटीजेड में आता है। क्षेत्र में उच्चतम न्यायालय के आठ मई 2015 के आदेश के अनुसार न्यायालय की अनुमति के बिना किसी भी वृक्ष की कटाई नहीं की जा सकती। साथ ही 13 मई 2025 के सुप्रीम कोर्ट आदेश के अनुसार, अवैध कटाई पाए जाने पर प्रति वृक्ष पांच हजार से 25 हजार रुपये तक का जुर्माना लगाने का प्रावधान है।
पीठ में न्यायमूर्ति अरुण कुमार त्यागी (न्यायिक सदस्य) और डॉ. अफरोज़ अहमद (विशेषज्ञ सदस्य) शामिल थे। पीठ ने कहा कि यह मामला पर्यावरण संरक्षण और कानून के पालन से जुड़े गंभीर प्रश्न उठाता है। अधिकरण ने आगरा के वन प्रभागीय अधिकारी (डीएफओ) को निर्देश दिए हैं कि वे साइट का निरीक्षण करें। याचिकाकर्ता और संबंधित भूमि मालिकों से संपर्क कर तथ्यात्मक स्थिति की पुष्टि करें।
पूरे मामले की विस्तृत रिपोर्ट तैयार कर दो माह के भीतर अधिकरण के समक्ष प्रस्तुत करें। अधिकरण ने स्पष्ट किया कि रिपोर्ट प्रस्तुत न करने की स्थिति में विभागीय जवाबदेही तय की जाएगी। इस मामले की अगली सुनवाई आठ जनवरी 2026 को निर्धारित की गई है।





