Wednesday, February 11, 2026
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Insurance complaints : इरडा ने बीमा क्षेत्र में गलत बिक्री को गंभीर चिंता का विषय बताया, कंपनियों को दी ये सलाह

भारतीय बीमा विनियामक और विकास प्राधिकरण (इरडा) ने अपनी वार्षिक रिपोर्ट में बीमा क्षेत्र में ‘गलत बिक्री’ को गंभीर चिंता का विषय बताया है। इरडा ने बीमा कंपनियों को इसकी वजह जानने के लिए ‘मूल कारण विश्लेषण’ करने की सलाह दी है। वित्त वर्ष 2024-25 में अनुचित व्यावसायिक व्यवहार (यूएफबीपी) संबंधी शिकायतें बढ़कर 26,667 हो गईं, जो कुल शिकायतों का 22.14% है। गलत बिक्री से ग्राहकों पर प्रीमियम का बोझ बढ़ता है और पॉलिसी लैप्स होती हैं।

भारतीय बीमा विनियामक और विकास प्राधिकरण (इरडा) ने अपनी ताजा वार्षिक रिपोर्ट में कहा है कि बीमा क्षेत्र में ‘गलत बिक्री’ एक गंभीर चिंता का विषय है और बीमा कंपनियों को इसकी वजह का पता लगाने के लिए ‘मूल कारण विश्लेषण’ करने की आवश्यकता है। रिपोर्ट के अनुसार, जीवन बीमा कंपनियों के खिलाफ दर्ज शिकायतों की कुल संख्या वित्त वर्ष 2024-25 में लगभग स्थिर रही है। यह संख्या 2023-24 में 1,20,726 थी, जो 2024-25 में 1,20,429 रही।

यूएफबीपी की शिकायतें बढ़ीं

हालांकि, ‘अनुचित व्यावसायिक व्यवहार’ (यूएफबीपी) के तहत दर्ज शिकायतों की कुल संख्या वित्त वर्ष 2023-24 के 23,335 से बढ़कर वित्त वर्ष 2024-25 में 26,667 हो गई है। इस प्रकार, कुल शिकायतों में यूएफबीपी संबंधी शिकायतों की हिस्सेदारी पिछले वित्त वर्ष के 19.33 प्रतिशत की तुलना में वित्त वर्ष 2024-25 में बढ़कर 22.14 प्रतिशत हो गई है। ‘गलत बिक्री’ का अर्थ उपभोक्ताओं को नियम, शर्तों या उपयुक्तता के बारे में सही जानकारी दिए बिना बीमा उत्पादों की बिक्री करना है।

“गलत बिक्री को रोकने या कम करने के लिए बीमा कंपनियों को उत्पाद की उपयुक्तता का आकलन करने, वितरण चैनल पर उचित नियंत्रण लागू करने और गलत बिक्री की शिकायतों के समाधान के लिए योजना बनाने की सलाह दी गई है, जिसमें समय-समय पर ‘मूल कारण विश्लेषण’ करना शामिल है।”- इरडा की वार्षिक रिपोर्ट 2024-25

वित्त मंत्रालय ने भी कॉरपोरेट शासन की सर्वोत्तम प्रथाओं को बनाए रखने के महत्व पर जोर देते हुए बैंकों और बीमा कंपनियों को ग्राहकों को बीमा पॉलिसियों की ‘गलत-बिक्री’ के प्रति बार-बार आगाह किया है। गलत बिक्री के कारण अक्सर ग्राहकों पर प्रीमियम का बोझ बढ़ जाता है, जिसके चलते पॉलिसीधारक अपनी पॉलिसी का नवीनीकरण नहीं कराते और पॉलिसी बंद होने के मामले बढ़ जाते हैं।

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