नई दिल्ली। कंबोडिया में भारत ने मानवीय सहायता और पुनर्वास के क्षेत्र में एक अहम पहल करते हुए करीब 2 लाख वर्ग मीटर भूमि को बारूदी सुरंगों से मुक्त कराने में मदद की है। इस अभियान का उद्देश्य लंबे समय से बारूदी सुरंगों के खतरे से जूझ रहे स्थानीय लोगों को सुरक्षित वातावरण उपलब्ध कराना और प्रभावित इलाकों में सामान्य जनजीवन को बहाल करना है।
कंबोडिया में दशकों पुराने संघर्षों के दौरान बिछाई गई बारूदी सुरंगें आज भी आम नागरिकों के लिए गंभीर खतरा बनी हुई हैं। इनकी मौजूदगी के कारण बड़ी संख्या में जमीन खेती, आवास और अन्य विकास कार्यों के लिए इस्तेमाल नहीं हो पा रही थी। भारत की सहायता से चलाए गए अभियान के बाद अब इन क्षेत्रों को सुरक्षित बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण प्रगति हुई है।
परिवारों को मिली बड़ी राहत
बारूदी सुरंगों से जमीन मुक्त होने के बाद प्रभावित क्षेत्रों में रहने वाले सैकड़ों परिवारों को राहत मिलने की उम्मीद है। सुरक्षित भूमि का इस्तेमाल खेती, आवास और सामुदायिक गतिविधियों के लिए किया जा सकेगा। इससे स्थानीय लोगों के सामने रोजगार और आजीविका के नए अवसर भी खुलेंगे।
भारत की यह पहल केवल जमीन को बारूदी सुरंगों से मुक्त कराने तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका उद्देश्य स्थानीय समुदायों को लंबे समय तक सुरक्षित और आत्मनिर्भर बनाना भी है। अभियान के तहत जोखिम वाले क्षेत्रों की पहचान, सुरंगों को हटाने और जमीन को दोबारा उपयोग के योग्य बनाने पर जोर दिया गया।
भारत-कंबोडिया संबंधों में मानवीय सहयोग की मिसाल
कंबोडिया में भारत का यह अभियान दोनों देशों के बीच बढ़ते सहयोग की एक महत्वपूर्ण मिसाल माना जा रहा है। भारत लंबे समय से मानवीय सहायता, क्षमता निर्माण और विकास सहयोग के माध्यम से विभिन्न देशों की मदद करता रहा है।
विशेषज्ञों के अनुसार, बारूदी सुरंगों से प्रभावित जमीन को सुरक्षित करना किसी भी देश के लिए केवल सुरक्षा का विषय नहीं, बल्कि मानवीय विकास और आर्थिक पुनर्निर्माण से भी जुड़ा हुआ है। कंबोडिया में 2 लाख वर्ग मीटर भूमि को सुरक्षित बनाने की पहल से स्थानीय समुदायों के जीवन में सकारात्मक बदलाव आने की उम्मीद है।





