HomeBusinessफ्लेक्सी-कैप म्यूचुअल फंड में निवेशकों को झटका

फ्लेक्सी-कैप म्यूचुअल फंड में निवेशकों को झटका

शेयर बाजार के उतार-चढ़ाव के बीच फ्लेक्सी-कैप फंडों के प्रदर्शन पर नजर, हर फंड नहीं दे रहा उम्मीद के मुताबिक रिटर्न; निवेशकों के लिए जरूरी है सही जानकारी और जोखिम का आकलन

म्यूचुअल फंड में निवेश करने वाले लोगों के बीच फ्लेक्सी-कैप फंड काफी लोकप्रिय हैं। इन फंडों की खासियत यह है कि फंड मैनेजर बाजार की परिस्थितियों के अनुसार बड़ी, मध्यम और छोटी कंपनियों के शेयरों में निवेश का अनुपात बदल सकता है। हालांकि, इन फंडों में निवेश करने से हमेशा बेहतर रिटर्न की गारंटी नहीं मिलती। हालिया प्रदर्शन से जुड़े आंकड़ों में केवल चार फ्लेक्सी-कैप फंडों का रिटर्न 8 फीसदी से अधिक रहने की बात कही जा रही है। ऐसे में निवेशकों के लिए जरूरी है कि वे केवल रिटर्न देखकर निवेश का फैसला न लें।

क्या होते हैं फ्लेक्सी-कैप फंड?

फ्लेक्सी-कैप फंड इक्विटी म्यूचुअल फंड की एक श्रेणी है। इनमें फंड मैनेजर को अलग-अलग बाजार पूंजीकरण वाली कंपनियों में निवेश करने की स्वतंत्रता मिलती है। बाजार की स्थिति और निवेश रणनीति के अनुसार पोर्टफोलियो में बदलाव किया जा सकता है।

इन फंडों के जरिए निवेशकों को अलग-अलग आकार की कंपनियों में निवेश का अवसर मिलता है। लेकिन शेयर बाजार से जुड़े होने के कारण इनमें जोखिम भी बना रहता है और निवेश की रकम में गिरावट आ सकती है।

सिर्फ चार फंडों का रिटर्न 8% से ऊपर, क्या है पूरा मामला?

फ्लेक्सी-कैप फंडों के प्रदर्शन को लेकर सामने आए दावे के मुताबिक, संबंधित अवधि में केवल चार फंडों ने 8 फीसदी से अधिक रिटर्न दिया। हालांकि, इस आंकड़े का सही आकलन करने के लिए यह जानना जरूरी है कि रिटर्न एक साल, तीन साल या किसी अन्य अवधि का है और इसकी गणना किस तारीख तक की गई है।

अलग-अलग समयावधियों में एक ही फंड का प्रदर्शन बदल सकता है। इसलिए किसी एक अवधि के आंकड़े के आधार पर सभी फ्लेक्सी-कैप फंडों की क्षमता या भविष्य के प्रदर्शन का अनुमान लगाना उचित नहीं होगा।

फ्लेक्सी-कैप फंड में निवेश के प्रमुख जोखिम

1. बाजार में गिरावट का जोखिम: शेयर बाजार में कमजोरी आने पर फंड की नेट एसेट वैल्यू (NAV) घट सकती है।

2. मिड और स्मॉल-कैप शेयरों का जोखिम: इन कंपनियों के शेयरों में उतार-चढ़ाव अधिक हो सकता है, जिससे पोर्टफोलियो पर असर पड़ सकता है।

3. रिटर्न की कोई गारंटी नहीं: पिछले वर्षों में मिला मुनाफा भविष्य में भी मिलेगा, यह जरूरी नहीं है।

4. निवेश की अवधि: इक्विटी फंड सामान्यतः लंबी अवधि के लक्ष्यों के लिए इस्तेमाल किए जाते हैं, लेकिन लंबी अवधि में भी नुकसान की संभावना पूरी तरह समाप्त नहीं होती।

निवेश से पहले किन बातों का रखें ध्यान?

निवेश करने से पहले फंड का लंबी अवधि का प्रदर्शन, बेंचमार्क से तुलना, खर्च अनुपात, पोर्टफोलियो और जोखिम स्तर देखें। अपनी आर्थिक स्थिति, निवेश के लक्ष्य और नुकसान सहने की क्षमता के अनुसार फैसला लें। जरूरत पड़ने पर पंजीकृत वित्तीय सलाहकार की मदद भी ली जा सकती है।

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