गुरुवार को गुरु पूर्णिमा थी। परम्परा के अनुसार शिष्यों ने विधि विधान से गुरू की पूजा अर्चना कर उनका आशीर्वाद लिया। गुरु पूर्णिमा हर्षोल्लास के साथ मनाया गया।
आषाढ़ मास की पूर्णिमा को गुरु पूर्णिमा भी कहते हैं। इस दिन गुरु की पूजा का विधान है। क्षेत्र के स्वामी परम् हंस आश्रम टीकरमाफी में शिष्यों ने स्वामी परमहंस महराज जी के साथ साथ पीठाधीश्वर स्वामी हरिचैतन्य ब्रह्मचारी जी महाराज का विधि विधान से पूजा अर्चना कर आशीर्वाद लिया।
स्वामी हरिचैतन्य महराज जी बताते हैं कि शास्त्रों में आषाढ़ मास का बहुत ही महत्व है। कहते हैं कि गुरु पूर्णिमा के दिन से चार महीने तक परिव्राजक साधु संत एक ही स्थान पर रहकर ज्ञान की गंगा बहाते हैं। इसे चातुर्मास का व्रत भी कहा जाता है। ये चार महीने मौसम की दृष्टि से भी सर्वश्रेष्ठ होते हैं। न अधिक गर्मी न अधिक सर्दी। इसलिये अध्ययन के लिये उपयुक्त माने गए है। जैसे सूर्य के ताप से तप्त भूमि वर्षा से शीतलता एवं फसल पैदा करने की शक्ति मिलती है, वैसे ही गुरु चरणों में उपस्थित साधको को ज्ञान,शांति, भक्ति और योग शक्ति मिलती है।
बताते हैं इसी दिन महाभारत के रचयिता कृष्ण द्वेयापन व्यास का जन्मदिन भी है। वे संस्कृत के प्रकांड विद्वान थे। उनके सम्मान में गुरु पूर्णिमा को व्यास पूर्णिमा के नाम से जाना जाता है। आश्रम में वैदिक विद्वान धर्मेंद्र शास्त्री, आचार्य विद्याशंकर व आचार्य जनार्दन द्वारा शिष्यों को गुरुपूजन के कार्यक्रम को सम्पन्न कराया। आश्रम में गुरुपूजन परम्परा के बाद भंडारे का भी आयोजन हुआ। भंडारे में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण किया। इस मौके पर प्राचार्य धर्मेंद्र,त्रिपाठी,अनिल कुमार, स्वामी सेवक, मुन्ना सिंह, अजय दुवेदी, संजय कुमार, सत्य प्रकाश सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं की भीड़ रही।
बौद्ध धम्म के अनुयायियों ने आषाढ़ी पूर्णिमा पर बौद्ध विहारों में भगवान बुद्ध की पूजा वंदना की। सिरमौर बौद्ध विहार सोइया में सामूहिक त्रिसरण पंचशील कार्यक्रम आयोजित किया गया।