सिद्धार्थनगर। सिविल सिद्धार्थ बार एसोसिएशन के प्रांगण में पूर्व न्यायाधीश राघवेंद्र प्रसाद पांडेय मुख्य अतिथि के रूप में बार एसोसिएशन के मुख्य द्वार का “श्रीराम द्वार” नामकरण किया और ध्वजारोहण बार के अध्यक्ष अखंड प्रताप सिंह, महामंत्री कृपाशंकर त्रिपाठी व कार्यकारीणी के प्रमोद कुमार सिंह, नरेंद्र कुमार भार्गव, पवन चंद्र शुक्ला, खुर्शीद अहमद आदि के साथ “अखंडकृपा हनुमंतालय” पर ध्वज का विधि विधान से पूजन किया और पूजन के पश्चात नवनिर्मित “श्रीराम द्वार” पर ध्वज को प्रतिष्ठित किया।
ध्वज को प्रतिष्ठित के करने के कार्यक्रम के पश्चात बार भवन में आयोजित सभा में मुख्य अतीथि का परिचय कराते हुए अध्यक्ष अखंड प्रताप सिंह ने बताया कि आदरणीय मुख्य अतिथि वह न्यायिक अधिकारी हैं जिन्होंने सन 1992 में मुरली मनोहर जोशी, अशोक सिंघल, उमा भारती, साध्वी ऋतंभरा आदि 18 अभियुक्त का रिमांड यह कहते हुए रिफ्यूज किया कि “इन्होंने किसी मस्जिद को ध्वस्त नहीं किया है बल्कि एक विवादित ढांचा था इसलिए रिमांड रिफ्यूज किया जाता है”
पूर्व न्यायाधीश श्रीमान राघवेंद्र प्रसाद पांडे ने अपने वक्तव्य में सभा को संबोधित करते हुए कहा कि जब संविधान का निर्माण हो रहा था तो उसे संविधान में सनातन धर्म से संबंधित तमाम चित्र सम्मिलित किए गए थे लेकिन तत्कालीन सरकार ने संविधान सभा द्वारा प्रस्तावित चित्रों को एक वर्ग विशेष को खुश करने के लिए संविधान से उन चित्रों को हटा दिया जिसे संविधान सभा के 100 में से 68 लोगों ने स्वीकृत किया था।
उन्होंने कहा कि तत्कालीन जिलाधिकारी व जिला न्यायाधीश ने मुझे समर्थन देकर न्याय करने का आदेश दिया था और न्याय की देवी जब कोई कार्य करने के लिए न्यायाधीश के समक्ष उपस्थित होकर आदेशित करती है तो वही न्यायाधीश कार्य करता है सभा में उपस्थित सभी अधिवक्ताओं तथा जन समुदाय ने करतल ध्वनि से इस बात का स्वागत किया।
सभा में अरुण तिवारी, पशुपतिनाथ दुबे, अनूप दुबे, रमेश कुमार पांडेय, अनिल कुमार विश्वकर्मा, शिवाकांत मिश्रा, मनीष शुक्ला, अंबरीश पांडेय, मनोज शुक्ला, सिंटू शुक्ला, श्रीकांत मिश्रा, अमित कुमार त्रिपाठी, दिवाकर दुबे, नागेंद्र नाथ पांडे आदि सैकड़ो अधिवक्ताओं की उपस्थिति रही।





