उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने कहा कि जम्मू-कश्मीर में मादक पदार्थों का व्यापार सीधे तौर पर आतंकवाद से जुड़ा है, और तस्करों से आतंकियों के मददगारों जैसा सुलूक होगा।
उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने शनिवार को कहा कि जम्मू-कश्मीर में मादक पदार्थों का व्यापार आतंकवाद से “सीधा संबंध” रखता है। उन्होंने कहा कि प्रशासन ड्रग नेटवर्क को तोड़ने और युवाओं में बढ़ती लत पर काबू पाने के लिए प्रयास तेज कर रहा है। ड्रग्स तस्करों और इसके कारोबार में लिप्त तत्वों के साथ भी वही सुलूक होगा जो आतंकियों के मददगारों केसाथ होता है।
आज यहां लोक भवन में पत्रकारों से बात करते हुए उपराज्पाल मनोज सिन्हा ने कहा कि 2021 से ‘नशा मुक्त भारत अभियान’ के तहत लगातार प्रयासों के बावजूद, खासकर युवा लड़कों और लड़कियों में नशे की समस्या गंभीर चिंता बनी हुई है। उन्होंने कहा, “हमें कुछ सफलता मिली है, लेकिन उतनी नहीं जितनी उम्मीद थी। युवाओं में बढ़ती लत चिंताजनक है और इसके लिए सामूहिक प्रयास जरूरी हैं। इसलिए अब जम्मू कश्मीर में 100 दिवसीय अभियान चलाया जा रह है।
नशे की कमाई आतंक पर हो रही खर्च
जम्मू कश्मीर को नशा मुक्त बनाने और यहां ड्रग्स कारोबार, नार्काे टेरर को समाप्त करने के लिए प्रशासन ने तीन-स्तरीय रणनीति अपनाई है, जिसमें सप्लाई चेन पर प्रहार, जमीनी स्तर पर जागरूकता का विस्तार और नशे के शिकार लोगों के इलाज व पुनर्वास को सुनिश्चित करना शामिल है।
सुरक्षा पहलुओं पर जोर देते हुए उन्होंने कहा कि मादक पदार्थों से होने वाली कमाई अक्सर आतंकवादी गतिविधियों में इस्तेमाल होती है। उन्होंने कहा, “ड्रग तस्कर भले ही समृद्ध दिखें, लेकिन यह पैसा अंततः आतंकवाद और हिंसा को बढ़ावा देता है।”
जम्मू-कश्मीर में शुरू किए गए 100-दिवसीय सघन अभियान में बड़े पैमाने पर जनभागीदारी देखी गई है, जिसमें लाखों लोग—युवा, महिलाएं, धार्मिक नेता, नागरिक समाज के सदस्य और राजनीतिक समूह शामिल हुए हैं। कार्रवाई के बारे में उन्होंने कहा कि सख्त मानक संचालन प्रक्रियाएं (एसओपी) लागू की गई हैं और ड्रग तस्करी में शामिल लोगों के खिलाफ एनडीपीएस अधिनियम के तहत कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
आरोपियों के खिलाफ लुकआउट नोटिस जारी
इसमें ड्राइविंग लाइसेंस रद्द करना, वाहन जब्त करना, बैंक खातों को फ्रीज करना, संपत्ति कुर्क करना और पासपोर्ट रद करने की सिफारिश जैसे कदम शामिल हैं। उन्होंने कहा, “फरार आरोपियों के खिलाफ लुकआउट नोटिस जारी किए जा रहे हैं और सप्लाई चेन तोड़ने के लिए पूरे नेटवर्क को निशाना बनाया जा रहा है।” उपराज्यपाल ने बताया कि प्रदेश सरकार ने नशा उन्मूलन केंद्रों और पुनर्वास केंद्रों की भी निगरानी शुरु कर दी है।
उनकी कार्यप्रणाली को बेहतर बनाने के लिए, नशा पीड़ितों को बेहतर उपचार सुविधा मिले, इसके लिए संबधित नियमों में भी आवश्यक संशोधन किया गया है। नियमों का पालन न करने वाले केंद्रों को बंद किया जाएगा। उन्होंने बताया कि अस्पतालों को नशा उपचार के लिए ओपीडी और आईपीडी सेवाओं को मजबूत करने के निर्देश दिए गए हैं। उन्होंने कहा, “हम एक ऐसी प्रणाली पर भी काम कर रहे हैं, जिसमें स्वस्थ हो चुके लोगों पर तीन साल तक नजर रखी जाएगी ताकि उनका पुनर्वास स्थायी बना रहे।”
फुटबाल स्टेडियम से लाल चौक तक पदयात्रा की घोषणा
जागरूकता पर जोर देते हुए उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने कहा कि इस अभियान को हर जिले, गांव और घर तक पहुंचाया जा रहा है, और परिवारों को बिना किसी झिझक के आगे आकर मदद लेने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। अभियान के तहत, एलजी सिन्हा ने रविवार (कल) श्रीनगर में फुटबाल स्टेडियम से लाल चौक तक पदयात्रा की घोषणा की। उन्होंने कहा, “मैं समाज के सभी वर्गों से अपील करता हूं कि बड़ी संख्या में भाग लें और इस अभियान को सफल बनाएं।”
इसे “जन आंदोलन” बताते हुए उपराज्यपाल ने मीडिया, सामुदायिक नेताओं और नागरिकों से सक्रिय योगदान देने की अपील की। उन्होंने कहा, “जब समाज की ताकत, कानून का सख्त पालन और प्रशासनिक संकल्प एक साथ आते हैं, तो हम इस समस्या को निर्णायक रूप से हरा सकते हैं।”





