गोण्डा। करनैलगंज तहसील क्षेत्र में विवादित भूमि पर अवैध कब्जा, बाउंड्री निर्माण और न्यायालय के आदेशों की अनदेखी का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। ग्राम कस्तूरी निवासी शिवकुमार पाण्डेय ने मुख्यमंत्री उत्तर प्रदेश समेत मंडलायुक्त देवीपाटन मंडल, जिलाधिकारी, पुलिस अधीक्षक, उपजिलाधिकारी तथा प्रभारी निरीक्षक कोतवाली करनैलगंज को शिकायती प्रार्थना पत्र भेजकर न्याय की गुहार लगाई है।
पीड़ित शिवकुमार पाण्डेय का आरोप है कि ग्राम कोंचा कासिमपुर निवासी विश्वनाथ तिवारी द्वारा विवादित गाटा संख्या 676 की भूमि पर जबरन मिट्टी भरान कर स्थिति परिवर्तन करके व अवैध रूप से बाउंड्री बनाकर उनकी लगभग एक बीघा भूमि पर कब्जा कर उसे अपने गाटा में मिला लिया गया है। पीड़ित का कहना है कि यह कार्रवाई राजस्व अभिलेखों के विपरीत एवं पूर्णतया विधि विरूद्ध है। शिकायत के अनुसार उक्त भूमि विवाद का मामला सिविल न्यायालय एफटीसी प्रथम गोण्डा तथा बोर्ड ऑफ रेवेन्यू उत्तर प्रदेश लखनऊ में विचाराधीन है। इतना ही नहीं, दोनों मामलों में उच्च न्यायालय लखनऊ बेंच द्वारा शीघ्र निस्तारण के निर्देश भी दिए जा चुके हैं। इसके बावजूद मौके की वास्तविक स्थिति बदलने और निर्माण कार्य कराने का प्रयास किया जा रहा है।
पीड़ित ने आरोप लगाया कि विपक्षी पक्ष की माधुरी देवी द्वारा स्वयं गाटा संख्या 676 पर स्थगन आदेश प्राप्त किए जाने के बावजूद आलोक कंस्ट्रक्शन के पक्ष में किरायानामा एग्रीमेंट निष्पादित किया गया, जिससे विवादित भूमि की स्थिति प्रभावित हो रही है। उन्होंने इसे न्यायालयीय आदेशों का खुला दुरुपयोग बताते हुए गंभीर अनियमितता करार दिया है। पीड़ित के मुताबिक उन्होने अपनी भूमि गाटा संख्या 677 पर माननीय न्यायालय सिविल जज जूनियर डिविजन गोंडा से स्थाई निषाधाज्ञा भी प्राप्त कर रखी है।
शिवकुमार पाण्डेय का यह भी कहना है कि विपक्षी दबंग और झगड़ालू प्रवृत्ति के है। उनका कहना है कि जब भी वह अपनी भूमि के पास जाते हैं तो विपक्षी गाली-गलौज करते हुए जान से मारने की धमकी देते हैं। पीड़ित के मुताबिक विपक्षी खुलेआम राजनीतिक पहुंच और पैसे का हवाला देते हुए कहते हैं कि “जहां जाना हो चले जाओ, कोई हमारा कुछ नहीं बिगाड़ सकता।
”पीड़ित ने प्रशासन से मांग की है कि विवादित भूमि से अवैध अतिक्रमण तत्काल हटवाकर पूर्व की स्थिति बहाल कराई जाए तथा न्यायालयीय आदेशों का सख्ती से पालन सुनिश्चित कराया जाए। साथ ही दोषियों के खिलाफ सुसंगत धाराओं में कार्रवाई कर क्षेत्र में शांति व्यवस्था बनाए रखने की मांग भी की गई है। पीड़ित द्वारा प्रार्थना पत्र के साथ विभिन्न न्यायालयों द्वारा पारित स्थगन आदेश, राजस्व अधिकारियों एवं अपर आयुक्त देवीपाटन मंडल के आदेश, जीपीएस लोकेशन फोटो तथा राजस्व परिषद सदस्य द्वारा पारित आदेश की प्रतियां भी संलग्न की गई हैं।
मामला सामने आने के बाद क्षेत्र में चर्चाओं का बाजार गर्म है। अब निगाहें प्रशासनिक कार्रवाई पर टिकी हैं कि आखिर न्यायालयीय आदेशों के अनुपालन और भूमि विवाद के समाधान को लेकर प्रशासन क्या कदम उठाता है।





