एक स्वास्थ्य क्रांति की शुरुआत और ग्रामीण जीवन में सकारात्मक बदलाव की उम्मीद
बढ़नी सिद्धार्थनगर। बढ़नी ब्लॉक के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र द्वारा ग्रामीण स्वास्थ्य, स्वच्छता एवं पोषण दिवस के तहत एक अभूतपूर्व और व्यापक स्वास्थ्य शिविर का आयोजन किया गया, जो तिरक्षहवा, प्रतापपुर, धनौरा काशी प्रसाद और रोमनदेई जैसे दूरस्थ ग्रामीण क्षेत्रों में विशेष सत्रों के रूप में आयोजित हुआ। इस पहल का नेतृत्व प्रभारी चिकित्साधिकारी डॉ. अविनाश चौधरी ने किया, जिन्होंने प्रत्येक सत्र का गहन भ्रमण कर न केवल गर्भवती महिलाओं की नियमित स्वास्थ्य जांच सुनिश्चित की, बल्कि बच्चों के टीकाकरण कार्यक्रम को मज़बूती प्रदान की और कुपोषित बच्चों (सैम-मैम) के प्रबंधन की विस्तृत समीक्षा भी की। उनकी निगरानी में स्वास्थ्य nhi सेवाओं की गुणवत्ता और प्रभावशीलता पर विशेष ध्यान दिया गया।
शिविर में डॉ. ओ.पी. यादव, बीएमसी-यूनिसेफ के नीलमणि श्रीवास्तव और आईओ राजकुमार सहित एक समर्पित टीम ने महत्वपूर्ण योगदान दिया। शिविर स्थल पर दवाइयों, टीकों, पोषण किट, विटामिन सप्लीमेंट्स और अन्य चिकित्सा आपूर्ति का प्रबंध किया गया था, जबकि दीवारों पर स्वच्छता, पोषण और स्वास्थ्य जागरूकता के रंगीन चार्ट लगाए गए, जो ग्रामीणों को शिक्षा प्रदान करने में सहायक सिद्ध हुए। इन चार्ट्स में पशु-पक्षियों की तस्वीरों के साथ-साथ ग्रामीण जीवन से जुड़े स्वास्थ्य संदेश शामिल थे, जो स्थानीय लोगों के लिए प्रासंगिक और आकर्षक थे।
इस शिविर ने ग्रामीण समुदाय, विशेषकर महिलाओं और बच्चों को स्वास्थ्य सेवाओं से जोड़ा, जिससे क्षेत्र में स्वास्थ्य जागरूकता और पहुंच में उल्लेखनीय वृद्धि हुई। गर्भवती महिलाओं की नियमित जांच के दौरान उनकी सेहत पर विशेष ध्यान दिया गया, जिसमें रक्तचाप, वजन और पोषण स्तर की जांच शामिल थी। बच्चों के टीकाकरण ने बीमारियों जैसे पोलियो, खसरा और डिप्थीरिया से बचाव में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, जबकि कुपोषण प्रबंधन के तहत प्रभावित बच्चों को पोषण सहायता और परामर्श प्रदान किया गया, जो इस पहल की गहराई और संवेदनशीलता को दर्शाता है।
शिविर के दौरान स्थानीय निवासियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया, जिसमें कई माताओं ने अपने बच्चों के स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता दिखाई और डॉक्टरों से परामर्श लिया। यह शिविर न केवल चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने का माध्यम बना, बल्कि ग्रामीणों को स्वस्थ जीवन शैली अपनाने, स्वच्छता बनाए रखने और पोषण पर ध्यान देने के लिए प्रेरित करने वाला एक मंच भी साबित हुआ। स्थानीय प्रशासन, स्वास्थ्य विभाग और यूनिसेफ की इस संयुक्त कोशिश से क्षेत्र में स्वास्थ्य क्रांति की नींव रखी गई है, जो भविष्य में और सकारात्मक परिणाम ला सकती है।
इस पहल ने ग्रामीणों में उम्मीद की किरण जगा दी है, जहां वे अब नियमित स्वास्थ्य जांच और टीकाकरण को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाने के लिए प्रेरित हुए हैं। आने वाले समय में इस तरह के शिविरों की निरंतरता से क्षेत्र में मातृ-शिशु मृत्यु दर कम करने और समग्र स्वास्थ्य में सुधार की संभावना बढ़ेगी, जो इस अभियान को और सार्थक बनाएगा।