Thursday, April 23, 2026
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बाबा साहब संविधान निर्माता ही नहीं,एक शिल्पकार भी हैं- शिवप्रसाद

इटावा। कर्वाखेड़ा स्थित ज्ञानस्थली विद्यालय में बाबा साहब अम्बेडकर की जयन्ती को बड़े ही हर्ष के साथ मनाया गया।विद्यालय की प्रातःवंदना के बाद विद्यालय समिति के अध्यक्ष(चेयरमैन) शिवप्रसाद यादव,विद्यालय के प्रधानाचार्य अंशुल तिवारी तथा विद्यालय प्रबंधन प्रमुख श्रीशिवमंगल ने बाबा साहब की फोटो पर पुष्प अर्पित कर पुष्पहार किया।श्री यादव ने बाबा साहब के बारे में व्याख्या करते हुए कहा-आज हमारा देश बड़े धूमधाम के साथ अंबेडकर जयंती मना रहा है,और उनके महान विचारों को याद करते हुए उन्हें नमन कर श्रद्धांजलि अर्पित कर रहा है।यह दिन केवल एक जयंती नहीं बल्कि सामाजिक न्याय,समानता और संविधान की भावना का उत्सव है।संविधान की रचना में उनके योगदान के साथ-साथ आजाद भारत की संस्थाओं के निर्माण में जो उनकी शानदार सक्रिय भूमिका रही।

सबल और सशक्त भारत के निर्माण में बाबसाहेब हम सबके प्रेरणापुंज हैं।डॉ.बीआर अंबेडकर वो शख्स हैं जिन्होंने भारत को उसका संविधान दिया और कोई भी देश बिना संविधान नहीं चल सकता।बाबा साहेब के नाम से मशहूर डॉ.भीमराव अंबेडकर को संविधान निर्माता और संविधान का शिल्पकार कहा जाता है।उन्होंने न सिर्फ संविधान निर्माण में सबसे अहम रोल अदा किया बल्कि समाज में दलितों पर हो रहे अत्याचारों के खिलाफ आवाज उठाई।बाबासाहेब ने अपना सारा जीवन भारतीय समाज में व्याप्त जाति व्यवस्था के खिलाफ संघर्ष में बिता दिया।उन्होंने भारतीय समाज में समानता लाने के काफी प्रयास किए।उन्होंने दलितों और पिछड़ों को उनका अधिकार दिलाने के लिए जीवन भर संघर्ष किया। उन्होंने हमेशा मजदूर वर्ग व महिलाओं के अधिकारों का समर्थन किया।अंबेडकर जी ने जीवन भर छुआछूत,जातिवाद और सामाजिक भेदभाव के खिलाफ संघर्ष किया।उन्होंने शिक्षा को सबसे बड़ा हथियार बताया और कहा ‘शिक्षित बनो, संगठित रहो और संघर्ष करो।’

14 अप्रैल 1891 में मध्यप्रदेश के महू में जन्मे बाबासाहेब कहा करते थे कि वह ऐसे धर्म को मानते हैं जो स्वतंत्रता, समानता और भाईचारा सिखाता है।उनका मानना था कि जीवन लम्बा होने के बजाय महान होना चाहिए।

बाबा साहेब अंबेडकर का परिवार महार जाति से संबंध रखता था,जिसे अछूत माना जाता था।वह दलित थे। वह उस वक्त समाज में व्याप्त भेदभाव से लड़कर अपनी काबिलियत के दम पर आजाद भारत के पहले कानून मंत्री के पद तक पहुंचे।सना 1990 में उन्हें मरणोपरांत भारत का सर्वोच्च सम्मान भारत रत्न भी दिया गया।हमें शपथ लेनी चाहिए कि हम भी उनके बताए रास्ते पर चलेंगे।
कार्यक्रम में विद्यालय प्रबंधन के मुख्य सदस्य श्री शिवमंगल सर तथा खेल विभाग प्रमुख वासिफ खान सर तथा वित्त विभाग प्रमुख नीरज त्रिपाठी सर व विद्यालय परिवार के सभी शिक्षक गण मौजूद थे।

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