HomeLucknowनैक मूल्यांकन में जगह बनाना हमारे लिए बड़ी उपलब्धि

नैक मूल्यांकन में जगह बनाना हमारे लिए बड़ी उपलब्धि

‘ख्वाजा मुईनुद्दीन चिश्ती भाषा विश्वविद्यालय ने विगत एक वर्ष में शैक्षणिक, शोध, नवाचार, आधारभूत संरचना तथा छात्र कल्याण के क्षेत्र में अनेक महत्वपूर्ण उपलब्धियाँ अर्जित की हैं। विश्वविद्यालय की इन उपलब्धियों तथा भावी योजनाओं के संबंध में अवधनामा संवाददाता की कुलपति प्रो. अजय तनेजा से बातचीत।

कुलपति प्रो. अजय तनेजा

प्रश्न 1 : बीते एक वर्ष को आप विश्वविद्यालय के लिए किस रूप में देखते हैं?
उत्तर : यह वर्ष विश्वविद्यालय के इतिहास में उपलब्धियों और विस्तार का वर्ष रहा है। माननीय कुलाधिपति महोदया के मार्गदर्शन एवं सतत निरीक्षण में जून २०२५ में नैक मूल्यांकन की प्रक्रिया पूर्ण हुई और विश्वविद्यालय को बी प्लस प्लस श्रेणी प्राप्त हुई। विश्वविद्यालय में पहली बार कॉर्पस फंड की स्थापना की गई। सत्र २०२५-२६ में सर्वाधिक प्रवेश हुए और वर्तमान में पाँच हजार तीन सौ से अधिक विद्यार्थी अध्ययनरत हैं। इन उपलब्धियों ने विश्वविद्यालय को नई पहचान और नई दिशा प्रदान की है।

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प्रश्न 2 : शैक्षणिक विस्तार और नए पाठ्यक्रमों के क्षेत्र में विश्वविद्यालय ने क्या प्रगति की है?
उत्तर : विद्यार्थियों की बदलती आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए विश्वविद्यालय ने अनेक नए पाठ्यक्रम प्रारम्भ किए हैं। एम०ए० राजनीति शास्त्र तथा बी०कॉम० ट्रैवल्स एंड टूरिज्म के साथ-साथ आगामी सत्र से बी०ए० अवधी, बी०ए० संगीत वोकल, बी०टेक० साइबर सिक्योरिटी, एम०टेक० सिविल इंजीनियरिंग, एम०टेक० बायोटेक्नोलॉजी, एम०एस०सी० प्राणी विज्ञान, एम०एस०सी० सूक्ष्मजीव विज्ञान तथा एम०एस०सी० जैव प्रौद्योगिकी जैसे पाठ्यक्रम प्रारम्भ किए जा रहे हैं। सत्र २०२६-२७ के लिए अट्ठानवे शैक्षणिक कार्यक्रमों में प्रवेश प्रक्रिया भी प्रारम्भ कर दी गई है।

प्रश्न 3 : शैक्षणिक गुणवत्ता, परीक्षा व्यवस्था और मान्यताओं के क्षेत्र में क्या उपलब्धियाँ रहीं?
उत्तर : विश्वविद्यालय ने सभी परीक्षाएँ समय पर सम्पन्न कराईं तथा परिणाम भी समयबद्ध ढंग से घोषित किए। प्रथम सेमेस्टर के परीक्षा परिणाम प्रदेश में सबसे कम समय में घोषित कर एक उल्लेखनीय उपलब्धि प्राप्त की गई। विधि अध्ययन संकाय को बार काउंसिल से, भेषज संकाय को फार्मेसी परिषद से तथा अभियांत्रिकी एवं प्रौद्योगिकी संकाय को अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद से अनुमोदन प्राप्त हुआ। साथ ही बी०बी०ए०, बी०सी०ए०, एम०बी०ए० तथा एम०सी०ए० पाठ्यक्रमों के लिए भी विस्तार अनुमोदन प्राप्त हुआ।

प्रश्न 4 : विश्वविद्यालय में आधारभूत संरचना और तकनीकी सुविधाओं के विकास के लिए क्या कार्य किए गए?
उत्तर : पुस्तकालय में नवीन वाचनालय और इन्फ्लिबनेट कक्ष स्थापित किया गया। विधि विभाग में मूट कोर्ट तथा संगणक विज्ञान एवं अभियांत्रिकी विभाग में कृत्रिम बुद्धिमत्ता और पायथन प्रयोगशालाएँ स्थापित की गईं। संग्रहालय, कला दीर्घा, मुक्त व्यायामशाला, औषधीय उद्यान, योग वाटिका और स्वचित्र बिंदु की स्थापना की गई। मीडिया स्टूडियो, भाषा प्रयोगशाला और लिफ्ट को क्रियाशील बनाया गया। इंटरनेट क्षमता को पाँच सौ मेगाबिट प्रति सेकण्ड से बढ़ाकर एक गीगाबिट प्रति सेकण्ड किया गया तथा वेबसाइट के नवीनीकरण की प्रक्रिया प्रारम्भ की गई।

प्रश्न 5 : छात्र कल्याण और छात्र सुविधाओं के क्षेत्र में विश्वविद्यालय ने क्या कदम उठाए?
उत्तर : छात्र कल्याण विश्वविद्यालय की प्राथमिकताओं में रहा है। सर्वाइकल कैंसर से बचाव हेतु पैंतीस छात्राओं को टीके की तीनों खुराकें उपलब्ध कराई गईं। छात्रावासों का विकास एवं मरम्मत कराई गई तथा व्यायामशाला, धुलाई यंत्र और नवीनीकृत सामुदायिक कक्ष की सुविधाएँ उपलब्ध कराई गईं। दीक्षांत समारोह में उपाधियों को नॉन टियरेबल बनाया गया और सभी उपाधियाँ डिजिलॉकर पर उपलब्ध कराई गईं। विद्यार्थियों को प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए निःशुल्क कोचिंग तथा मूल्य संवर्धित पाठ्यक्रमों की सुविधा भी प्रदान की जा रही है।

प्रश्न 6 : खेल, संस्कृति और सामाजिक उत्तरदायित्व के क्षेत्र में विश्वविद्यालय की क्या भूमिका रही?
उत्तर : विश्वविद्यालय ने खेल, संस्कृति और सामाजिक उत्तरदायित्व के क्षेत्रों में उल्लेखनीय कार्य किए हैं। राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं में पहली बार विद्यार्थियों की टीमों को भेजा गया, जहाँ खिलाड़ियों ने उत्कृष्ट प्रदर्शन किया। चांसलर कप प्रतियोगिता में विश्वविद्यालय की टीम उपविजेता रही। विद्यार्थियों में खेल भावना को प्रोत्साहित करने के लिए खेल मैदान का विकास किया गया तथा टेनिस कोर्ट और वॉलीबॉल कोर्ट के निर्माण का कार्य प्रगति पर है, जो शीघ्र ही पूर्ण हो जाएगा। साझा संस्कृति और समरसता के विकास के लिए विभिन्न राज्य स्थापना दिवस मनाए गए तथा विविध सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए गए। योग दिवस, राष्ट्रीय खेल दिवस, राष्ट्रीय पोषण सप्ताह तथा अन्य जागरूकता कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। इसके साथ ही राजकीय बाल गृह और राजकीय सम्प्रेक्षण गृह में निरन्तर शिक्षण एवं संवाद कार्यक्रम संचालित किए गए, जिससे समाज के प्रति विश्वविद्यालय की प्रतिबद्धता भी सुदृढ़ हुई।

प्रश्न 7 : शोध, नवाचार और अकादमिक सहयोग के क्षेत्र में विश्वविद्यालय ने क्या उपलब्धियाँ अर्जित की हैं?
उत्तर : विश्वविद्यालय ने शोध, नवाचार और अकादमिक सहयोग को नई गति प्रदान की है। विभिन्न राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं के साथ अब तक इकहत्तर समझौता ज्ञापनों पर हस्ताक्षर किए जा चुके हैं तथा यह प्रक्रिया निरन्तर जारी है इसके अतिरिक्त रज़ा रामपुर लाइब्रेरी, एम्प्लॉयमेंट स्टेट गवर्नमेंट के साथ समझौता ज्ञापन की दिशा में कार्य किया गया। विश्वविद्यालय ने बालार्क फाउंडेशन सहित विभिन्न संस्थाओं के सहयोग से विद्यार्थियों के शैक्षणिक एवं कौशल विकास के अवसरों का विस्तार किया है। उच्च शिक्षा विभाग द्वारा विभिन्न शोध परियोजनाओं को स्वीकृति प्रदान की गई तथा शोध कार्यों के लिए वित्तीय सहायता प्राप्त हुई, जिससे विश्वविद्यालय में शोध संस्कृति को और अधिक सुदृढ़ बनाने में सहायता मिली।

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प्रश्न 8 : विद्यार्थियों के नवाचार और तकनीकी उपलब्धियों के बारे में आप क्या कहना चाहेंगे?
उत्तर : विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों ने नवाचार के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य किए हैं। संगणक विज्ञान एवं अभियांत्रिकी विभाग के विद्यार्थियों द्वारा पशु पहचान प्रणाली विकसित की गई। विद्यार्थियों ने त्रि-आयामी मुद्रण तकनीक के माध्यम से विभिन्न प्रतिमाएँ निर्मित कीं। विश्वविद्यालय में नवाचार और उद्यमिता को बढ़ावा देने के लिए नवाचार एवं उद्यमिता तंत्र को सुदृढ़ किया जा रहा है। विश्वविद्यालय के ऊष्मायन केन्द्र में अनेक नवप्रारम्भ पंजीकृत हो चुके हैं तथा साइबर सुरक्षा पाठ्यक्रम का भी शुभारम्भ किया गया है।

प्रश्न 9 : भाषा, साहित्य, भारतीय ज्ञान परम्परा और शोध संस्कृति के विकास के लिए क्या प्रयास किए गए हैं?
उत्तर : विश्वविद्यालय ने अवधी अध्ययन को नई दिशा प्रदान की है। अवधी अध्ययन पीठ के माध्यम से कार्यशालाओं और शैक्षणिक गतिविधियों का आयोजन किया गया तथा बी०ए० अवधी प्रारम्भ करने की प्रक्रिया पूरी की गई। भारतीय ज्ञान परम्परा केन्द्र की स्थापना की गई है। शिक्षकों और विद्यार्थियों को भारतीय ज्ञान परम्परा पर शोध कार्य हेतु प्रोत्साहन राशि प्रदान किए जाने की घोषणा की गई है। शोधार्थियों के लिए शोध लेखन, उच्च गुणवत्ता वाली शोध पत्रिकाओं और शैक्षणिक संसाधनों से परिचय कराने हेतु विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए गए। इसके साथ ही शिक्षकों को पेटेंट दाखिल करने के लिए सहायता राशि उपलब्ध कराने की व्यवस्था की गई है,

प्रश्न 10 : अंत में, विश्वविद्यालय की भावी योजनाओं और अपने संदेश के बारे में आप क्या कहना चाहेंगे?
उत्तर : विश्वविद्यालय का लक्ष्य शैक्षणिक उत्कृष्टता, शोध, नवाचार और सामाजिक प्रतिबद्धता के क्षेत्र में निरन्तर आगे बढ़ना है। आगामी समय में नए पाठ्यक्रम प्रारम्भ किए जाने की योजना है विभिन्न विभागों में भाषा प्रयोगशालाएँ स्थापित की जाएँगी, नए शिक्षकों की नियुक्तियाँ होंगी तथा नवाचार और उद्यमिता को और अधिक प्रोत्साहित किया जाएगा। अभियांत्रिकी एवं सूचना प्रौद्योगिकी विभाग के लिए नई बहुमंजिला इमारत, खेल सुविधाओं । खेल कूद के मैदान को विकसित करना, एन०सी०सी० बालक विंग की स्थापना, सौर ऊर्जा को बढ़ावा तथा प्रयोगशालाओं का आधुनिकीकरण भी प्रस्तावित है।
हमारा प्रयास है कि विश्वविद्यालय शिक्षा, शोध, भाषा और संस्कृति के क्षेत्र में राष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान स्थापित करे। मैं विश्वविद्यालय परिवार, माननीय कुलाधिपति महोदया, राज्य सरकार, शिक्षकों, कर्मचारियों और विद्यार्थियों का आभार व्यक्त करता हूँ, जिनके सहयोग से यह प्रगति संभव हो सकी।

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