लखनऊ। राष्ट्रीय लोकदल के प्रदेष प्रवक्ता सुरेन्द्रनाथ त्रिवेदी ने कहा कि केन्द्रीय मंत्री मेनका गांधी द्वारा यह कहा जाना कि गन्ना किसान गन्ना बोते क्यों हैं, गन्ना किसानों की अवहेलना जैसा बयान है। भारतीय जनता पार्टी पूंजीपतियों की पार्टी है और 24 घण्टे ए0सी0 में रहने वाले लोग किसानों और मजदूरों की स्थिति समझने में पूर्णतः नाकाम साबित होते रहे हैं। जब चुनावी भाषण देना होता है तो यही भारतीय जनता पार्टी के लोग किसानों मजदूरों और मजलूमों के सच्चे हिमायती बनने का ढोंग करते हैं और अपनी नाटकीय भाषा शैली से इस अल्प षिक्षित वर्ग को अपने पक्ष में लुभाने में कामयाब हो जाते हैं। चुनाव जीतने के बाद यह भी सम्भव नहीं होता कि किसान मजदूर या कोई मजलूम व्यक्ति इनसे मुलाकात ही कर सके।

त्रिवेदी ने कहा कि राष्ट्रीय लोकदल की नीतियां और रीतियां सदैव किसानों के आस पास घूमती रही हैं यही कारण है कि राष्ट्रीय लोकदल के जनक चरण सिंह को सम्पूर्ण विष्व में किसान मसीहा की संज्ञा दी गयी है और उनके सुपुत्र अजित सिंह उन्हीं के पदचिन्हों पर चलते हुये किसान मसीहा द्वारा बनायी गयी रीतियों और नीतियों का ही प्रचार प्रसार करने के साथ साथ किसान केन्द्रित राजनीति के ही अगुवा रहे हैं।अजित सिंह को जब भी केन्द्रीय मंत्रिमण्डल में स्थान मिला तो उनके द्वारा सैकडों फैसले किसानों के हक में ही किये गये। चाहे खाद और मिनरल की सब्सिडी हो अथवा गन्ना मिलों को स्थापित करने की अनुमति हो अथवा उन्नत खेती की ओर किसानों का ध्यान आकृष्ट करना हो या तैयार फसलों की उचित कीमत दिलानी हो, अजित सिंह कभी पीछे नही रहे। यहां तक की पूर्ववर्ती अटल की सरकार में किसानों पर आयकर जैसी कुरीति को लागू कराने के विरोध में उन्होंने केन्द्रीय कृषि मंत्री पद से त्याग पत्र दे दिया था। इससे यह सिद्व होता है कि किसानों के हक की लडाई केवल राष्ट्रीय लोकदल सडक से संसद तक लडता है और लडता रहेगा।
रालोद प्रदेष प्रवक्ता ने कहा कि उ0प्र0 का किसान जागरूकता की ओर कदम रख चुका है और भाजपा की किसान विरोधी और जन विरोधी नीतियों की परख कर चुका है और राष्ट्रीय लोकदल के साथ खडा है।

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