शिया सेंट्रल वक़्फ़ बोर्ड के चेयरमैन वसीम रिज़वी ने आज एक प्रेस बयान जारी कर बाबरी मस्जिद मामले में शिया वक्फ बोर्ड को भी सुप्रीम कोर्ट द्वारा पक्षकार मान लिए जाने का दावा किया है और इसी के साथ उन्होने शरई हुक्म भी जारी कर दिया और कहा है कि बाबरी मस्जिद पर कभी नमाज़ जायज़ नहीं थी और न ही कभी जाएज़ हो पायेगी।

उन्होंने कहा की मा0 सुप्रीम कोर्ट से जारी की गई पक्षकारों की सूची पत्र के साथ संलग्न है, जिसमें उ0प्र0 शिया सेण्ट्रल वक्फ बोर्ड का नाम 50 नम्बर पर अंकित है, जब कि सुन्नी पक्षकार यह भ्रम फैला रहे है कि उ0प्र0 शिया सेण्ट्रल वक्फ बोर्ड का पक्ष खारिज कर दिया गया है, जो कि गलत है। उ0प्र0 शिया सेण्ट्रल वक्फ बोर्ड ने मा0 सुप्रीम कोर्ट के समक्ष हिन्दू पक्षकारों से समझौता कर अपनी बात रखते हुए कहा है कि वर्ष-1528 में राम जन्म भूमि पर बनाई गई विवादित मस्जिद मीर बाकी द्वारा बनाई गई थी और वह शिया मुसलमान था। इस लिए सुन्नी मुसलमानों से उक्त मस्जिद का कोई सम्बन्ध नही है। उ0प्र0 शिया सेण्ट्रल वक्फ बोर्ड को इस सम्बन्ध में अति-महत्वपूर्ण पुरानें कागज़ात भी प्राप्त हुए है, जिन्हें उ0प्र0 शिया सेण्ट्रल वक्फ बोर्ड मा0 उच्चतम न्यायालय मंे सुनवाई के दौरान प्रस्तुत करेगा। उ0प्र0 शिया सेण्ट्रल वक्फ बोर्ड को यह पूरी उम्मीद है कि मा0 न्यायालय भूमि विवाद में राम जन्म भूमि पर बने विवादित ढ़ाँचे के सम्बन्ध में उ0प्र0 शिया सेण्ट्रल वक्फ बोर्ड को साक्ष्यों के आधार पर असली पक्षकार मानते हुए उ0प्र0 शिया सेण्ट्रल वक्फ बोर्ड के प्रस्ताव पर विचार करेगा, जिसमें उ0प्र0 शिया सेण्ट्रल वक्फ बोर्ड द्वारा यह कहा गया है कि उ0प्र0 शिया सेण्ट्रल वक्फ बोर्ड राम जन्म भूमि स्थल पर मीर बाकी द्वारा बनाए गए विवादित ढ़ाँचे से अपना अधिकार समाप्त करते हुए हिन्दू समुदाय को पूर्ण अधिकार देता है कि वह राम जन्म भूमि स्थल पर भव्य राम मन्दिर बनवा ले और उ0प्र0 शिया सेण्ट्रल वक्फ बोर्ड, लखनऊ में एक मस्जिदे अमन बनवा लेगा, क्योंकि इस्लामिक सिद्धान्तों के अनुसार किसी विवादित जगह पर या किसी कब्ज़ाई हुई भूमि पर नमाज़ नही पढ़ी जा सकती है। उ0प्र0 शिया सेण्ट्रल वक्फ बोर्ड द्वारा इस सम्बन्ध में आॅल इण्डिया मुस्लिम पर्सनल लाॅ बोर्ड को पत्र लिखते हुए कहा गया है कि नमाज़ के सम्बन्ध में इस्लामिक सिद्धान्तों के अनुसार अपनी ज़िम्मेदारी निभाए, वह उन समस्त विवादित मस्जिदों जिन्हें मुस्लिम शासको द्वारा मन्दिरों को तोड़ कर बनाया गया है, उनमें हो रही नमाज़ें नजाएज़ है, । वर्ष-1991 में जो कानून बनाया गया है कि वर्ष-1947 के बाद से बाबरी मस्जिद को छोड़ कर, जो मस्जिद मन्दिर जिस स्थिति में है, वह वैसे ही रहेंगे। उक्त कानून विवादित मस्जिदों की यथास्थिति बनाए रखने के लिए है, परन्तु उक्त कानून का सम्बन्ध इस्लामिक सिद्धान्तों के अनुसार नमाज़ के नियमों से नही है। इस कारण यह आॅल इण्डिया मुस्लिम पर्सनल लाॅ बोर्ड की ज़िम्मेदारी है कि वह इस्लामिक सिद्धान्तों का अनुपालन सुनिश्चित कराते हुए इन समस्त 09 मस्जिदों पर हो रही नमाज़ को तुरन्त बन्द कराए और मुसलमानों को गुनह से बचाए।





