विशेषज्ञ ने बताया—समय प्रबंधन, योग, ध्यान और सकारात्मक सोच से कम किया जा सकता है तनाव, टेली-मानस हेल्पलाइन की दी जानकारी
हमीरपुर। जिलाधिकारी अभिषेक गोयल के निर्देश पर बुधवार को विकास भवन सभागार में जनपद स्तरीय अधिकारियों एवं कर्मचारियों के लिए व्यक्तिगत विकास विषयक प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया। प्रशिक्षण के प्रथम सत्र में साइकोथैरेपिस्ट डॉ. नीता ने “तनाव प्रबंधन—काम के दबाव के बीच मानसिक स्वास्थ्य बनाए रखना” विषय पर विस्तृत जानकारी देते हुए तनाव से निपटने के प्रभावी उपाय बताए।
डॉ. नीता ने कहा कि बढ़ते कार्यभार, समयबद्ध जिम्मेदारियों, जनअपेक्षाओं, पारिवारिक दायित्वों और बदलती जीवनशैली के कारण तनाव आज सामान्य समस्या बन गया है। यदि समय रहते इसका प्रबंधन न किया जाए तो यह कार्यक्षमता, निर्णय क्षमता, शारीरिक स्वास्थ्य और मानसिक संतुलन पर प्रतिकूल प्रभाव डाल सकता है।
उन्होंने बताया कि समय प्रबंधन, कार्यों की प्राथमिकता तय करना, पर्याप्त नींद, नियमित व्यायाम, संतुलित आहार, सकारात्मक सोच, ध्यान, श्वास अभ्यास, माइंडफुलनेस और कार्य-जीवन संतुलन जैसी आदतें तनाव को काफी हद तक कम कर सकती हैं। प्रशिक्षण के दौरान प्रतिभागियों को गहरी श्वास और मानसिक एकाग्रता के व्यावहारिक अभ्यास भी कराए गए तथा टीम भावना और सकारात्मक दृष्टिकोण के साथ कार्य करने के लिए प्रेरित किया गया।
प्रशिक्षण में भारत सरकार की राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य हेल्पलाइन टेली-मानस की जानकारी भी दी गई। बताया गया कि इस निःशुल्क और गोपनीय सेवा के माध्यम से तनाव, अवसाद, एंग्जायटी, विभिन्न मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं, नशे की लत, परीक्षा संबंधी तनाव तथा आत्महत्या के विचारों से जूझ रहे लोगों को मनोसामाजिक परामर्श उपलब्ध कराया जाता है। जरूरतमंद व्यक्ति 14416 या 1800-891-4416 पर कॉल कर इस सेवा का लाभ ले सकते हैं।
कार्यक्रम में डीसी मनरेगा राघवेंद्र सिंह, जिला मिशन प्रबंधक (डीसी-एनआरएलएम) ज्ञान प्रकाश, जिला क्षेत्रीय आयुर्वेदिक एवं यूनानी अधिकारी डॉ. निरेन्द्र बहादुर सिंह, डिप्टी आरएमओ घनश्याम वर्मा, जिला कृषि अधिकारी डॉ. हरिशंकर, जिला प्रशिक्षण अधिकारी संदीप कुमार, जिला सूचना अधिकारी सतीश कुमार सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित रहे। प्रतिभागियों ने प्रशिक्षण को उपयोगी बताते हुए कहा कि इससे तनावपूर्ण परिस्थितियों में बेहतर निर्णय लेने और कार्यकुशलता बढ़ाने की प्रेरणा मिली। कार्यक्रम का मुख्य संदेश रहा कि “स्वस्थ मन ही प्रभावी, संवेदनशील एवं जनोन्मुखी प्रशासन की आधारशिला है।”





