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सांकेतिक भाषा व स्मार्ट तकनीक से बदलेगी दिव्यांग बच्चों के पढ़ाई के आयाम

यह अभिनव प्रयोग सिद्धार्थनगर में पहली बार होने जा रहा है

उसका बाजार सिद्धार्थनगर। समावेशी शिक्षा शाखा की पहल पर डिजिटल तकनीक अब उन बच्चों के जीवन में नई रोशनी लेकर आएगी, पढ़ने-लिखने में कठिनाई हो रही थी। इसके माध्यम से एनसीईआरटी की पुस्तकों में दिए गए क्यूआर कोड के माध्यम से साइन लैंग्वेज का वीडियो दिखाकर बच्चों को पढ़ाया जाएगा। यह अभिनव प्रयोग सिद्धार्थनगर में पहली बार होने जा रहा है। बता दें कि श्रवणबाधित बच्चों के सामने प्राथमिक कक्षाओं के बाद भाषा सबसे बड़ी बाधा बन जाती थी। सामान्य कक्षाओं में कुछ बच्चे पढ़ लेते थे, लेकिन उच्च कक्षाओं में साइन लैंग्वेज ही उनके लिए सबसे प्रभावी माध्यम साबित होगी। लंबे समय से इस दिशा में प्रयास तो हो रहे थे, मगर नियमित कक्षा शिक्षण में अपेक्षित सफलता नहीं मिल पा रही थी।

समग्र शिक्षा के डीसी करुणपति त्रिपाठी ने बताया कि 2025-26 की एनसीईआरटी पुस्तकों का अध्ययन किया, जिसमें प्रत्येक पाठ के साथ क्यूआर कोड आधारित साइन लैंग्वेज वीडियो उपलब्ध थे। इस सत्र में लागू करने हेतु समस्त विशेष शिक्षकों को निर्देशित किया गया, उनकी तरफ से समस्त शिक्षकों से भी यह अनुरोध किया जा रहा कि श्रवणबाधित बच्चों को पढ़ाने के लिए पाठ्यपुस्तक में दिए गए क्यूआर कोड का उपयोग करें। इससे बच्चों की न केवल वार्ता कौशल बेहतर होगी, बल्कि पाठ्यवस्तु की समझ और परीक्षा परिणाम भी सुधरेंगे। जिले के उन सभी विद्यालयों में यह व्यवस्था लागू की जाएगी, जहां श्रवणबाधित विद्यार्थी अध्ययनरत हैं। स्पेशल एजुकेटर और विद्यालयी शिक्षक मिलकर स्मार्ट टीवी, टैबलेट व मोबाईल फोन के माध्यम से क्यूआर कोड स्कैन कर बच्चों को साइन लैंग्वेज वीडियो से पढ़ाएंगे। स्पेशल एजुकेटर दिव्यांग बच्चों को वीडियो की भाषा सांझाएंगे, फिर शिक्षक प्रतिदिन उसका अभ्यास कराकर अधिगम को मजबूत करेंगे।

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