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डिजिटल युग में बच्चों को साहित्य से जोड़ने की अनूठी पहल, NBT ने पेश की आधुनिक कालजयी बाल कहानियां और किशोरों के लिए भारतीय कथाएं

राष्ट्रीय पुस्तक न्यास (NBT) ने डिजिटल युग में बच्चों और किशोरों को साहित्य से जोड़ने के लिए ‘आधुनिक कालजयी बाल कहानियां’ और ‘किशोरों के लिए भारतीय कथाएं’ शृंखलाएं शुरू की हैं। यह पहल पठन संस्कृति को बढ़ावा देने, भाषा कौशल विकसित करने और मानवीय मूल्यों व सांस्कृतिक समझ को मजबूत करने का लक्ष्य रखती है।

बाल साहित्य का उद्देश्य केवल बच्चों का मनोरंजन करना नहीं है, बल्कि उन्हें पीढ़ियों के संस्कारों, प्रकृति-प्रेम और जीवन-मूल्यों से जोड़ना भी है। आज के समय में जब बच्चों और किशोरों का अधिकांश समय डिजिटल माध्यमों (स्क्रीन्स) पर बीत रहा है, तब उन्हें वापस किताबों की ओर आकर्षित करने के लिए राष्ट्रीय पुस्तक न्यास (NBT) ने एक बड़ा कदम उठाया है। NBT द्वारा हिंदी साहित्य की श्रेष्ठ परंपराओं को नई पीढ़ी तक पहुँचाने के लिए ‘आधुनिक कालजयी बाल कहानियां’ और ‘किशोरों के लिए भारतीय कथाएँ’ शृंखलाओं का प्रकाशन किया जा रहा है।

8 से 12 वर्ष के बच्चों के लिए ‘आधुनिक कालजयी बाल कहानियां’

नई शिक्षा नीति (NEP) 2020 में बच्चों के बीच पठन संस्कृति (Reading Culture) के विकास पर विशेष बल दिया गया है, ताकि उनमें भाषा कौशल, रचनात्मकता और आलोचनात्मक चिंतन विकसित हो सके। इसी उद्देश्य से ‘आधुनिक कालजयी बाल कहानियां’ शृंखला तैयार की गई है। इसमें 8 से 12 वर्ष तक के बच्चों के लिए हिंदी साहित्य के 21 महत्वपूर्ण रचनाकारों की कहानियों को आकर्षक पुस्तक-सज्जा और रंग-बिरंगे चित्रों के साथ प्रकाशित किया जा रहा है। बाल मनोविज्ञान को ध्यान में रखते हुए बनाए गए ये रंगीन चित्र कहानियों को और अधिक जीवंत और रोचक बनाते हैं।

दिग्गज साहित्यकारों की रचनाओं का संगम

इस शृंखला के जरिए बच्चों को महान लेखकों की रचनाओं को पढ़ने का अवसर मिलेगा:

  • मुंशी प्रेमचंद की ‘मिट्ठू’ और ‘नादान दोस्त’ तथा भीष्म साहनी की ‘चमगादड़ का रस’ और ‘दो गौरैया’ जैसी कहानियाँ बच्चों को जीवों की संवेदनाओं और प्रकृति से जोड़ेंगी।
  • जयशंकर प्रसाद की प्रसिद्ध कहानी ‘छोटा जादूगर’ बच्चों को अभाव में भी जिम्मेदारी समझने और आत्मविश्वास बनाए रखने की प्रेरणा देगी।
  • इनके अतिरिक्त फणीश्वरनाथ रेणु, विष्णु प्रभाकर, हजारी प्रसाद द्विवेदी, सुमित्रानंदन पंत, कमलेश्वर, सुभद्रा कुमारी चौहान और मोहन राकेश जैसे पुरोधाओं की बहुचर्चित कहानियां भी इस शृंखला का अहम हिस्सा हैं।
  • उल्लेखनीय है कि इस शृंखला की सात पुस्तकों का लोकार्पण इसी वर्ष जनवरी में आयोजित विश्व पुस्तक मेले में किया जा चुका है और शेष पुस्तकें अब बाल पाठकों के लिए पूरी तरह तैयार हैं।

छूटे हुए पाठक वर्ग के लिए ‘किशोरों के लिए भारतीय कथाएं’

अक्सर देखा गया है कि बाल साहित्य और वयस्क साहित्य के बीच किशोर पाठक कहीं छूट जाते हैं। किशोरों की मानसिक, भावनात्मक और वैचारिक समझ को सही दिशा देने के लिए NBT ने ‘किशोरों के लिए भारतीय कथाएँ’ नामक एक और महत्वपूर्ण प्रकाशन पहल की है।

इस शृंखला में किशोरों के नैतिक मूल्यों एवं सांस्कृतिक समझ के विकास को ध्यान में रखते हुए मन्नू भंडारी, नरेंद्र कोहली, सुभद्रा कुमारी चौहान, उषाकिरण खान, मालती जोशी, सुदर्शन और आनंद प्रकाश जैन जैसे विविध रचनाधर्मी लेखकों की कालजयी रचनाओं को संकलित किया गया है।

सांस्कृतिक संवाद और संवेदनशीलता की दिशा में महत्वपूर्ण कदम

NBT की यह दोनों शृंखलाएं केवल साहित्यिक धरोहर के संरक्षण का प्रयास नहीं हैं, बल्कि यह देश के प्रतिष्ठित उपन्यासकारों और कथाकारों की कालजयी रचनाओं को बहुत ही सुलभ रूप में नई पीढ़ी तक पहुँचाने का माध्यम हैं। इससे न केवल युवाओं में साहित्य पढ़ने की आदत विकसित होगी, बल्कि राष्ट्रीय एकता, मानवीय मूल्यों और सांस्कृतिक संवाद को भी नई मजबूती मिलेगी।

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