उपमुख्यमंत्री सुरिंदर चौधरी ने जम्मू-कश्मीर को राज्य का दर्जा दिलाने के लिए दिल्ली में होने वाले प्रदर्शन में सभी दलों से शामिल होने की अपील की है। उन्होंने कहा कि जो दल इस धरने में भाग नहीं लेगा, वह जम्मू-कश्मीर का गद्दार होगा, और उमर अब्दुल्ला ने ‘आईएनडीआईए’ गठबंधन को भी न्योता दिया है।
जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री सुरिंदर चौधरी ने सभी दलों से संसद के मानसून सत्र के पहले दिन राज्य के दर्जे की मांग के समर्थन में दिल्ली में आयोजित किए जा रहे प्रदर्शन में शामिल होने की अपील की है। उन्होंने कहा कि जो इस धरने में भाग नहीं लेगा, वह जम्मू-कश्मीर का गद्दार होगा।
बांडीपोरा में बुधवार को विकास परियोजनाओं का जायजा लेने के बाद पत्रकारों के साथ बातचीत में उपमुख्यमंत्री ने कहा कि मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला के नेतृत्व में प्रदेश सरकार सभी के विकास के लिए हर संभव प्रयास कर रही है। जम्मू कश्मीर को राज्य का दर्जा दिलाने के लिए सभी संभव प्रयास किए जा रहे हैं।
दिल्ली में होने वाले धरने में दूध का दूध और पानी का पानी हो जाएगा। अपने आप पता चल जाएगा कि कौन चाहता है कि जम्मू कश्मीर को राज्य का दर्जा मिले और कौन जम्मू कश्मीर के लोगों को उनके राजनीतिक-सामाजिक-आर्थिक अधिकारों से वंचित रखना चाहता है।
उन्होंने किसी का नाम नहीं लिया, लेकिन उनका संकेत भाजपा की तरफ था, क्योंकि भाजपा इस प्रस्तावित धरने से दूर रहने का संकेत दे रही है। दौरे के अंत में उन्होंने बांडीपोरा–सोपोर मार्ग पर नए पुल के निर्माण के लिए 1.2 करोड़ रुपये की धनराशि जारी करने की घोषणा की।
उमर ने आईएनडीआईए गठबंधन को भी दिया न्योता
आपको बता दें कि पिछले सप्ताह एनसी ने घोषणा की थी कि उसका विधायक दल संसद के आगामी मानसून सत्र के पहले दिन नई दिल्ली में प्रदर्शन करेगा। पार्टी जम्मू-कश्मीर को तत्काल राज्य का दर्जा और संवैधानिक गारंटी बहाल करने की मांग कर रही है।
उमर ने ‘आईएनडीआईए’ गठबंधन की बैठक में शामिल होकर अन्य राजनीतिक दलों को भी इस धरने में शामिल होने का न्योता दिया। यह मामला अगस्त 2019 में जम्मू-कश्मीर के पुनर्गठन से जुड़ा है, जब तत्कालीन राज्य को विभाजित कर जम्मू-कश्मीर और लद्दाख नाम से दो केंद्र शासित प्रदेश बनाए गए थे।
एनसी का दिल्ली में प्रदर्शन का ऐलान ऐसे समय हुआ है, जब पार्टी पर राज्य का दर्जा और विशेष दर्जा बहाल करने की मांग को लेकर दबाव बढ़ रहा है। यह कदम केंद्र द्वारा लद्दाख के समूहों के साथ बातचीत के बाद उठाया गया है, जो केंद्र शासित प्रदेश के लिए संवैधानिक सुरक्षा और राज्य का दर्जा मांग रहे हैं।





