बढ़ते पारे के साथ अगले कुछ हफ्ते सेहत के लिए बहुत चुनौतीपूर्ण हैं। गर्मी के चलते डिहाइड्रेशन, हीटस्ट्रोक जैसे मामले अस्पतालों में बढ़ने लगे हैं।
चढ़ते पारे के साथ देश के ज्यादातर मैदानी इलाकों में लू और प्रचंड गर्मी कहर बरपा रही है। मौसम विज्ञान विभाग की मानें तो अगले कुछ हफ्ते हीटस्ट्रोक जैसी समस्याओं को लेकर हर स्तर पर सतर्कता बढ़ाने की जरूरत है।
गर्मी के चलते खासकर बच्चों, बुजुर्गों, बाहर काम करने वालों और सेहत से जुड़ी किसी भी समस्या का सामना कर रहे लोगों को अधिक सजग होने की जरूरत है। इस समय लगातार गर्म वातावरण या धूप में रहने से डिहाइड्रेशन, हीट एग्जाशन और हीटस्ट्रोक जैसी समस्याएं हो सकती हैं।
बीते दिनों डीजीएचएस (स्वास्थ्य सेवा निदेशालय) द्वारा बाकायदा दिशा-निर्देश जारी कर लोगों को तेज धूप में, खासकर दोपहर के समय में सतर्कता बढ़ाने के लिए चेताया गया है। साथ ही गर्म मौसम में ढीले सूती कपड़े पहनने और इलेक्ट्रोलाइट्स युक्त द्रव लेने जैसे कुछ जरूरी सुझाव भी दिए गए हैं।
हीट एग्जाशन से बचने की जरूरत
गर्मी के चलते अगर थकान हो रही है, तो कुछ लोग इसे सामान्य मानकर टाल देते हैं, जबकि इस तरह की असहजता गर्मी के कारण शरीर के बिगड़े संतुलन के वजह से भी हो सकती है। इससे तापमान को नियंत्रित करने की शरीर की क्षमता प्रभावित हो जाती है, जिससे हार्ट, किडनी, ब्रेन जैसे अंगों पर दबाव बढ़ता है।
गर्मी के दुष्प्रभाव से बचने का आसान तरीका है- स्वयं के स्तर पर सतर्कता और लक्षणों को गंभीर होने से पहले रोकना। विश्व स्वास्थ्य संगठन की मानें तो हीटवेव के चलते चक्कर आने, सिरदर्द, मांसपेशियों में ऐंठन, कमजोरी, बेहोशी, जी मिचलाने और भ्रम होने जैसी समस्याएं हो सकती हैं। अगर शरीर गर्म मौसम के साथ तालमेल नहीं बिठा पाता है, तो मेडिकल इमरजेंसी की स्थिति उत्पन्न हो सकती है।
क्या करें इमरजेंसी होने पर?
- अगर गर्मी के चलते चक्कर आने या बेहोशी जैसी स्थिति उत्पन्न हो गई है तो प्रभावित व्यक्ति को जितना जल्दी हो सके, किसी ठंडे या छायादार स्थान पर ले जाना चाहिए।
- कसे हुए कपड़े ढीले कर देने चाहिए। गीले कपड़े लगाने, कोल्ड पैक इस्तेमाल करने या पंखा करने जैसे उपायों से शरीर को ठंडा करने का प्रयास करना चाहिए।
- अगर व्यक्ति की स्थिति में सुधार दिख रहा है तो इलेक्ट्रोलाइट्स या थोड़ा थोड़ा करके पानी देने का प्रयास करना चाहिए। ध्यान रखें, गर्मी में डिहाइड्रेशन को रोकना सबसे जरूरी है।
कब मिलें डाक्टर से?
- अगर बेहोशी, सीने में दर्द, सांस लेने में दिक्कत, बार-बार उल्टी या इलेक्ट्रोलाइट्स या पानी पीने में असहजता हो रही है, तो तुरंत डाक्टर से मिलना चाहिए।
- अगर यूरिन आना कम हो गया है या बहुत अधिक कमजोरी महसूस हो रही है या पर्याप्त मात्रा में पानी पीने के बावजूद भी स्थिति में सुधार नहीं हो रहा है, तो बिना देर किये डाक्टर से जांच करवानी चाहिए।
शरीर पर हीटवेव का प्रभाव
इंसान का शरीर बढ़े तापमान का सामना पसीने और रक्तसंचार से करता है। हालांकि, बहुत अधिक तापमान होने पर यह सिस्टम फेल होने लगता है, जिससे समस्या बढ़ सकती है। यहां तक कि अस्पताल में भर्ती कराने की नौबत आ सकती है। दरअसल, शरीर का तापमान कंट्रोल करने के प्रयास में हार्ट रेट बढ़ जाती है और शरीर में पानी की कमी को थामने के लिए अधिक पसीना आने लगता है। इससे डिहाइड्रेशन हो सकता है और ब्लडप्रेशर कम हो जाता है। इन समस्याओं के चलते हार्ट, किडनी जैसे अंगों पर दबाव बढ़ता है।
गर्मी से होने वाली समस्याएं
- हीट क्रैंप्स- पसीना आने के दौरान नमक और तरल पदार्थों की कमी होने से मांसपेशियों में हल्का दर्द या ऐंठन महसूस होती है। गर्म मौसम में व्यायाम या अन्य शारीरिक गतिविधि करने से यह समस्या बढ़ सकती है।
- हीट एग्जाशन- लंबे समय तक गर्मी या धूप में रहने के कारण शरीर में पानी की कमी हो जाती है, जिससे थकान या चक्कर आने जैसी समस्याएं हो सकती हैं।
गर्मी से समस्या होने के शुरुआती लक्षण
- तेजी से पसीना आना
- कमजोरी और थकान
- चक्कर आना या जी मिचलाना
- सिरदर्द और दिल धड़कन बढ़ जाना
- समय पर उपचार नहीं मिलने पर हीटस्ट्रोक की आशंका
मेडिकल इमरजेंसी है हीट स्ट्रोक
जब शरीर का तापमान खतरनाक ढंग से 40 डिग्री सेल्सियस ऊपर जाने लगता है और शरीर की कूलिंग सिस्टम फेल हो जाता है, तो उसे हीट स्ट्रोक माना जाता है।
इसके कुछ चेतावनी संकेत-
- गफलत या भटकाव
- अचेत हो जाना
- शरीर का तापमान अत्यधिक हो जाना
- गर्म, सूखी त्वचा या पसीना बंद हो जाना
- ऐसी दशा में तुरंत मेडिकल सहायता की जरूरत होती है।
डिहाइड्रेशन को समझें चेतावनी
- मुंह सूखना और थकान होना
- यूरिन कम हो जाना
- ब्लडप्रेशर कम हो जाना
- गंभीर स्थिति में किडनी की समस्या होना
हीटवेव में इन बातों का रखें ध्यान
- बीमार को लेकर सावधानी- हीटवेव के चलते हार्ट, डायबिटीज, अस्थमा और किडनी जैसी बीमारियां गंभीर हो सकती हैं, इससे शरीर पर दबाव बढ़ सकता है।
- नींद में व्यवधान- रात के समय में तापमान सामान्य से अधिक होने के चलते नींद चक्र प्रभावित होता है, जिससे दिन के समय में थकान, चिड़चिड़ापन और एकाग्रता में कमी जैसी समस्याएं हो सकती हैं।
- मानसिक सेहत पर प्रभाव- गर्मी के चलते तनाव, एंग्जाइटी और बाहर निकलते समय और लोगों से मिलते जुलते समय असहजता महसूस होती है।
- संक्रमण की आशंका- गर्मी और आद्रता के चलते बैक्टीरिया पनपने की आशंका बढ़ जाती है, जिससे संक्रमण को लेकर सतर्क होने की जरूरत होती है।
खानपान को लेकर इन दिनों बरतें विशेष सतर्कता
“इस समय अत्यधिक गर्मी है, इसलिए हमें सीधे धूप और लू से बचना है। अगर बाहर निकल रहे हैं तो सिर को ढंकें और साथ में पानी की बोतल जरूर रखें। एसी से तुरंत गर्मी में या धूप से सीधे एसी में जाने से बचें। शरीर को तापमान के साथ थोड़ा तालमेल बिठाने का मौका दें। गर्मी से बचाव के लिए ओआरएस को हमेशा अपने साथ रखना चाहिए। इस समय पुदीना, मौसमी फलों, सब्जियों का सेवन लाभकारी है। पुदीन हरा जैसी औषधियां काफी उपयोगी हैं। एक गिलास पानी में कुछ बूंदें डालकर इसका प्रयोग करें। खानपान में थोड़ी सतर्कता रखें। कुछ भी खा लेने से बचना होगा। ध्यान रखें कि आपका भोजन सुपाच्य और सीमित मात्रा में हो। गरिष्ठ भोजन से बिल्कुल बचना है, क्योंकि ग्रीष्म ऋतु में हमारी पाचन शक्ति कमजोर हो जाती है। हमेशा ताजा भोजन करें, बासी भोजन मुसीबतें बढ़ा सकता है। अरहर या मूंग की दाल को गाढ़ा करने के बजाय उसे पतला रखें। तरबूज, खरबूज, खीरा, ककड़ी, हरी सब्जियों का प्रयोग लाभप्रद है। ध्यान रखें रोटी पतली और चावल अच्छी तरह से पका होना चाहिए। इस समय कच्चे आम का पना, जलजीरा, नींबू पानी का प्रयोग काफी लाभदायक है। फ्रिज का बहुत ठंडा पानी पीने के बजाय घड़े का पानी पीने का प्रयास करना चाहिए। गर्मी से आने के बाद फ्रिज का बहुत ठंडा पानी नुकसानदेह हो सकता है।
-डॉ. प्रदीप कुमार प्रजापति, निदेशक, अखिल भारतीय आयुर्वेद संस्थान, नई दिल्ली
इन्हें रखना होगा विशेष ध्यान
- बाहर काम करने वाले- कंस्ट्रक्शन, सामान डिलीवरी, खेती करने वाले या जो लोग लगातार धूप में रहते हैं, उन्हें अपेक्षाकृत अधिक जोखिम रहता है।
- गर्भवती महिलाएं- गर्भकाल के दौरान मेटाबोलिक दबाव अधिक रहता है, जिससे डिहाइड्रेशन या हीट स्ट्रेस चिंताजनक स्थिति उत्पन्न कर सकता है।
- नवजात और छोटे बच्चे- बच्चों के हाइड्रेशन को लेकर इन विशेष रूप से सतर्कता बरतने की जरूरत होती है, क्योंकि उनकी शरीर तेजी से गर्म हो जाती है।
- क्रोनिक सेहत समस्या वाले- जिन लोगों को पहले से सेहत से जुड़ी कोई समस्या है, उन्हें तीव्र गर्मी के प्रभाव में आने से बचना चाहिए।
- बुजुर्ग- उम्र बढ़ने के साथ तापमान के साथ तालमेल बिठाने की शरीर की क्षमता कम होने लगती है, ऐसे में बुजुर्गों को गर्मी में विशेष सावधानी बरतनी चाहिए।
हीटवेव में सुरक्षित रहने के उपाय
- जितना संभव हो तेज गर्मी या धूप में बाहर निकलने से बचें। अगर बार-बार प्यास या थकान लग रही है, तो थोड़ी थोड़ी देर में पानी पीते रहें।
- गर्मी से बचने के लिए छांव और ठंडे स्थान पर जाएं, ताकि शरीर का तापमान कम हो सके। अगर हीटस्ट्रोक के लक्षण महसूस होते हैं तो दूसरों की मदद लें।
- इस समय पंखे के प्रयोग को लेकर सतर्क रहना होगा, क्योंकि अत्यधिक तापमान में पंखा शरीर के पसीने को सुखा देता है, इससे अधिक गर्मी महसूस होती है।
- अगर कमरे का तापमान 40 डिग्री सेल्सियस से अधिक है तो केवल पंखे का प्रयोग नुकसान देह हो सकता है।
- हाइड्रेट रहना इस समय सबसे अनिवार्य है। इलेक्ट्रोलाइट्स युक्त तरल लेते रहें।
तेज गर्मी से हो सकता है हीटस्ट्रोक, बचें धूप में निकलने से
“अत्यधिक तापमान और आद्रता के चलते इन दिनों हीट एग्जाशन होने की आशंका रहती है। दरअसल, अत्यधिक पसीना निकलने से थकान महसूस होती है, जिससे चक्कर आने, भ्रमित होने जैसी समस्याएं भी हो सकती हैं। पानी की कमी से शरीर डिहाइड्रेटेड हो जाता है। ऐसे में जरूरी है कि दोपहर 11 बजे से चार बजे तक धूप में निकलने से बचें। गर्म मौसम में खुले में काम करना बहुत जोखिम भरा हो सकता है। इससे हीट स्ट्रोक हो सकता है, जोकि एक तरह से मेडिकल इमरजेंसी है। इसमें शरीर के तापमान अचानक 104 से अधिक हो जाता है। इससे बेहोशी की नौबत आ सकती है। ऐसी दशा में पसीना आना बंद हो जाता है और त्वचा का रुखापन बढ़ जाता है। पसीना बाहरी तापमान के साथ शरीर का तालमेल बनाकर रखता है। हीटस्ट्रोक प्रभावित व्यक्ति को तुरंत ठंडे स्थान पर लेकर साइड करके लिटा देना चाहिए। इससे उल्टी होने पर रेस्पिरेटरी सिस्टम में समस्या नहीं आती है। इसके बाद पानी और पंखे की व्यवस्था करनी चाहिए, ताकि शरीर का तापमान कम हो सके। ऐसे व्यक्ति को मुंह से पानी पिलाने से बचना चाहिए, क्योंकि बेहोश व्यक्ति को मुंह में पानी डालने से वह फेफड़े में जा सकता है। उसके पूरे शरीर पर पानी डालना चाहिए।
-डॉ. योगेश पोरवाल, प्रोफेसर, इंटरनल मेडिसिन, सफदरजंग अस्पताल, नई दिल्ली
डिहाइड्रेशन से करें बचाव
हर किसी को आधे-एक घंटे में पानी पीते रहना चाहिए। इससे डिहाइड्रेशन नहीं होगा। पानी की कमी से पसीना और यूरिन कम हो जाता है। इससे किडनी पर असर पड़ता है। ध्यान रखें कि गर्मी में खुले में व्यायाम बिल्कुल भी न करें। हल्के-फुल्के व्यायाम एसी युक्त या ठंडे स्थान पर ही करें। गर्मी में सिंथेटिक कपड़े के बजाय हल्के, सफेद और सूती कपड़े पहनें। बाहर निकलते समय गमछे का प्रयोग जरूरी है।
अगर धूप में जाने की जरूरत पड़ जाती है, तो थोड़ी देर में ठंडी जगह पर चले जाना चाहिए। बच्चों और बुजुर्गों को लेकर विशेष सावधानी जरूरी है। बाहर निकल रहे हैं तो खूब पानी पीते रहें। जब तापमान 40 डिग्री से ऊपर जा रहा है तो अतिरिक्त सतर्कता बढ़ानी जरूरी है। गर्मी के चलते घमोरिया, चकत्ते पड़ने, मांसपेशियों में ऐंठन जैसी समस्याएं हो सकती है। ऐसे में जरूरी है कि गर्मी से बचाव करें, धूप में जाने से बचें और खूब पानी पिएं।





