किसानों और ड्रोन दीदियों को दिया गया प्रशिक्षण
वाराणसी। काशी हिन्दू विश्वविद्यालय के कृषि विज्ञान संस्थान एवं क्रॉपलाइफ़ इंडिया के संयुक्त तत्वावधान में शुक्रवार को ड्रोन आधारित आधुनिक कृषि तकनीक एवं सुरक्षित फसल सुरक्षा उत्पादों के उपयोग पर एक दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। कृषि विज्ञान संस्थान स्थित शताब्दी कृषि प्रेक्षागृह में आयोजित इस कार्यशाला में लगभग 400 प्रगतिशील किसान, स्वयं सहायता समूहों की ड्रोन दीदियां, कृषि वैज्ञानिक, कृषि अधिकारी एवं विद्यार्थी शामिल हुए।
कार्यक्रम का शुभारंभ भारत रत्न महामना मदन मोहन मालवीय की प्रतिमा पर माल्यार्पण, दीप प्रज्ज्वलन और कुलगीत के साथ हुआ। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि विश्वविद्यालय के कुलपति अजीत कुमार चतुर्वेदी रहे, जबकि विशिष्ट अतिथि के रूप में उत्तर प्रदेश कृषि अनुसंधान परिषद के महानिदेशक डॉ. संजय सिंह उपस्थित रहे। कार्यक्रम की अध्यक्षता कृषि विज्ञान संस्थान के निदेशक प्रो. यू.पी. सिंह ने की।
अपने संबोधन में कुलपति प्रो. अजीत कुमार चतुर्वेदी ने कहा कि आधुनिक कृषि को तकनीक आधारित, सुरक्षित और टिकाऊ बनाना समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि ड्रोन तकनीक कृषि क्षेत्र में क्रांतिकारी बदलाव ला सकती है। इससे खेतों में सटीक छिड़काव, समय की बचत, लागत में कमी और किसानों को कीटनाशकों के दुष्प्रभाव से सुरक्षा सुनिश्चित की जा सकती है। उन्होंने विश्वविद्यालयों को केवल शिक्षा का केंद्र न मानते हुए ग्रामीण परिवर्तन और तकनीकी नवाचार का माध्यम बताया।
विशिष्ट अतिथि डॉ. संजय सिंह ने कहा कि कृषि क्षेत्र में ड्रोन तकनीक का बढ़ता उपयोग किसानों के लिए नई संभावनाएं पैदा कर रहा है। उन्होंने कृषि विभाग, विश्वविद्यालयों और उद्योग जगत के बीच समन्वय को आवश्यक बताते हुए कहा कि इस प्रकार की कार्यशालाएं ग्रामीण युवाओं और किसानों को आधुनिक तकनीकों से जोड़ने में अहम भूमिका निभाती हैं।
कृषि विज्ञान संस्थान के निदेशक प्रो. यू.पी. सिंह ने कहा कि ड्रोन आधारित प्रिसिजन फार्मिंग भविष्य की कृषि व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा बनने जा रही है। उन्होंने वैज्ञानिकों और उद्योग जगत से ड्रोन के माध्यम से खरपतवारनाशी के प्रभावी उपयोग पर शोध को आगे बढ़ाने का आह्वान किया।
कार्यक्रम के दौरान ड्रोन दीदियों द्वारा ड्रोन संचालन और पीपीई किट के साथ लाइव फील्ड डेमोंस्ट्रेशन भी प्रस्तुत किया गया, जिसे प्रतिभागियों ने काफी उत्साह के साथ देखा। कार्यशाला में सुरक्षित कृषि रसायन प्रबंधन, प्राथमिक उपचार, लेबल रीडिंग और फसल सुरक्षा उत्पादों के वैज्ञानिक उपयोग पर विशेषज्ञ व्याख्यान भी आयोजित किए गए। अंत में प्रतिभागियों और ड्रोन दीदियों को प्रमाण पत्र वितरित किए गए।





