उत्तर प्रदेश सरकार ने लखनऊ में अपनी पहली अत्याधुनिक यूनानी दवा निर्माण प्रयोगशाला स्थापित की है। यह लैब मरीजों को शुद्ध, प्रभावी और सस्ती यूनानी दवाएं उपलब्ध कराएगी, जिससे पारंपरिक चिकित्सा को बढ़ावा मिलेगा।
लखनऊ। उत्तर प्रदेश सरकार ने पारंपरिक चिकित्सा को प्रोत्साहन देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम आगे बढ़ाया है। लखनऊ में प्रदेश की पहली अत्याधुनिक यूनानी दवा निर्माण प्रयोगशाला स्थापित की गई है।
इसमें जल्द ही दवाओं का उत्पादन शुरू हो जाएगा। इससे मरीजों को शुद्ध, प्रभावी और सस्ती यूनानी दवाएं उपलब्ध हो सकेंगी। वर्तमान में यूनानी दवाएं काफी महंगी हैं।
यूनानी चिकित्सा प्रणाली विश्व की प्राचीनतम चिकित्सा पद्धतियों में से एक है। यह जड़ी-बूटियों, खनिजों और प्राकृतिक तत्वों के सामंजस्य पूर्ण मिश्रण पर आधारित है। इस चिकित्सा पद्धति की दवाएं मधुमेह, पाचन संबंधी विकार, त्वचा रोग, श्वास संबंधी समस्याओं के इलाज तथा रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में प्रभावी मानी जाती हैं।
लखनऊ स्थित इस अत्याधुनिक प्रयोगशाला में नवीनतम मशीनरी, संवेदनशील गुणवत्ता नियंत्रण व्यवस्था और आयुष मंत्रालय के कड़े मानकों के अनुरूप दवाओं का उत्पादन किया जाएगा। पहले चरण में 50 से अधिक सामान्य एवं आवश्यक यूनानी दवाओं का निर्माण शुरू होगा।
उत्तर प्रदेश जड़ी-बूटियों का प्राकृतिक भंडार है, जिनका उपयोग इस प्रयोगशाला में दवा निर्माण के लिए किया जाएगा। आयुष विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों के अनुसार, इस प्रयोगशाला के माध्यम से विशेषकर ग्रामीण और दूरदराज के क्षेत्रों में सुलभ, सुरक्षित एवं प्रभावी स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाना आसान हो जाएगा।
इससे यूनानी चिकित्सा को पुनर्जीवित एवं सशक्त किया जा सकेगा। भविष्य में पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (पीपीपी) मॉडल के तहत उत्पादन क्षमता का विस्तार किया जाएगा, जिससे रोजगार सृजन के साथ-साथ यूनानी दवाओं का निर्यात भी संभव हो सकेगा।
यूनानी चिकित्सा सुविधाओं की स्थिति
- उत्तर प्रदेश में वर्तमान में 245 यूनानी औषधालय संचालित हैं।
- दो यूनानी मेडिकल कॉलेज हैं, जहां प्रतिदिन औसतन 50 मरीज भर्ती होते हैं।
- अप्रैल 2026 में यूपी में 2,02,695 मरीजों का यूनानी चिकित्सा से इलाज किया गया।





