सच्ची सेवा दिखावे से परे प्रेम और विनम्रता का मार्ग है: सतगुरु माता सुदीक्षा जी
महोबा। हृदय सम्राट बाबा हरदेव सिंह की पावन स्मृति पर शहर के निरंकारी सत्संग भवन में एक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में शहर के अलावा ग्रामीण क्षेत्रों के सैकड़ों की संख्या में श्रद्धालु पहुंचे और सत्संग में आत्मशांति का आनंद लिया साथ ही संत निरंकारी आध्यात्मिक स्थल समालखा में परम् श्रद्धेय सतगुरु माता सुदीक्षा महाराज और निरंकारी राजपिता रमित के सान्निध्य में भावपूर्ण संत समागम का आयोजन किया गया।
सतगुरु में माता सुदीक्षा ने अपने आशीर्वचनों के माध्यम से कहा कि बाबाजी का सम्पूर्ण जीवन मानवता, सेवा और प्रेमा भक्ति का दिव्य उदाहरण रहा। उन्होंने प्रेरित किया कि मानव जीवन का प्रत्येक क्षण सार्थक बने और हर पल इंसानियत, करुणा एवं मानवीय मूल्यों का प्रमाण प्रस्तुत करे। बाबाजी ने सदैव यही शिक्षा दी कि प्रत्येक व्यक्ति अपने भीतर मानवीय गुण विकसित कर निराकार का आसरा लेते हुए सार्थक एवं उद्देश्यपूर्ण जीवन जीयें। कहा कि यदि किसी के जीवन में दुख, पीड़ा या संघर्ष है, तो हमारा कर्तव्य उसे बढ़ाना नहीं, बल्कि प्रेम, संवेदनशीलता और सहयोग से उसे शांत करना है।
उन्होंने कहा कि जीवन ऐसा हो जो रिश्तों में प्रेम एवं समर्पण की भावना को सुदृढ़ करे और यही बाबाजी की शिक्षाओं का सार व सच्ची मानवता का स्वरूप है। सतगुरु माता ने समझाया कि ब्रह्मज्ञान प्राप्त होने के पश्चात जीवन केवल व्यक्तिगत सीमाओं तक नहीं रहता, बल्कि समस्त मानवता की सेवा, कल्याण और उत्थान का माध्यम बन जाता है। सच्ची सेवा दिखावे से परे प्रेम, विनम्रता और निस्वार्थता से परिपूर्ण होती है, जबकि वास्तविक भक्ति शब्दों से आगे बढ़कर व्यवहार, विचार और कर्मों में झलकती है। सत्संग के अंत में प्रसाद वितरण किया गया।





