Saturday, May 16, 2026
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दिल्ली के मैक्स सुपर हास्पिटल पर लगाया 5 लाख का जुर्माना

ग्राम नगला खोकर पोस्ट असमोली निवासी नेमपाल सिंह ने अपनी पत्नी श्रीमती भाग्यवती के हृदय रोग के लिए देवकी देवी फाउंडेशन द्वारा चलाये जा रहे मैक्स सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल साकेत में इलाज के लिए ले जाया गया जहां उनके हृदय के राइट एंट्रीयम में स्थित मांस को सर्जरी द्वारा दिनांक 31/8/2021 को निकालने के पश्चात उसके राइट वेनिट्रिकिल को अक्रियशील हो जाने के कारण मरीज की रिकवरी दी मी हो गई। उक्त इलाज करने के लिए अस्पताल ने ₹300000 का पैकेज बताया परंतु धीरे-धीरे करके उनसे 11 लाख 80 हजार 795 ले लिए तथा 14 15 दिन रखने के बाद भी जब कोई सुधार नहीं हुआ तो घर ले जाने के लिए कहा जहां अगले दिन दिनांक 21 /9 /2021 को अस्पताल से छुट्टी होने के उपरांत उनकी मृत्यु हो गई।

तथा बिना इलाज के कागज दिए उनको हॉस्पिटल से छुट्टी दी गई जिसके लिए नेमपाल सिंह ने अस्पताल द्वारा तैयार धनराशि से अधिक धनराशि वसूली तथा इलाज के पर्चे न देने के संबंध में एवं इलाज में भर्ती के लापरवाही के लिए जिला उपभोक्ता आयोग सम्भल में उपभोक्ता मामलों के विशेषज्ञ अधिवक्ता लवमोहन वार्ष्णेय द्वारा एक वाद प्रस्तुत किया गया आयोग ने दोनों पक्षों को तलब किया तो उन्होंने आयोग को बताया कि उनके द्वारा आपरेशन पूर्ण रूप से सही किया गया है तो आयोग ने ऑपरेशन से संबंधित पूर्व तथा बाघ की रिपोर्ट को प्रस्तुत करने के लिए कहा गया जिस पर पहले तो अस्पताल द्वारा कोई भी प्रपत्र अथवा रिपोर्ट होने से मना किया गया वादी के अधिवक्ता लवमोहन वार्ष्णेय द्वारा आयोग से अनुरोध किया गया कि परिवादी की पत्नी को डिस्चार्ज करने पर कोई भी इलाज के पेपर उपलब्ध नहीं कराए गए।

जिस पर आयोग के आदेश देने पर अस्पताल की ओर से ऑपरेशन से पूर्व की गई जांच रिपोर्ट आयोग में दाखिल की तथा बार-बार आदेश दिए जाने के बावजूद भी विपक्षी द्वारा ऑपरेशन के बाद की रिपोर्ट दाखिल नहीं की गई जिस पर आयोग ने दोनों पक्षों की बहस सुनी और अपना आदेश विपक्षीगण देवकी देवी फाउंडेशन व मैक्स सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल के प्रबंधक निदेशक / अध्यक्ष को आदेशित किया जाता है कि वह परिवादी नेमपाल सिंह को उसकी पत्नी की सर्जरी व इलाज में बरती गई चिकित्सकीय उपेक्षा को क्षतिपूर्ति के रूप में 5 लाख रुपए उस पर परिवाद संस्थान की तिथि से 7% वार्षिक ब्याज सहित अंदर दो माह अदा करें। इसके अलावा विपक्षीगण परिवादी को मुबलिग ₹50000 मानसिक कष्ट व आर्थिक हानि की मद में तथा ₹5000 बाद व्यय के मद में भी अदा करेंगे। नियत अवधि में धनराशि अदा न किए जाने की दशा में ब्याज 9% वार्षिक देय होगा।

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