महबूबा मुफ्ती ने आरएसएस महासचिव दत्तात्रेय होसबाले के पाकिस्तान से संवाद के बयान का समर्थन किया है। उन्होंने जम्मू-कश्मीर में स्थायी शांति के लिए पाकिस्तान से बातचीत जारी रखने पर जोर दिया।
आरएसएस महासचिव दत्तात्रेय होसबाले के हालिया बयान को पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (PDP) की प्रमुख महबूबा मुफ्ती ने ‘स्वागत योग्य’ बताया है। महबूबा ने कहा कि जम्मू-कश्मीर में हालात सुधारने और क्षेत्र में स्थायी शांति स्थापित करने के लिए पाकिस्तान के साथ संवाद की खिड़की हमेशा खुली रखनी चाहिए।
महबूबा मुफ्ती ने पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के बयान का हवाला देते हुए कहा, “सिर्फ मुफ्ती ही नहीं, वाजपेयी जी ने भी कहा था कि आप अपने दोस्त बदल सकते हैं, लेकिन पड़ोसी नहीं बदल सकते।” उन्होंने जोर दिया कि भारत और पाकिस्तान के बीच बातचीत बंद करना किसी समस्या का हल नहीं है।
होसबाले के बयान पर सियासी प्रतिक्रिया तेज
RSS महासचिव दत्तात्रेय होसबाले के बयान के बाद जम्मू-कश्मीर की राजनीति में संवाद और शांति प्रक्रिया को लेकर बहस फिर शुरू हो गई है। महबूबा मुफ्ती ने इसे सकारात्मक कदम बताते हुए केंद्र सरकार से भी इस दिशा में पहल करने की अपील की।
डायलॉग की खिड़की हमेशा खुली रखनी चाहिए
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले ने आज यह बयान दिया कि पाकिस्तान की ओर से सीमा पार आतंकी हमलों को बढ़ावा देने की हरकतों पर भारत को सख्त जवाब देना चाहिए, लेकिन साथ ही बातचीत के रास्ते भी खुले रखने चाहिए। होसबाले ने पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के समय को याद करते हुए कहा कि वाजपेयी जी ने संवाद का रास्ता खुला रखा था और वे खुद बस से लाहौर तक गए थे।
RSS के सरकार्यवाह ने कहा, “सब कुछ आजमाया जा चुका है और ऐसी और कोशिशें जारी रहनी चाहिए। अटल जी ने उनसे संवाद करने की कोशिश की थी। वे बस से लाहौर गए थे और कई चीजें हुईं। हमारे मौजूदा प्रधानमंत्री ने भी शपथ लेते समय पाकिस्तान को न्योता दिया था। फिर वे एक पाकिस्तानी नेता की शादी में भी शामिल हुए। तो ये सारी चीजें हमने आजमाई हैं।”
पुलवामा जैसी घटनाओं का माकूल जवाब जरूरी
पाकिस्तान पर निशाना साधते हुए होसबाले ने कहा, “अगर पाकिस्तान कांटे की तरह चुभकर पुलवामा जैसी घटनाएं कराता है, तो हमें हालात के हिसाब से उचित जवाब देना होगा क्योंकि देश की सुरक्षा और स्वाभिमान की रक्षा करनी है, और मौजूदा सरकार को इसका ध्यान रखना चाहिए।” हालांकि, उन्होंने साथ ही कहा, “लेकिन हमें दरवाजे बंद नहीं करने चाहिए। हमें हमेशा बातचीत के लिए तैयार रहना चाहिए। इसीलिए राजनयिक संबंध बने हुए हैं, व्यापार चल रहा है और वीजा दिए जा रहे हैं। हमें ये सब बंद नहीं करने चाहिए, क्योंकि बातचीत के लिए एक खिड़की हमेशा खुली रहनी चाहिए।”





