ट्रंप प्रशासन स्टील और एल्युमीनियम से बने उत्पादों पर 25% नया टैरिफ (Trump Tariff) लगाने की तैयारी में है। यह कदम आयात नियमों को सरल बनाने और पिछले 50% टैरिफ को डेरिवेटिव उत्पादों पर लागू करने के लिए है।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ईरान युद्ध के बीच एक बार फिर से टैरिफ (Trump New Tariff Plan) का खेल शुरू कर सकते हैं। ट्रंप प्रशासन ने इसकी पूरी तैयारी भी कर ली है। अमेरिका इंपोर्ट पर एक नया नियम लाने की तैयारी कर रहा है, और इस बार उसका फोकस स्टील और एल्युमीनियम से बने प्रोडक्ट्स पर है।
द वॉल स्ट्रीट जर्नल की एक रिपोर्ट के अनुसार, ट्रंप प्रशासन आयातित स्टील और एल्युमीनियम से बने तैयार उत्पादों पर 25% की टैरिफ (Tariff on steel and Aluminium) दर तय करने की तैयारी कर रहा है। इस योजना से जुड़े लोगों ने बताया कि इस कदम की घोषणा इसी हफ्ते की जा सकती है।
50 की जगह 25% टैरिफ
रिपोर्ट के अनुसार, 25% टैरिफ डेरिवेटिव उत्पादों पर लागू होगी। यानी उन उत्पादों पर जिनमें स्टील और एल्युमीनियम शामिल हैं।
WSJ के अनुसार, एक नई योजना का मकसद चीजों को आसान बनाना है। हर चीज में कितनी धातु इस्तेमाल हुई है, इसकी गिनती करने के बजाय, स्टील और एल्युमीनियम से बनी तैयार चीजों पर एक तय 25% टैरिफ लगेगा। हालांकि, जो चीजें लगभग पूरी तरह से स्टील और एल्युमीनियम से बनी हैं, उन पर अभी भी ज्यादा , यानी 50% टैरिफ (Trump Tariff) लगेगा।
पिछले साल, ट्रंप ने विदेशी स्टील और एल्युमीनियम पर 50% का टैरिफ लगाया था। उन्होंने यह कदम चीन की अतिरिक्त उत्पादन क्षमता को नियंत्रित करने के उद्देश्य से उठाया गया था।
किन देशों पर पड़ेगा ट्रंप के नए टैरिफ का असर
इस कदम का असर कनाडा, यूरोपीय संघ, मेक्सिको और दक्षिण कोरिया जैसे अन्य प्रमुख व्यापारिक साझेदारों पर भी बहुत बुरा पड़ा। बाद में इस सूची में उन तथाकथित ‘डेरिवेटिव उत्पादों’ को भी शामिल कर लिया गया जिनमें ये धातुएं मौजूद थीं। इससे कंपनियों के लिए विदेशों से मंगाए गए सामान में इन धातुओं की मात्रा (प्रतिशत) का पता लगाना एक बेहद मुश्किल काम बन गया।
वहीं, अगर बात करें एशिया की तो इन देशों में चीन दक्षिण कोरिया, जापान, वियतनाम और भारत जैसे देश शामिल हैं। चीन भले ही सीधे तौर पर ज्यादा स्टील नहीं भेजता फिर भी परोक्ष रूप से प्रभावित होगा। वहीं, भारत समेत दक्षिण कोरिया, जापान, वियतनाम अमेरिका को बड़ी मात्रा में धातु और तैयार माल निर्यात करते हैं। हालांकि, इसका असर ज्यादा गहरा नहीं होगा।





