Wednesday, March 25, 2026
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विषमता को पूरी दुनिया की बुराई मानते थे डॉ. लोहिया: राजनाथ शर्मा

गांधी भवन में याद किए गए डॉ लोहिया, भगत सिंह, सुखदेव और राजगरू

बाराबंकी। समता ट्रस्ट द्वारा आयोजित भारत के महान स्वतंत्रता संग्राम सेनानी एवं समाजवादी नेता डॉक्टर राममनोहर लोहिया की 116वीं जयन्ती और अमर शहीद भगत सिंह, सुखदेव राजगरू के शहीदी दिवस पर, प्रसिद्ध समाजवादी चिंतक एवं विचारक राजनाथ शर्मा के नेतृत्व में देवा रोड स्थित गांधी भवन में उनके चित्रों पर माल्यार्पण कर नमन किया गया। समाजवादी चिन्तक राजनाथ शर्मा ने कार्यक्रम के दौरान आयोजित सभा को संबोधित किया, अपने संबोधन में शर्मा ने डॉ. लोहिया के जीवन और दर्शन पर अपने विचार रखे। उन्होंने कहा आज हिन्दुस्तान सहित समूची दुनिया में सबसे बड़ी चिंता विषमता है।

डॉ. लोहिया समाज में व्याप्त सभी प्रकार की विषमताओं को मिटाने के प्रबल पक्षधर थे। उन्होंने यह भी बताया कि लोहिया की कथनी और करनी में कोई अंतर नहीं था। उन्होंने अपना पूरा जीवन समाज के दबे-कुचले और पिछड़े वर्गों के कल्याण हेतु समर्पित कर दिया था। जहां एक तरफ आज दुनिया में असमानता की खाई गहरी होती जा रही है, ऐसे दौर में लोहिया के विचारों की प्रासंगिकता और अधिक बढ़ जाती है। उ.प्र. कोआपरेटिव बैंक के पूर्व चेयरमैन एवं वरिष्ठ समाजवादी नेता धीरेन्द्र कुमार वर्मा ने कहा भारतीय परंपरा और मूल्यों में गहरी आस्था रखनेवाले डॉ लोहिया ने समाजवाद को भारतीय मिट्टी से जोड़ा।

उन्होंने कहा, निर्भय होने और साधारण-जन की पीड़ा को समझने का जो मंत्र देश को महात्मा गांधी ने दिया था, उसी को डॉ. राममनोहर लोहिया ने आगे बढ़ाया। शिक्षाविद् अशोक शुक्ला ने कहा, समाजवादी चरित्र क्या होता है। यह राजनाथ शर्मा को देखकर कोई जान सकता है। उन्होंने लोहिया जी के साथ काम किया और शोषण के खिलाफ लड़े। गरीब-मजलूम की आवाज बने। कथनी-करनी में एका की बात की. लोहिया जी का जीवन संघर्षशील और विद्रोही व्यक्तित्व का अनूठा संगम है। उ.प्र्र. कांग्रेस के पूर्व संगठन मंत्री शिवशंकर शुक्ल ने कहा कि लोकतंत्र का असली चेहरा केवल संसद भवन की चारदीवारी में नहीं, बल्कि उन सड़कों पर दिखता है, जहाँ जनता अपनी मांगें, असहमति और उम्मीदें लेकर उतरती है।

डॉ लोहिया कहा करते थे, जब जनता की आवाज़ सड़कों पर गूंजती है, तो संसद भी सजग और जवाबदेह बनी रहती है। लेकिन अगर सड़कें सूनी हो जाएँ, विरोध की आवाज़ें दब जाएँ, तो संसद का चरित्र भी भटक सकता है। लोकतंत्र सेनानी एवं जनकवि धीरेंद्र नाथ श्रीवास्तव ने कहा, सामाजिक परिवर्तन और समृद्ध सशक्त लोकतांत्रिक भारत के सपने कारे मूर्ति रूप् देना ही अब जीवन के शेष क्षणों का मिशन है। यही आज मेरी ओर से अमर शहीद भगत सिंह, राजगूरू और सुखदेव के साथ समाजवादी योद्ध डॉ लोहिया को श्रद्धांजलि है।

इस अवसर पर वरिष्ठ समाजवादी नेता ज्ञान सिंह यादव, वरिष्ठ पत्रकार मो उमैर, गांधी स्पोर्ट्स क्लब के अध्यक्ष सलाउद्दीन किदवई, विनय कुमार सिंह, सभासद अश्वनी शर्मा सहित अन्य वक्ताओं ने भी अपने विचार रखे। सभा का संचालन पाटेश्वरी पस्राद ने किया। इस मौके पर प्रमुख रूप से समाजवादी नेता मृत्युंजय शर्मा, लोकतंत्र सेनानी सुखदेव मौर्य, राम आसरे यादव, गांधीवादी वीरेन्द्र सिंह, हरिनंदन सिंह गौतम एडवोकेट, सियाराम वर्मा, अशोक जायसवाल, वासुदेव शर्मा, सत्यवान वर्मा, राजेश यादव, भागीरथ गौतम, जलाल नईम खान, संतोष शुक्ला सहित कई लोग मौजूद मौजूद रहे।

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