UP Backward Classes Commission: उत्तर प्रदेश सरकार ने पंचायत चुनावों में अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) आरक्षण के निर्धारण के लिए ‘समर्पित पिछड़ा वर्ग आयोग’ का गठन कर दिया है।
लखनऊ। योगी आदित्यनाथ कैबिनेट से त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव में ओबीसी आरक्षण के लिए समर्पित पिछड़ा वर्ग आयोग के गठन को स्वीकृति के बाद बुधवार को इसका गठन कर दिया गया है। अध्यक्ष के साथ ही चार सदस्यों की नियुक्ति की गई है।
प्रमुख सचिव पंचायती राज अनिल कुमार ने समर्पित पिछड़ा वर्ग आयोग के गठन का आदेश जारी किया। आयोग का अध्यक्ष इलाहाबाद हाई कोर्ट के रिटायर जज राम औतार सिंह को बनाया गया है। अध्यक्ष के अलावा आयोग में चार सदस्यों की भी नियुक्ति की गई है। इसमें दो रिटायर्ड अपर जिला जज और दो रिटायर्ड आईएएस अफसर सदस्य बनाये गए हैं। रिटायर्ड अपर जिला जज बृजेश कुमार व संतोश कुमार विश्वकर्मा और रिटायर्ड आईएएस अफसर डा अरविंद कुमार चौरसिया व एसपी सिंह इस आयोग के सदस्य हैं।
पंचायत चुनाव के लिए आयोग तीन माह में सरकार को रिपोर्ट देगा। सरकार इसका समय भी बढ़ा सकेगी। यह आयोग पंचायतों में अन्य पिछड़ा वर्ग के पिछड़ेपन की प्रकृति और प्रभावों का अध्ययन कर इस बाबत सरकार से सिफारिशें करेगा। प्रदेश में नगरीय निकाय चुनाव के लिए 28 दिसंबर 2022 को पहली बार समर्पित पिछड़ा वर्ग आयोग का गठन किया गया था। इसे भी छह माह के लिए गठित किया गया था, लेकिन आयोग ने महज 72 दिन में अपना काम पूरा करते हुए सिफारिशें 10 मार्च 2023 को सरकार को सौंप दी थी। अब पहली बार ग्रामीण स्थानीय निकायों के चुनाव के लिए समर्पित पिछड़ा वर्ग आयोग के गठन की अधिसूचना जारी की गई है। इसके पास नगरीय निकायों के मुकाबले बहुत बड़ा कार्यक्षेत्र है, जिसे देखते हुए माना जा रहा है कि आयोग को काम पूरा करने में अधिक समय लग सकता है।
पंचायती राज विभाग की जारी अधिसूचना के मुताबिक यह आयोग ग्रामीण स्थानीय निकायों के आगामी चुनाव से पूर्व सभी ग्रामीण निकायों में पिछड़े वर्गों के प्रतिनिधित्व के बारे में आंकड़ों और तथ्यों के आधार पर अध्ययन और जांच करेगा। अध्ययन के क्रम में केंद्रीय व राज्य सरकार के कार्यालयों, विभिन्न संगठनों, संस्थाओं, व्यक्तियों, विशेषज्ञों, शोधकर्ताओं के साथ ही मान्यताप्राप्त शोध संस्थानों की सहायता ले सकता है। राज्य के अंदर और अन्य राज्यों में अध्ययन यात्रा भी कर सकेगा। सरकार लोकहित में अध्यक्ष या किसी सदस्य को पद से हटा सकती है। आयोग अपनी रिपोर्ट तीन माह के अंदर या राज्य सरकार द्वारा निर्धारित अवधि में देगा। राज्य सरकार रिपोर्ट देने की अवधि बढ़ा भी सकती है।





