शहर में अमृतमयी श्रीराम कथा महोत्सव के तीसरे दिन उमड़ी आस्था की भीड़
कथावाचक गौरव कृष्ण शास्त्री ने श्रीराम जन्म प्रसंग सुनाकर भक्तों को किया भावविभोर
सिद्धार्थनगर। शहर स्थित नगर पालिका के अवेद्यनाथ सभागार में आयोजित अमृतमयी श्रीराम कथा महोत्सव के तीसरे दिन रविवार को भक्ति, उल्लास और आस्था का अलौकिक दृश्य देखने को मिला। कथा के दौरान जैसे ही प्रभु श्रीराम के जन्म का प्रसंग आया, पूरा सभागार जय श्रीराम के गगनभेदी जयघोष से गूंज उठा। श्रद्धालु भक्ति के रस में ऐसे डूबे कि मानो साक्षात अयोध्या धाम का वातावरण साकार हो गया हो।
तीसरे दिन यजमान के रूप में चीफ फार्मासिस्ट डॉ. योगेंद्र प्रसाद यादव, प्रमुख व्यवसायी मिट्ठू कसौंधन, महेश्वर अग्रहरी रहे, जिन्होंने अपनी-अपनी धर्म पत्नियों के साथ पूजन अर्चन किया। सायं शुरू प्रवचल में अयोध्या धाम से पधारे अंतरराष्ट्रीय कथावाचक गौरव कृष्ण शास्त्री ने संगीतमयी शैली में श्रीराम जन्म का अत्यंत भावपूर्ण और हृदयस्पर्शी वर्णन किया। उन्होंने अपने मधुर भजनों, मार्मिक व्याख्यान और जीवंत प्रस्तुति से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। कथा के दौरान कई श्रद्धालु भावुक होकर अश्रुपूरित हो उठे, वहीं कुछ भक्त भजनों की धुन पर झूमते नजर आए। कथावाचक ने कहा कि भगवान श्रीराम का अवतार केवल रावण वध के लिए नहीं, बल्कि समाज को मर्यादा, धर्म और आदर्श जीवन का मार्ग दिखाने के लिए हुआ था।
श्रीराम का जीवन त्याग, सत्य और कर्तव्यनिष्ठा का प्रतीक है, जो हर युग में मानवता को प्रेरित करता रहेगा। उन्होंने कहा कि जब-जब संसार में अधर्म और अन्याय बढ़ता है, तब-तब भगवान विभिन्न रूपों में अवतरित होकर धर्म की स्थापना करते हैं। कथा स्थल पर भक्ति का ऐसा वातावरण बना कि पूरा सभागार भजन-कीर्तन से गूंजता रहा। श्रद्धालु हाथों में तालियां बजाते हुए भक्ति गीतों का आनंद लेते रहे। महिलाएं, पुरुष, बुजुर्ग और बच्चे सभी एक स्वर में प्रभु श्रीराम के जयकारे लगाते हुए नजर आए। आयोजकों ने बताया कि आगामी दिनों में श्रीराम कथा के अन्य महत्वपूर्ण प्रसंगों का संगीतमयी वर्णन किया जाएगा, जिसे लेकर श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह बना हुआ है।
कथावाचक का संगत देने वालों में वतन उपाध्याय आरंगन बादक, आदित्य गौस्वामी तबला वादक व रवि उपाध्याय पैड बादक शामिल हैं। जबकि महोत्सव में कड़ी मेहनत कर सफल बनाने वालों में मनीष शुक्ल, अध्यक्ष शिवदत्त अग्रहरि, महामंत्री नीरज श्रीवास्तव, संयोजक शुभम श्रीवास्तव, सह संयोजक संदीप जायसवाल, राघवेंद्र यादव, रमेश गुप्त, अरुण कुमार प्रजापति, रजनीश उपाध्याय, विनोद बजाज, अनिल वर्मा, सुनील श्रीवास्तव, श्रीश श्रीवास्तव, पंकज पासवान, आशा उपाध्याय, श्रीमती सोनू कसौंधन, साधना श्रीवास्तव आदि की भूमिका अहम रही।





