पश्चिम एशिया में सैन्य संघर्ष से ऊर्जा आपूर्ति पर दबाव के कारण केंद्र सरकार ने प्राकृतिक गैस के उपयोग की प्राथमिकताएं बदल दी हैं।
पश्चिम एशिया में बढ़ते सैन्य संघर्ष के कारण ऊर्जा आपूर्ति पर पड़े दबाव के बीच केंद्र सरकार ने देश में प्राकृतिक गैस के उपयोग की प्राथमिकताओं को फिर से तय कर दिया है।
सरकार ने बीते दिन निर्णय लिया है कि घरेलू रसोई गैस (एलपीजी) के उत्पादन, सीएनजी और पाइप्ड कुकिंग गैस (पीएनजी) की आपूर्ति को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाएगी, ताकि घरों और परिवहन क्षेत्र में किसी प्रकार की कमी न हो।
इस संबंध में पेट्रोलियम मंत्रालय ने आवश्यक वस्तु अधिनियम 1955 लागू करते हुए नया आदेश जारी किया है। एलपीजी की जमाखोरी और कालाबाजारी रोकने के लिए निगरानी समिति बनाई गई है। देशभर के तमाम शहरों में कामर्शियल गैस सिलेंडरों की आपूर्ति बाधित होने से होटल-रेस्तरां के बंद होने का खतरा बढ़ गया है।
33 करोड़ घरेलू गैस कनेक्शनों तक नियमित आपूर्ति पहली प्राथमिकता
नए आदेश के अनुसार, गैर-प्राथमिकता वाले क्षेत्रों को मिलने वाली गैस का हिस्सा घटाकर उसे प्राथमिकता वाले क्षेत्रों की ओर मोड़ा जा रहा है। सरकार का कहना है कि देश में गैस की कुल उपलब्धता पर्याप्त है, लेकिन मौजूदा वैश्विक हालात को देखते हुए घरेलू जरूरतों को सुरक्षित रखना जरूरी है। सरकार की तरफ से यह दावा तब किया गया जब देश के कई हिस्सों से एलपीजी वितरक एजेंसियों की तरफ से गैस आपूर्ति बाधित होने की बात कही गई है।
पेट्रोलियम मंत्रालय के उच्चपदस्थ सूत्रों ने बताया कि सरकार की पहली प्राथमिकता देश के लगभग 33 करोड़ घरेलू गैस कनेक्शनों तक नियमित आपूर्ति सुनिश्चित करना है। पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष और होर्मुज जलडमरूमध्य से टैंकरों की आवाजाही प्रभावित होने के कारण भारत की गैस आपूर्ति का लगभग 30 प्रतिशत हिस्सा बाधित हुआ है। इसी कारण सरकार ने गैस आवंटन व्यवस्था में यह पुनर्गठन किया है।
अधिकारियों के अनुसार उपलब्ध एलएनजी का इस्तेमाल सबसे पहले एलपीजी उत्पादन, सीएनजी और पाइप्ड कुकिंग गैस की जरूरतों को पूरा करने के लिए किया जाएगा। इन क्षेत्रों की औसत छह महीने की मांग को शत-प्रतिशत पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। इसके बाद उर्वरक उद्योग को प्राथमिकता दी जाएगी, जहां कम से कम 70 प्रतिशत गैस आपूर्ति सुनिश्चित की जाएगी। वाणिज्यिक और औद्योगिक उपभोक्ताओं को उनकी औसत खपत का लगभग 80 प्रतिशत गैस उपलब्ध कराई जाएगी।
सूत्रों के अनुसार, पश्चिम एशिया संकट के कारण रसोई गैस की आपूर्ति पर दबाव बढ़ गया था। इसलिए गैस आवंटन को दोबारा तय करते हुए एलपीजी उत्पादन बढ़ाने के लिए रिफाइनरियों को भी अतिरिक्त गैस फीडस्टाक का इस्तेमाल करने के निर्देश दिए गए हैं। इसका असर यह हुआ कि पिछले दो दिनों में एलपीजी उत्पादन में लगभग 10 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है।
निगरानी समिति तय करेगी प्राथमिकता
गैर-प्राथमिकता वाले क्षेत्रों में एलपीजी की मांग की समीक्षा के लिए सरकारी क्षेत्र की तीनों तेल विपणन कंपनियों—इंडियन ऑयल, हिंदुस्तान पेट्रोलियम और भारत पेट्रोलियम के वरिष्ठ अधिकारियों की एक निगरानी समिति भी बनाई गई है।
यह समिति विभिन्न औद्योगिक क्षेत्रों से आने वाली गैस मांग का आकलन कर उसके आवंटन पर निर्णय लेगी।सरकार ने गैस आपूर्ति के इस नए प्रबंधन को लागू करने की जिम्मेदारी सरकारी कंपनी गेल लिमिटेड को दी है, जो विभिन्न क्षेत्रों में गैस वितरण को प्राथमिकता सूची के अनुसार नियंत्रित करेगी। स्थिति सामान्य होने पर गैस आपूर्ति से जुड़े मूल वाणिज्यिक अनुबंधों को फिर से लागू कर दिया जाएगा।
रोज 19 करोड़ घन मीटर गैस की खपत
भारत में प्राकृतिक गैस की खपत लगभग 19.1 करोड़ घन मीटर प्रतिदिन है, जिसमें से करीब आधी जरूरत आयातित एलएनजी से पूरी होती है। पश्चिम एशिया संकट के कारण ऊर्जा बाजारों में अस्थिरता बढ़ गई है। कई हिस्सों से एलपीजी आपूर्ति में बाधा की खबरें देश के कई हिस्सों से एलपीजी वितरक एजेंसियों ने आपूर्ति में बाधा आने की सूचना दी है।
तेल विपणन कंपनियों के निर्देश पर कई स्थानों पर वाणिज्यिक एलपीजी सिलेंडर की आपूर्ति पहले ही सीमित कर दी गई है।बेंगलुरू के भाजपा सांसद तेजस्वी सूर्या ने केंद्रीय पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी को पत्र लिखकर होटल, रेस्टोरेंट और पर्यटन क्षेत्र के लिए भी एलपीजी आपूर्ति सुनिश्चित करने का आग्रह किया है।
तमिलनाडु, कर्नाटक, महाराष्ट्र समेत कई राज्यों में होटल-रेस्तरां उद्योग के समक्ष कमर्शियल गैस सिलेंडर की आपूर्ति में बाधा के चलते संकट खड़ा हो गया है। पेट्रोलियम मंत्रालय का कहना है कि इन शिकायतों की जांच की जा रही है और तेल कंपनियों को आपूर्ति व्यवस्था सुचारु रखने के निर्देश दिए गए हैं। साथ ही रसोई गैस की कालाबाजारी और जमाखोरी रोकने के लिए राज्यों की एजेंसियों के साथ समन्वय बढ़ाया जा रहा है।





