हजपुरा, अम्बेडकरनगर सिकंदरपुर में नवासे-ए-रसूल हजरत इमाम हसन अस. की विलादत के मौके पर तरही महफिल का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में देश-प्रदेश के नामचीन शायरों ने अपने कलाम पेश कर श्रोताओं से खूब दाद बटोरी।
सिकंदरपुर स्थित अजाखाना सैयद अली मोहम्मद में गुरुवार की शाम 8 बजे से सैयद मसरूर आलम एडवोकेट के नेतृत्व में आयोजित इस महफिल की शुरुआत मौलवी तालिब अब्बास ने तिलावत-ए-कुरआन से की।
इस अवसर पर मौलाना सैयद नूरुल हसन ने हजरत इमाम हसन की जिंदगी पर प्रकाश डालते हुए कहा कि उनका संदेश पूरी दुनिया को सुलह, समझौते, अमन और शांति का रास्ता दिखाता है। मुख्य अतिथि राज्य सूचना आयुक्त लखनऊ मो. नदीम ने कहा कि हजरत इमाम हसन ने इस्लाम की सरबुलंदी और मुसलमानों के सुरक्षित जीवन के लिए सुलह का रास्ता अपनाया, जिसे इतिहास में “सुल्हे हसन” के नाम से जाना जाता है और इसका विशेष महत्व है। उन्होंने कहा कि इमाम हसन का जीवन दया, ज्ञान, सहिष्णुता और बहादुरी की मिसाल है।
वहीं मौलाना रहबर सुल्तानी, इमामे जुमा जलालपुर ने कहा कि इमाम हसन अस. का मुख्य उद्देश्य उम्मत की इस्लाह और मुसलमानों के खून की हिफाजत करना था। उनकी सुलह शांति और संयम का ऐसा उदाहरण है जिसे इस्लाम के इतिहास में एक महत्वपूर्ण और दूरदर्शी कदम माना जाता है।
महफिल में शायर नफीस हल्लौरी, मौ. डॉ. असगर एजाज कायमी, खुर्शीद मुजफ्फरनगरी, चंदन फैजाबादी, डॉ. रजा मोरानवी, जफर नसीराबादी, सुहेल बसतवी, शाहिद कमाल, हस्सान कायमी, अनवर सेथली, मारूफ सिरसिवी, बिलाल सहरनपुरी, मुनव्वर जलालपुरी और सैयद दाउदपुरी सहित कई स्थानीय शायरों ने अपने कलाम पेश किए।
कार्यक्रम का संचालन अनीस जायसी ने किया। इस दौरान मौलाना सैयद नूरुल हसन को महफिल की सदारत के 25 वर्ष पूरे होने पर प्रशस्ति पत्र और अंगवस्त्र भेंट कर सम्मानित किया गया। कार्यक्रम में सैयद शहंशाह हुसैन जैदी, सैयद शहनवाज हैदर जैदी, मौलाना कैसर अब्बास, मौलाना जफर मारूफी समेत बड़ी संख्या में उलेमा और मोमिनीन मौजूद रहे।





