अमेरिका और इजरायल के हमले में ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला खामेनेई की मौत के विरोध में उत्तर प्रदेश, दिल्ली, जम्मू-कश्मीर, बिहार और झारखंड सहित कई भारतीय राज्यों में व्यापक प्रदर्शन हुए।
अमेरिका और इजरायल के हमले में ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला खामेनेई की मौत के विरोध में उत्तर प्रदेश, जम्मू-कश्मीर, दिल्ली, बिहार और झारखंड समेत विभिन्न राज्यों में लोगों ने प्रदर्शन किया। ऑल इंडिया शिया पर्सनल लॉ बोर्ड ने तीन दिनों का शोक घोषित किया है। राजधानी दिल्ली में जंतर-मंतर पर आयोजित शोक सभा में बड़ी संख्या बच्चे और महिलाएं भी शामिल हुईं। खामेनेई की तस्वीरें लिए लोगों ने लोगों ने बांह और माथे पर काली पट्टी बांध रखी थी।
ओखला समेत कई स्थानों पर विरोध प्रदर्शन हुए तो जोरबाग स्थित कर्बला में कैंडल मार्च निकाला गया। ईरान सांस्कृतिक केंद्र में भी शोक सभा हुई, जिसमें भी बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए। जमात-ए-इस्लामी हिंद के अध्यक्ष सैयद सआहतुल्लाह हुसैनी ने खामेनेई की मौत की कड़ी निंदा की। पुराने लखनऊ में मुसलमान समुदाय ने दुकानें बंद कर दीं।
हिंदू व्यापारियों ने भी समर्थन में दुकानें नहीं खोलीं। चौक में छोटे इमामबाड़े में बड़ी संख्या में लोग एकत्र हुए। शिया धर्मगुरु मौलाना यासूब अब्बास ने कहा कि शोक के दौरान तीन दिनों तक हम सभी काले कपड़े पहनें। अपने घरों पर काले पर्चे लहराएं। खामेनेई के लिए फातिहा पढ़ें और नज्र करें।
जम्मू-कश्मीर में भी लोगों में आक्रोश दिखा
पूरे कश्मीर में रविवार को प्रदर्शन हुए। विभिन्न धार्मिक संगठनों के मंच मुताहिदा मजलिस-ए-उलेमा ने सोमवार को कश्मीर बंद का आह्वान किया है। सरकार ने दो और तीन मार्च को कश्मीर में सभी स्कूल, कॉलेज और विश्वविद्यालय बंद रखने का आदेश जारी किया है।
मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने इंटरनेट मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर कहा कि वह ईरान में हुए घटनाक्रम से वह बेहद चिंतित हैं। मुख्यमंत्री ने पुलिस और प्रशासन से संयम बरतने को कहा है।
पंजाब के मालेरकोटला में मुस्लिम समुदाय ने रोष मार्च निकाला। दीनी मरकज जामा मस्जिद लुधियाना के बाहर बड़ी संख्या में मुस्लिमों ने प्रदर्शन किया। बिहार के शेखपुरा में मुस्लिम समुदाय के लोगों ने कैंडल मार्च निकाला। कैंडल मार्च में शिया समुदाय के साथ बड़ी संख्या में सुन्नी समुदाय के लोग भी शामिल हुए। रांची के कर्बला चौक पर प्रदर्शन में बड़ी संख्या में शिया समुदाय के लोग शामिल थे।





