Thursday, February 26, 2026
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चीन का ह्यूमनॉइड रोबोट सेक्टर तेजी से बढ़ रहा है, सरकारी मांग कम हुई तो मंडरा रहा ये खतरा

चीन का ह्यूमनॉइड रोबोट उद्योग तेजी से बढ़ रहा है, लेकिन वास्तविक मांग की कमी से इसके ठंडा पड़ने का खतरा है। सरकार का समर्थन, जैसे टेस्टिंग सेंटर और खरीद, इस क्षेत्र को बढ़ावा दे रहा है।

चीन का ह्यूमनॉइड रोबोट इंडस्ट्री बहुत तेज गति से आगे बढ़ रही है, लेकिन एक्सपर्ट्स का मानना है कि अगर वास्तविक मांग में उछाल नहीं आया तो यह बाजार जल्दी ही ठंडा पड़ सकता है।

फिलहाल इस क्षेत्र को सबसे बड़ा समर्थन चीन की सरकार से मिल रहा है। स्थानीय सरकारें कई टेस्टिंग सेंटर स्थापित कर रही हैं। इन जगहों पर कंपनियां रोबोट्स को अलग-अलग काम सौंपकर उनका प्रदर्शन डेटा इकट्ठा कर रही हैं। मिसाल के लिए शंघाई में एक ऐसा ही केंद्र बनाया गया है, जहां एक साथ 100 ह्यूमनॉइड रोबोट विभिन्न काम करके डेटा जुटा सकते हैं।

वर्तमान में ये रोबोट ज्यादातर सरल और दोहराव वाले कामों में ही कुशल माने जा रहे हैं। उद्योग के जानकारों के अनुसार, अभी ये रोबोट इंसानों की तुलना में केवल 30-40% ही दक्षता दिखा पा रहे हैं। जटिल और नियमित कार्यों में इनकी क्षमता तब तक सीमित रहेगी, जब तक ये रोबोट व्यावसायिक स्तर पर बड़े पैमाने पर उपयोगी साबित नहीं हो जाते।

मजबूत सप्लाई चेन, मांग अभी सीमित

चीन में ह्यूमनॉइड रोबोट की सप्लाई चेन दुनिया में सबसे मजबूत है। कई कंपनियां बड़े पैमाने पर प्रोडक्शन कर रही हैं और हजारों सप्लायर इस इकोसिस्टम का हिस्सा हैं। पिछले साल दुनिया भर में लगभग 14,500 से ज्यादा ह्यूमनॉइड रोबोट डिलीवर किए गए, जिनमें से ज्यादातर चीन में ही बने थे। यह संख्या 2024 में करीब 3,000 के आसपास थी।

फिर भी, अभी तक इन रोबोट्स का इस्तेमाल मुख्य रूप से प्रचार, स्वागत और ग्राहक सेवा जैसे क्षेत्रों में हो रहा है। शंघाई में ‘रोबोट शोरूम’ जैसी दुकानों में रोबोट ग्राहकों का स्वागत करते दिखते हैं। फैक्टरियों में भी ये रोबोट सहायक कार्य कर रहे हैं, लेकिन अभी ये इंसानों की जगह पूरी तरह नहीं ले पा रहे।

सरकारी खरीद पर सबसे ज्यादा निर्भरता

पिछले कुछ सालों में दुनिया की सबसे बड़ी ह्यूमनॉइड रोबोट खरीदार चीन की सरकार ही रही है और आने वाले समय में भी यही स्थिति बनी रहने की संभावना है। लेकिन अगर सरकारी खरीदारी में कमी आई और निजी क्षेत्र से मांग नहीं बढ़ी, तो यह उद्योग कंपनियों और सप्लायरों के लिए बड़ा संकट बन सकता है।

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