Wednesday, March 4, 2026
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22 की उम्र में 70 साल के बुजुर्ग जैसा हो गया दिमाग, पढ़ें इस मेडिकल केस की चौंकाने वाली कहानी

आमतौर पर हम मानते हैं कि डिमेंशिया या भूलने की बीमारी केवल बुजुर्गों को होती है, लेकिन इंग्लैंड की एक दुखद घटना ने इस धारणा को पूरी तरह से बदल दिया है। यह कहानी है आंद्रे यारहम की, जिन्हें ब्रिटेन का सबसे युवा डिमेंशिया मरीज माना गया। महज 22 साल की उम्र में बीमारी का पता चला और 24 साल की उम्र में उनका निधन हो गया, लेकिन जाते-जाते आंद्रे ने विज्ञान को एक नई उम्मीद दी है। आइए जानते हैं इस दुर्लभ मेडिकल केस के बारे में विस्तार से।

22 साल की उम्र में डिमेंशिया का अनुभव करने वाले ब्रिटेन के सबसे युवा मरीज आंद्रे यारहम का मामला शोधकर्ताओं को युवावस्था में इस बीमारी के कारणों, प्रोटीन जमाव और मस्तिष्क की कोशिकाओं पर पड़ने वाले प्रभावों को समझने में मदद कर सकता है। इससे दुर्लभ मामलों के लिए नए उपचारों की खोज हो सकती है, क्योंकि यह दिखाता है कि डिमेंशिया केवल बुढ़ापे की बीमारी नहीं है और इससे मस्तिष्क अनुसंधान में निवेश की आवश्यकता पर जोर मिलता है।

दिमाग 70 वर्षीय के समान

आंद्रे यारहम की इस बीमारी के कारण हाल में केवल 24 वर्ष की आयु में निधन हो गया। यारहम के परिवार ने उनके मस्तिष्क को शोध के लिए दान करने का निर्णय लिया। यह एक असाधारण उपहार है, जो दूसरों के लिए त्रासदी को आशा में बदलता है । इंग्लैंड के नारफोक के रहने वाले आंद्रे यारहम जब पहली बार डिमेंशिया का निदान हुआ, तब उनकी आयु केवल 22 वर्ष थी।

एमआरआइ स्कैन के अनुसार, यारहम का दिमाग 70 वर्षीय के समान था, जिसने इस बीमारी का निदान करने में मदद की । परिवार का कहना है कि वह धीरे-धीरे भूलने लगे थे। कभी-कभी उनके चेहरे पर एक खाली भाव होता था । जीवन के अंतिम चरणों में उन्होंने भाषा खो दी, स्वयं की देखभाल नहीं कर सके, अनुचित व्यवहार करने लगे और व्हीलचेयर पर निर्भर हो गए।

फ्रंटोटेम्पोरल डिमेंशिया के पीछे जैविक कारण

इस तरह के दुर्लभ शुरुआती मामलों से पता चलता है कि डिमेंशिया सिर्फ बुढ़ापे की समस्या नहीं है, बल्कि इसके जैविक कारण भी हो सकते हैं, जो बचपन या युवावस्था से शुरू हो सकते हैं। इसे फ्रंटोटेम्पोरल डिमेंशिया कहा जाता है। अल्जाइमर रोग के विपरीत जो पहले याददाश्त को प्रभावित करता है, फ्रंटोटेम्पोरल डिमेंशिया मस्तिष्क के उन हिस्सों पर हमला करता है जो व्यक्तित्व, व्यवहार और भाषा से जुड़े होते हैं। ये क्षेत्र मस्तिष्क के फ्रंटल और टेम्पोरल लोब में होते हैं, जो दिमाग के पीछे और कानों के ऊपर स्थित होते हैं।

ये क्षेत्र हमें योजना बनाने, आवेगों को नियंत्रित करने, भाषण को समझने और स्वयं को व्यक्त करने में मदद करते हैं। जब ये क्षतिग्रस्त होते हैं, तो लोग अंतर्मुखी, आवेगी या संवाद करने में असमर्थ हो सकते हैं। फ्रंटोटेम्पोरल डिमेंशिया एक कम सामान्य प्रकार का डिमेंशिया है, जो लगभग 20 में से एक मामले का कारण माना जाता है। यह युवाओं में प्रकट हो सकता है। कई मामलों में फ्रंटोटेम्पोरल डिमेंशिया में एक मजबूत आनुवंशिक घटक होता है। विशिष्ट जीन में बदलाव मस्तिष्क की कोशिकाओं को प्रोटीन को संभालने में बाधित कर सकते हैं।

काम करना बंद कर देती हैं मस्तिष्क की कोशिकाएं

इन प्रोटीनों के टूटने और पुनः चक्रित होने के बजाय वे न्यूरांस (मस्तिष्क की कोशिकाओं) के अंदर एकत्रित हो जाते हैं, उनके काम करने और जीवित रहने की क्षमता में बाधा डालते हैं। समय के साथ प्रभावित मस्तिष्क की कोशिकाएं काम करना बंद कर देती हैं और मर जाती हैं। जैसे-जैसे अधिक कोशिकाएं खो जाती हैं, मस्तिष्क का ऊतक स्वयं सिकुड़ता है।

यह प्रक्रिया कभी – कभी जीवन में इतनी जल्दी क्यों शुरू हो जाती है, यह अभी भी पूरी तरह से समझा नहीं गया है । यारहम जीवित रहते हुए किए गए मस्तिष्क स्कैन में चौंकाने वाली सिकुड़न दिखाई दी। स्तिष्क सामान्य अर्थ में ” तेजी से वृद्ध” नहीं हुआ था। इसके बजाय बीमारी के कारण एक छोटे समय में बड़ी संख्या में न्यूरांस खो गए थे। वृद्धावस्था में मस्तिष्क धीरे – धीरे बदलतो है, लेकिन आक्रामक डिमेंशिया में पूरे मस्तिष्क के नेटवर्क साथ ढह जाते हैं।

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