India Oman Free Trade Agreement: भारत और ओमान के बीच फ्री ट्रेड डील तीन महीने में लागू होने की उम्मीद है। इस समझौते से 99% भारतीय निर्यात को ड्यूटी फ्री लाभ मिलेगा, जिससे दोनों देशों के बीच व्यापारिक रिश्ते और मजबूत होंगे। यह समझौता भारतीय व्यापारियों के लिए ओमान के बाजार में पहुंच को आसान बनाएगा और आर्थिक साझेदारी को बढ़ावा देगा। इससे विभिन्न क्षेत्रों में व्यापार के नए अवसर पैदा होंगे।
India Oman Free Trade Agreement: भारत और ओमान के बीच हुआ मुक्त व्यापार समझौता (FTA) अगले तीन महीनों के भीतर लागू हो सकता है। वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल (Piyush Goyal) ने शुक्रवार को यह जानकारी दी। उन्होंने कहा कि दोनों देश इस समझौते को जल्द से जल्द जमीन पर उतारने की दिशा में काम कर रहे हैं। भारत और ओमान के बीच 18 दिसंबर को इस समझौते पर हस्ताक्षर किए गए थे।
यह समझौता व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौता (CEPA) के तहत किया गया है। इसके तहत ओमान ने अपनी 98 प्रतिशत से ज्यादा टैरिफ लाइनों यानी उत्पाद श्रेणियों पर शून्य शुल्क (duty free india exports oman) की पेशकश की है। इससे भारत के 99.38 प्रतिशत निर्यात को ओमान के बाजार में बिना किसी आयात शुल्क के पहुंच मिलेगी। फिलहाल इन उत्पादों पर ओमान में 5 प्रतिशत से लेकर 100 प्रतिशत तक आयात शुल्क लगता है।
समझौते से किन-किन सेक्टरों को होगा बड़ा फायदा?
इस समझौते से भारत (indian exports oman boost) के कई श्रम-प्रधान सेक्टरों को बड़ा फायदा मिलेगा। इनमें रत्न एवं आभूषण, वस्त्र, चमड़ा, जूते, खेल का सामान, प्लास्टिक, फर्नीचर, कृषि उत्पाद, इंजीनियरिंग सामान, दवाइयां, मेडिकल डिवाइस और मोटर वाहन जैसे प्रमुख क्षेत्र शामिल हैं। इन सभी उत्पादों को ओमान में पूरी तरह ड्यूटी फ्री कर दिया गया है।
दूसरी ओर, भारत भी ओमान को बड़ा बाजार खोलने जा रहा है। भारत अपनी कुल 12,556 टैरिफ लाइनों में से 77.79 प्रतिशत पर शुल्क में छूट देगा। यह मूल्य के हिसाब से ओमान से भारत होने वाले 94.81 प्रतिशत आयात को कवर करता है।
ओमान ने अमेरिका से किया था आखिरी समझौता!
पीयूष गोयल ने कहा कि, “ओमान के मंत्री और मैंने इस बात पर चर्चा की है कि हम इस समझौते को तीन महीने के भीतर लागू करने की कोशिश करेंगे।” उन्होंने बताया कि ओमान ने इससे पहले आखिरी बार अमेरिका के साथ 2006 में व्यापार समझौता किया था, जो 2009 में लागू हुआ।
निवेश की संभावनाओं पर बात करते हुए गोयल (piyush goyal oman trade deal) ने कहा कि इस्पात, ऊर्जा, शिक्षा और स्वास्थ्य सेवा जैसे क्षेत्रों में भारतीय कंपनियों के लिए बड़े मौके हैं। उन्होंने कहा, “जिन परियोजनाओं में प्राकृतिक संसाधनों की जरूरत होती है, वहां भारतीय कंपनियां निवेश करना पसंद करेंगी।” खासतौर पर हरित इस्पात और हरित ऊर्जा को लेकर दोनों देशों में सहयोग की बड़ी गुंजाइश है।
देश में निर्यात और रोजगार के बढ़ेंगे मौके
गोयल ने बताया कि ऊर्जा को ग्रीन हाइड्रोजन और ग्रीन अमोनिया में बदलकर दुनिया के दूसरे हिस्सों में निर्यात किया जा सकता है, जिससे भारत के लिए निर्यात और रोजगार दोनों बढ़ेंगे। इसके अलावा ओमान में संगमरमर प्रसंस्करण, शिक्षा, स्वास्थ्य सेवा और बैटरी निर्माण जैसे क्षेत्रों में भी निवेश की संभावनाएं हैं।
उन्होंने कहा, “ओमान की कंपनियां भारतीय व्यवसायों के साथ साझेदारी को लेकर काफी उत्साहित हैं।” गोयल ने यह भी बताया कि ओमान की एक डेयरी कंपनी ने अमूल के साथ जॉइंट वेंचर शुरू करने की इच्छा जताई है। साथ ही ओमान की कंपनियों और उसके सॉवरेन वेल्थ फंड को भारत में निवेश के लिए आमंत्रित किया गया है।





