सम्मेलन में किन्नरों को भी देखा गया खूब सजते संवरते
अखिल भारतीय किन्नर सम्मेलन के तीसरे दिन खिचड़ी तुलाई के जरिए सम्मेलन की औपचारिक शुरूआत हुई और नए रिश्तों की शुरूआत के प्रतीक के रूप में सम्पन्न खिचड़ी कार्यक्रम के साथ ही नृत्य’ संगीत और अन्य सांस्कृतिक कार्यक्रम सम्मेलन का मुख्य आकर्षण रहे। सम्मेलन में किन्नरों को भी खूब सजते संवरते देखा गया।
बुन्देलखण्ड का कश्मीर कहे जाने वाले चरखारी में दूसरी बार आयोजित हो रहे अखिल भारतीय किन्नर सम्मेलन का शुभारम्भ 1 दिसम्बर को किन्नरों के आगमन के साथ हुआ साथ ही दूसरे दिन परिचय सम्मेलन के बाद औपचारिक शुरूआत के लिए सोने की तराजू में खिचड़ी तुलाई की रश्म अदा की गई। बताते चलें कि किन्नर सम्मेलन में खिचड़ी कार्यक्रम एक महत्वपूर्ण और पारंपरिक रस्म है, जो सम्मेलन की शुरुआत के साथ होती है। इसमें मूंग और चावल की तुलाई होती है, जिसे बाद में कुलदेवी को भोग लगाया जाता है।
कुलदेवी को भोग लगाने के बाद सम्मेलन में नृत्य, संगीत और अन्य सांस्कृतिक आयोजित किए गए। सम्मेलन के संयोजक किन्नर जीनत ने बताया कि इस रस्म को नए रिश्तों की शुरुआत का प्रतीक माना जाता है। यह भाई बहन या मां मौसी जैसे नए रिश्ते बनाने के लिए भी महत्वपूर्ण है। यह कार्यक्रम किन्नरों के सदस्यों को एक साथ लाता है और वे अपनी परम्पराओं व संस्कृति का प्रदर्शन करते हैं।
सह संयोजक रमेश किन्नर ने बताया कि कार्यक्रम के तहत बुधवार को खिचड़ी की रस्म पूरी की गई। उन्होनें बताया कि हमारे किन्नरों के परिवार से सारे रिश्ते नाते टूट जाते हैं और किन्नर ही उनके रिश्तदार होते हैं। सम्मेलन इन रिश्तों को नई ऊंचाईयों तक पहुंचाने का काम करते हैं।
मंगलवार की शाम सम्मेलन दौरान कुछ किन्नरों के आपसी मतभेदों को भी सम्मेलन में प्रमुख किन्नरों के समक्ष रखे गए जिनका निस्तारण करते हुए नए रिश्तों के साथ सुखमय जीवन व्यतीत करने की शपथ दिलायी गयी। खिचड़ी तुलाई के बाद तैयार की खिचड़ी को सभी किन्नरों को प्रसाद के रूप में वितरण किया और भोजन के बाद नृत्य संगीत कार्यक्रमों में देश भर से आए किन्नरों ने अपनी नृत्यकला व क्षेत्र की संस्कृति का मुजाहिरा किया।





