Sunday, November 30, 2025
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डेडबॉडी का चेहरा देख दंग रह गए घरवाले, हंगामा होने पर सामने आई सच्चाई तो पोस्टमार्टम हाउस में मची खलबली

एक पोस्टमार्टम हाउस में डेडबॉडी की गलत पहचान के कारण हंगामा मच गया। परिजनों ने डेडबॉडी का चेहरा देखकर उसे पहचानने से इनकार कर दिया, जिसके बाद सच्चाई सामने आई कि पोस्टमार्टम हाउस के कर्मचारियों से गलती हुई थी। इस घटना के बाद पोस्टमार्टम हाउस में अफरा-तफरी मच गई और अधिकारियों ने तुरंत सही डेडबॉडी की पहचान कर परिजनों को सौंपी।

प्रयागराज। लचर व्यवस्था और जिम्मेदारों की लापरवाही के चलते पोस्टमार्टम हाउस में लाश ही बदल दी गई है। परिवार वालों को पहचान कराए बिना ही शव दे दिया गया। लाश बदलने से नाराज एक परिवार ने गुरुवार को हंगामा किया, जिसके बाद पोस्टमार्टम हाउस के अधिकारियों, कर्मचारियों में खलबली मच गई।

आनन-फानन जितने शवों का पाेस्टमार्टम हुआ था, उनकी जांच-पड़ताल शुरू हुई। तब पता चला कि रेलकर्मी के घरवाले दुकानदार का शव लेकर चले गए हैं। रास्ते से उन्हें वापस बुलाया गया और फिर शिनाख्त कराते हुए लाश दी गई। दुकानदार के बेटे ने पोस्टमार्टम हाउस के कर्मचारियों पर घोर लापरवाही बरतने का आरोप लगाया है।

बताया गया है कि जौनपुर जिले के मीरगंज थाना क्षेत्र स्थित सतहरिया निवासी 57 वर्षीय अवधेश कुमार किराना की दुकान चलाते थे। तीन दिन पहले सड़क हादसे में वह घायल हो गए थे, जिन्हें इलाज के लिए स्वरूपरानी नेहरू अस्पताल में भर्ती कराया गया।

बुधवार को मौत हुई और गुरुवार को पोस्टमार्टम किया गया। वहीं, कानपुर नगर के झकरकटी बाबू का पुरवा मुहल्ला निवासी 40 वर्षीय जितेंद्र केसरवानी रेलवे में चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी थे। वह फतेहपुर में खागा रेलवे स्टेशन पर ड्यूटी करते थे। बुधवार को ट्रैक पर काम करते वक्त कालिंदी एक्सप्रेस की चपेट में आ गए।

घायल होने पर स्वरूपरानी नेहरू अस्पताल लाया गया, जहां डाक्टरों ने मृत घोषित कर दिया। गुरुवार दोपहर उनके शव का भी पोस्टमार्टम हुआ। इसके बाद गमजदा परिवार वाले पूरी तरह से सील लाश को एंबुलेंस में लेकर चले गए। उधर, जब अवधेश के घरवालों को लाश दी गई तो उन्होंने पहचान करने की बात कही।

चेहरा देखकर हतप्रभ रह गए कि अवधेश की लाश नहीं है। इससे नाराज परिवार व रिश्तेदार ने लापरवाही का आरोप लगाते हुए हंगामा शुरू कर दिया। लाश बदलने के बारे में पता चला तो कर्मचारियों में खलबली मच गई।

इसके बाद सभी शवों के बारे में जानकारी ली गई तो मालूम हुआ कि रेलकर्मी की बजाय दुकानदार की लाश कानपुर के लोगों को दी गई है।

बहरहाल, उन्हें रास्ते से वापस बुलाकर शव को फिर से बदलकर संबंधित लोगों को दिया गया। मगर इस घटना ने जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मचारियों की लापरवाही की पोल खोल दी।

11 सौ रुपये लेने का लगाया आरोप

दुकानदार अवधेश के परिवार के सदस्य जितेंद्र ने आरोप लगाया कि पोस्टमार्टम करने से पहले कर्मचारियों ने आठ सौ रुपये लिए थे। इसके बाद जब लाश को सील करने लगे तब तीन सौ रुपये लिए। इस तरह कुल 11 सौ रुपये लिए गए। उनकी तरह बाकी लोग भी पैसा दे रहे थे।

पहले भी हो चुकी ऐसी घटना

गुरुवार को लाश बदलने की घटना पहली बार नहीं हुई है। कई साल पहले भी ऐसा मामला हुआ था, जब सीआरपीएफ जवान की लाश बदल दी गई थी। ऐसे में यहां की व्यवस्था को लेकर कई तरह के सवाल भी उठ रहे हैं।

“मामला संज्ञान में आया है। शव की पहचान के बावजूद किसी दूसरे परिवार को दे देना गंभीर लापरवाही है। पोस्टमार्टम हाउस में एक डाक्टर और एक फार्माशिस्ट नियमित हैं, शेष कर्मचारी आउटसोर्स पर हैं। प्रकरण की गहन जांच करा रहे हैं। शव बदले जाने का जो भी जिम्मेदार होगा उसके खिलाफ कार्रवाई करेंगे।

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