रामलीला कलाकारों ने भगवान राम के वनवास की लीला का किया मंचन, जिसे देख दर्शकों की आंखे हुई नम
महोबा। नवरात्र में जहां एक ओर मंदिरों और दुर्गा पंडालों में भक्तों की भारी भीड़ पहुंच रही है, वहीं पुराने रालीला मैदान में रामलीला न्यास व अंतर्राष्ट्रीय रामायण एवं वैदिक शोध संस्थान अयोध्या के संयुक्त तत्वाधान में आयोजित की जा रही रामलीला में भी राम भक्तों की भीड़ नजर आ रही है। बीती रात्रि रामलीला कलाकारों ने भगवान राम के वनवास की लीला का मंचन किया, जिसे देख दर्शकों की आंखे नम हो गई।
शहर के पुराने रामलीला मंच में आयोजित रामलीला मंचन का पहला दृश्य श्रीराम के राज्याभिषेक की तैयारियां चल दिखाया गया, इसी बीच, मंथरा ने महलों में जाकर रानी कैकेयी को राजा दशरथ से विवाह के समय मिले वरदानों की याद दिलाते हुए चालाकी से कैकेयी को भरत को राजा बनाने और श्रीराम को वनवास भेजने के लिए राजी कर लिया।
कैकेयी ने कोप भवन में जाकर राजा दशरथ से अपने दोनों वरदान मांगे। भरत के राजतिलक की बात पर दशरथ सहमत हो गए, लेकिन श्रीराम को वनवास भेजने की मांग से वे अत्यंत दुखी हुए और मूर्च्छित हो गए। भगवान राम अपनी माता से वनगमन की आज्ञा लेने पहुंचते हैं।
माता कौशल्या का पुत्र वियोग देखकर दर्शकों की आंखें नम हो गईं, इसके बाद का दृश्य सीता और राम संवाद का रहा, जिसमें माता सीता राम के साथ वन जाने का आग्रह करती हैं साथ ही भाई लक्ष्मण भी वनवास में साथ चलने की जिद करते हैं। भगवान राम, लक्ष्मण और सीता कैकेयी महल पहुंचकर वनवासी वस्त्र धारण करते हैं और अयोध्या वासियों से विदा लेकर निकल पड़ते हैं। महामंत्री सुमंत के साथ संवाद ने दर्शकों को और भी भावुक कर दिया।
जब सुमंत वापस आकर महाराजा दशरथ को संपूर्ण वृतांत सुनाते हैं तो पुत्र वियोग में महाराजा दशरथ के प्राण त्यागने का दृश्य पूरे मैदान को गमगीन कर गया। कलाकारों ने इस प्रसंग के माध्यम से दर्शकों को माता पिता की आज्ञा का पालन करने का संदेश दिया। रामलीला में राम का अभिनय संतोष पटेरिया ने किया। अंत में रामलीला में संगीत का स्वर देने वाले अबोध सोनी को रामलीला ट्रस्ट की ओर से सम्मानित किया गया।





