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यूपी में राशन कार्ड की ई-केवाईसी को लेकर बड़ा अपडेट, खाद्य मंत्री के फैसले से 16 लाख लोगों को होगा लाभ

लखनऊ में ई-केवाईसी प्रक्रिया को गति दी जा रही है। अब तक 87.99% यूनिटों की केवाईसी हो चुकी है। खाद्य मंत्री सतीश चंद्र शर्मा ने अपात्रों के कार्ड निरस्त करने और पात्रों को लाभ देने के निर्देश दिए हैं। उज्ज्वला योजना के तहत 90.36 लाख सिलेंडर वितरित किए गए। अन्नपूर्णा भवनों का निर्माण जारी है।

लखनऊ। ई-केवाइसी न कराने के कारण राशन वितरण रोके जाने के बाद इसकी प्रक्रिया तेज हुई है। प्रदेश में 12.78 करोड़ यूनिट की ई-केवाइसी हो चुकी है, जो कुल यूनिट का 87.99 प्रतिशत है। अभी डेढ़ करोड़ से अधिक यूनिट के लिए यह प्रक्रिया पूरी की जानी है।

खाद्य एवं रसद राज्यमंत्री सतीश चंद्र शर्मा ने इस कार्य में तेजी जाने के निर्देश दिए हैं। अपात्रों के कार्ड निरस्त के पात्रों को लाभ दिए जाने के भी निर्देश जारी किए हैं।

गुरुवार को हुई बैठक में राज्यमंत्री को अधिकारियों ने बताया कि कई माह से ई-केवाइसी की प्रगति अत्यंत धीमी थी। 31 अगस्त तक प्रक्रिया पूरी न करने वालों को तीन माह में ई-केवाइसी पूरी कराने का अधिकतम समय दिया गया है।

इसके बाद चालू माह में खाद्यान्न वितरण के रोस्टर में हर दिन ढाई से तीन लाख लाभार्थियों की ई-केवाइसी हुई है। दस सितंबर से अब तक 16 लाख से अधिक लाभार्थियों की प्रक्रिया पूरी कराई जा चुकी है। मंत्री ने शेष यूनिटों की ई-केवाइसी भी जल्द पूरी कराने के निर्देश दिए।

उन्होंने कहा कि जिन राशन कार्डधारक परिवारों के सदस्य विदेश नौकरी करने गए हैं और आय अधिक होने के कारण वह अपात्र हो गए हैं, उनको निरस्त किया जाए। मृत व्यक्तियों के राशनकार्ड भी निरस्त कर पात्र लाभार्थियों को लाभांवित किया जाए।

राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम-2013 के तहत छूटे हुए पात्रों के चिह्नीकरण का कार्य किया जाए और नियमानुसार अपात्र-निष्क्रिय कार्डधारकों के संबंध में अंतिम निर्णय लिया जाए।

लंबित आवेदनों की जांच कर पात्रतानुसार पात्र गृहस्थी राशन कार्ड जारी किए जाएंगे। राशन कार्डों में अवशेष यूनिट जोड़ने का काम भी जल्द पूरा करें।

बैठक में बताया कि बताया कि उज्जवला लाभार्थियों को निश्शुल्क सिलेंडर रिफिल वितरण योजना के तहत एक जनवरी से 31 मार्च तक 90.36 लाख सिलेंडर की आपूर्ति की जा चुकी है। प्रदेश में 1,772 अन्नपूर्णा भवनों का निर्माण चल रहा है। मंत्री ने निर्देश दिए कि निर्माण को प्रथम किस्त का उपयोगिता प्रमाण पत्र मिलने के बाद ही अगली किस्त दी जाए।

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