Sunday, August 31, 2025
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चीन ने लद्दाख में की थी घुसपैठ की हिमाकत, बदले में भारत ने ड्रैगन को 5 साल तक इस चीज के लिए तरसाया, तब जाके निकली हेकड़ी

साल 2020 में पूर्वी लद्दाख में तनाव (India China relations) के बाद भारत ने चीनी नागरिकों को वीजा (Chinese citizens Indian visa) देना फिर से शुरू कर दिया है। पांच साल बाद शुरू हुई इस प्रक्रिया में पर्यटन वीजा भी शामिल है। बीजिंग स्थित भारतीय दूतावास ने यह जानकारी दी। चीन ने इसे सकारात्मक कदम बताया है जिससे दोनों देशों के बीच रिश्ते सुधरने की उम्मीद है।

साल 2020 में पूर्वी लद्दाख स्थित वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर चीनी सैनिकों की घुसपैठ के बाद भारत और चीन के संबंधों (India China relations) में जो तनाव आया था, अब उसे दूर करने की तरफ (Indian tourist visa for Chinese citizens) दोनों देश धीरे-धीरे आगे बढ़ने लगे हैं।

भारत ने तकरीबन पांच सालों बाद चीनी नागरिकों को वीजा (Chinese citizens Indian visa) देने का काम फिर से शुरू कर दिया है। बीजिंग स्थित भारतीय दूतावास ने चीन के इंटरनेट मीडिया प्लेटफार्म वाइबो पर इस संबंध में जानकारी साझा की है। इसमें बताया गया है कि चीनी नागरिकों को पर्यटन के उद्देश्य से भारत आने के लिए गुरुवार से वीजा देने की प्रक्रिया प्रारंभ की जाएगी।

चीन ने भारत के इस निर्णय को सकारात्मक कदम बताया है। यह माना जा रहा है कि भारत सरकार के इस फैसले के बाद दोनों देशों के बीच सीधी उड़ान सेवा की बहाली का कार्य भी शीघ्र प्रारंभ होगा।

भारतीय दूतावास ने क्या कहा

भारतीय दूतावास ने अपने संदेश में स्पष्ट किया है कि 24 जुलाई, 2025 से चीन के नागरिक भारत के लिए पर्यटन वीजा हासिल (India China travel) करने के लिए आवेदन कर सकते हैं। उन्हें सबसे पहले वीजा आवेदन आनलाइन भरना होगा और उसका प्रिंट निकालना होगा। फिर वीजा के साक्षात्कार के लिए आवेदन करना होगा। इसके बाद उन्हें पासपोर्ट, वीजा आवेदन फार्म और अन्य संबंधित दस्तावेजों के साथ भारतीय वीजा आवेदन केंद्र पर पहुंचना होगा।’

चीन सरकार ने क्या कहा

भारत की इस घोषणा के तुरंत बाद, चीन सरकार (China India border dispute) ने इसका स्वागत करते हुए कहा -‘ यह एक सकारात्मक कदम है। एक देश से दूसरे देश में जाने की प्रक्रिया को सरल बनाना अत्यंत आवश्यक है। दोनों देशों के बीच आवागमन की सुविधा के लिए भारत के साथ निरंतर संवाद बनाए रखा जाएगा।’ भारत और चीन के बीच नागरिकों के आवागमन पर प्रतिबंध का कार्य साल 2020 में कोविड-19 महामारी की शुरुआत के साथ ही शुरू हुआ था।

इस दौरान, चीन के कई विश्वविद्यालयों में पढ़ाई कर रहे भारतीय छात्र भारत लौट आए थे। इसके बाद अप्रैल-मई में चीनी सेना की घुसपैठ के कारण दोनों देशों के बीच सैन्य तनाव बढ़ गया, जिसके परिणामस्वरूप भारत ने चीन के खिलाफ कई कदम उठाए, जिनमें चीनी एप पर प्रतिबंध भी शामिल था।

दोनों देशों ने एक-दूसरे के पत्रकारों को भी वीजा देना बंद कर दिया। चीन ने आरोप लगाया कि उसके राजनयिकों को वीजा नहीं दिया जा रहा। इसके बाद चीन ने भी भारत से लौटने वाले छात्रों को वीजा देने से इन्कार कर दिया था। ऐसे में भारत ने चीनी नागरिकों को वीजा देने का काम एक तरह से पूरी तरह से बंद कर दिया।

पिछले साल मोदी-शी जिनपिंग मुलाकात के बाद रिश्तों में सुधार की प्रक्रिया हुई शुरू हाल के दिनों में, कई भारतीय उद्योगपतियों ने चीनी इंजीनियरों को वीजा देने का आग्रह सरकार से किया था। अक्टूबर 2024 में कजान (रूस) में पीएम नरेन्द्र मोदी और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच मुलाकात के बाद से रिश्तों में सुधार की प्रक्रिया शुरू हुई है।

इसके बाद, भारतीय नागरिकों को कैलाश मानसरोवर की यात्रा की अनुमति भी दी गई है। दो हफ्ते पहले, विदेश मंत्री एस जयशंकर ने चीन की यात्रा की थी, जहां उनकी मुलाकात उप राष्ट्रपति हान झेंग, विदेश मंत्री वांग यी और चीनी कम्युनिस्ट पार्टी के अंतरराष्ट्रीय मामलों के मंत्री से हुई थी।

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