बिहार सरकार 2030 तक उच्च शिक्षा में जीईआर को 50% तक करने के लिए प्रयासरत है। शिक्षा मंत्री सुनील कुमार ने सभी कॉलेजों में नामांकन सुनिश्चित करने और पीएम-उषा योजना में शामिल होने पर जोर दिया। उन्होंने गुणवत्तापूर्ण शिक्षा समय पर परीक्षा और परिणाम सुनिश्चित करने का भी निर्देश दिया ताकि छात्रों को प्रतियोगी परीक्षाओं में अवसर मिल सके।
राज्य सरकार उच्च शिक्षा की बेहतरी के लिए न केवल उच्च शिक्षण संस्थानों को सुविधाएं मुहैया करा रही है, बल्कि छात्रों का नामांकन बढ़ाने पर भी जोर दिया जा रहा है। इसका लक्ष्य 2030 तक उच्च शिक्षा में सकल नामांकन अनुपात (जीईआर) को 50 प्रतिशत करना है।
इसके लिए शिक्षा विभाग द्वारा आयोजित कार्यशाला में विभागीय मंत्री सुनील कुमार ने कहा कि इंटरमीडिएट पास करने वाले बच्चों का हर हाल में कॉलेज में नामांकन होना चाहिए।
उन्होंने कहा कि राज्य के सभी विश्वविद्यालयों और कॉलेजों को पीएम-उषा (प्रधानमंत्री उच्चतर शिक्षा अभियान) योजना में शामिल किया जाएगा। इस केंद्र प्रायोजित योजना का उद्देश्य राज्य द्वारा संचालित विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में उच्च शिक्षा में गुणवत्ता, समानता और जवाबदेही में सुधार लाना है।
उन्होंने कहा कि बिहार में उच्च शिक्षा की गुणवत्ता को भी राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप उच्च स्तर पर ले जाया जाना चाहिए ताकि विक्रमशिला विश्वविद्यालय और नालंदा विश्वविद्यालय की तरह यह अपने पौराणिक समृद्ध राज्य में आ सके।
इससे यह लाभ होगा कि बिहार के बच्चों को उच्च शिक्षा के लिए राज्य के बाहर के विश्वविद्यालयों में नहीं जाना पड़ेगा। उन्होंने यह भी कहा कि विश्वविद्यालय और महाविद्यालय गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान करें, समय पर परीक्षाएं आयोजित करें और परिणाम प्रकाशित करें ताकि उन्हें प्रतियोगी परीक्षाओं में शामिल होने का अवसर मिल सके।
कार्यशाला को शिक्षा विभाग के सचिव अजय यादव, शिक्षा विभाग के सलाहकार बैद्यनाथ यादव ने संबोधित किया। इस अवसर पर विश्वविद्यालयों के कुलसचिव सहित अन्य अधिकारी उपस्थित थे। उप सचिव राम सागर प्रसाद सिंह ने धन्यवाद ज्ञापन किया।