Tuesday, March 31, 2026
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ग्लोबल जेंडर गैप 2025: 131वें पायदान पर भारत, महिलाओं की स्थिति में सुधार; देखें पूरी लिस्ट

विश्व आर्थिक मंच की ग्लोबल जेंडर गैप रिपोर्ट 2025 में भारत दो पायदान फिसलकर 131वें स्थान पर आ गया है। 148 देशों के आकलन में भारत का समानता स्कोर 64.1% रहा जिससे वह दक्षिण एशिया में निचले पायदान पर है। आर्थिक भागीदारी में सुधार हुआ है लेकिन राजनीतिक सशक्तीकरण में गिरावट आई है। रिपोर्ट के अनुसार पूर्ण लैंगिक समानता में 123 साल लगेंगे।

पीटीआई। विश्व आर्थिक मंच की ‘ग्लोबल जेंडर गैप रिपोर्ट 2025’ में भारत पिछले साल की तुलना में दो स्थान फिसलकर 131वें स्थान पर पहुंच गया है। इस रिपोर्ट में भारत समेत 148 देशों का आकलन किया गया है। गुरुवार को जारी रिपोर्ट के अनुसार, मात्र 64.1 प्रतिशत समानता स्कोर के साथ भारत दक्षिण एशिया में सबसे निचले पायदान वाले देशों में से एक है।

गत साल 146 देशों का आकलन किया गया था और भारत 129वें स्थान पर था। भारतीय अर्थव्यवस्था के समग्र प्रदर्शन में +0.3 अंकों का सुधार हुआ है। रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत में जिन आयामों में समानता बढ़ी है, उनमें से एक आर्थिक भागीदारी और अवसर है, जहां स्कोर 1.9 प्रतिशत बढ़कर 40.7 प्रतिशत हो गया है। जबकि अधिकतर संकेतक मूल्य समान रहे हैं।

भारत समेत 148 देशों का आकलन

विश्व आर्थिक मंच की ग्लोबल जेंडर गैप रिपोर्ट 2025 में भारत समेत 148 देशों का आकलन किया गया है।मात्र 64.1 प्रतिशत के समानता स्कोर के साथ भारत दक्षिण एशिया में सबसे निचले पायदान वाले देशों में आइसलैंड लगातार 16वें साल लिस्ट में सबसे आगे है, सबसे पीछे पाकिस्तान आइसलैंड लगातार 16वें साल रैंकिंग में सबसे आगे है। उसके बाद फिनलैंड, नार्वे, ब्रिटेन और न्यूजीलैंड है।

नेपाल 125वें, श्रीलंका 130वें, भूटान 119वें, मालदीव अनुमानित अर्जित आय में समानता 28.6 प्रतिशत से बढ़कर 29.9 प्रतिशत हो गई है, जिसका उपसूचकांक स्कोर पर सकारात्मक प्रभाव पड़ा है।

138वें और पाकिस्तान सबसे पीछे 148वें स्थान पर है। रिपोर्ट में कहा गया है कि वैश्विक लैगिक अंतराल 68.8 प्रतिशत तक गिर गया है, जो कोरोना महामारी के बाद श्रम बल भागीदारी दर में स्कोर पिछले साल के समान (45.9 प्रतिशत) रहे, जो कि भारत में अब तक का सर्वोच्च अंक है।

चार आयामों पर किया जाता है इसका मूल्यांकन

वैश्विक लैंगिक अंतराल सूचकांक में लैंगिक समानता को चार प्रमुख आयामों-आर्थिक भागीदारी व अवसर, शैक्षिक उपलब्धि, स्वास्थ्य व जीवन रक्षा तथा राजनीतिक सशक्तीकरण के आधार पर आंका जाता है।

सबसे मजबूत वार्षिक प्रगति को दर्शाता है। रिपोर्ट के अनुसार, मौजूदा दरों के आधार पर पूर्ण समानता कायम करने में 123 साल लग जाएंगे।

शैक्षिक प्रगति के मामले में भारत ने 97.1 प्रतिशत अंक प्राप्त किए हैं, जो साक्षरता व उच्च शिक्षा प्राप्त करने में महिलाओं की हिस्सेदारी में सकारात्मक बदलाव को दर्शाता है।

राजनीतिक सशक्तीकरण के मामले में गिरावट

भारत में स्वास्थ्य और जीवन रक्षा में भी उच्च समानता दर्ज की गई है। यह जन्म के समय लिंगानुपात व स्वस्थ जीवन प्रत्याशा में सुधार के कारण संभव हुआ है।

हालांकि, अन्य देशों की तरह पुरुषों और महिलाओं की जीवन प्रत्याशा में समग्र कमी के बावजूद स्वस्थ जीवन प्रत्याशा में समानता प्राप्त की गई है। भारत में राजनीतिक सशक्तीकरण के मामले में मामूली गिरावट (-0.6 अंक) दर्ज की गई हैं।

संसद में महिलाओं का प्रतिनिधित्व 14.7 प्रतिशत से घटकर 2025 में 13.8 प्रतिशत हो गया। राजनीतिक सशक्तीकरण और आर्थिक भागीदारी में उल्लेखनीय प्रगति के साथ बांग्लादेश दक्षिण एशिया में सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने वाला देश बनकर उभरा है, जो 75 पायदान की छलांग लगाकर वैश्विक स्तर पर 24वें स्थान पर पहुंच गया है।

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