HomeMarqueeमेट्रो की वजह से मेले का आन्नद रहा फीका

मेट्रो की वजह से मेले का आन्नद रहा फीका

BRIJENDRA BAHADUR MAURYA –
नागपंचमी और गुड़िया पर उठाए मेले और दंगल का आनन्द

लखनऊ। समूचे उत्तर प्रदेश में शुक्रवार को नाग पंचमी का त्यौहार बड़ी धूम धाम से मनाया जा रहा है। भारतीय परम्पराओं में देवी देवताओं के साथ साथ पशु पक्षियों को भी बराबरी का स्थान दिया गया है जो पूरी तरह से पर्यावरण हितैषी होने का संदेश देता है। सांपों को भले ही खतरनाक माना जाता हो लेकिन कृषि प्रधान देश की बात करे तो नागराज किसानों की सदैव मदद करते रहे है। भगवान शिव जहां सर्पो को गले में माला स्वरूप धारण करते हैं वहीं भगवान विष्णु शेषनाग की शैय्या पर शयन करते हैं। समुद्र मंथन में वासुकी नाग रस्सी के रूप में प्रयुक्त किए जाते हैं और द्वापरयुग में कृष्ण कालिया नाग का मानमर्दन करते है और कालान्तर में जन्मेजय की कथा तक सर्पो का उल्लेख मिलता है। नाग नागिन न केवल पौराणिक कथाओं में आते है बल्कि मुहावरों और बोलचाल की आम भाषा में भी सांपों का जिक्र बहुधा किया जाता है। रूपहले परदे के लिए भी सांप विशेष रूचि का केन्द्र रहें हैं।
नागपंचमी की शुभकामनाएं और बधाइयां देने में सोशल मीडिया भी कहीं से पीछे नहीं हैं। गुरुवार से ही फेसबुक वाट्सअप आदि पर नाग पंचमी की शुभकामनाओं के मैसेज जम कर चल रहे है।
हालांकि गुरुवार को सावन कृष्ण पक्ष की पंचमी तिथि लग गई थी परंतु सर्वमान्य परम्परा के चलते उदया तिथि होने के कारण नाग पंचमी शुक्रवार को ही मनायी जा रही है। राजधानी में नाग पंचमी महापर्व को गुड़िया के नाम से भी जाना जाता है और आज के दिन हुसैनगंज का प्रसिद्ध मेला, पहलवानों के दंगल तथा शिवालयों में शिव परिवार की विशेष पूजा-अर्चना की जाती है।
राजधानी के प्राचीन मनकामेश्वर मंदिर, बुद्धेश्वर मन्दिर में जहां विशेष पूजा हो रही है वहीं शिवालयों में भारी भीड़ उमड़ रही है। नागपंचमी होने के कारण कालसर्प योग साधना के साथ रुद्राभिषेक यज्ञ का आयोजन घर घर किया जा रहा है।
गुड़िया की बात करे तो राजधानी के हुसैनगंज में मेला सजता है जहां परम्परागत छड़ियां खरीद कर प्रतीकात्मक रूप से कपड़े की बनी गुड़िया पीटी जाती है। मेले में आकर्षक दुकानों के साथ झूले और मिठाइयां खूब पसंद की जाती है। झूले और खिलौनों की दुकानें जहां बच्चों के आकर्षण का केन्द्र बनती है वहीं गुलगुले, अंदरसे जैसे सावन के विशेष पकवान बड़ो, खास तौर पर महिलाओं को खूब भाते हैं। हालांकि इस बार मेट्रो की वजह से हुसैनगंज में मेले का आन्नद थोड़ा फीका रहेगा, पर फिर भी दुकानदारों ने मेले की तैयारियां कर ली है।
नागपंचमी और गुड़िया के त्यौहार पर राजधानी में पहलवानों के दंगल का भी मशहूर इतिहास रहा है। पुराने लखनऊ के चौक क्षेत्र में जहां कई दशकों से मशहूर अखाड़े दंगल का आयोजन करवाया करते हैं वहीं आज के दिन पहलवानों को सम्मानित करने की परम्परा भी रही है। गणेशगंज, सदर आदि जगहों पर ईनामी दंगल भी आयोजित किए जाते हैं।
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