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शिया समुदाय द्वारा इमामबाड़ा आसिफउद्दौला से समान जुलूस,जुलूसे मदहे सहाब निकाला गया जिला प्रशासन ने गिरफ्तारी लेने से इनकार किया।

तंजीसे मिल्ल्त के महासचिव प्रिंस इक़बाल मिर्जा ने प्रेस वार्ता में बताया कि शिया संगठन तंजीम मिल्ल्त के आह्वान पर हज़रत मोहम्मद स० अ० के जन्म दिवस 17 रबीउलअव्वल के अवसर पर इमामबाड़ा आसिफउद्दौला से मिलाद तथा विशाल सभा के बाद जुलूसे-मदहे सहाबा निकाला गया। शिया समुदाय के लोग इस जुलूस को इमामबाड़ा आसिफउद्दौला से हज़रतगंज स्थित इमामबाड़ा शाहनजफ ले जाना चाहते थे। जब जिला प्रशासन ने जुलूस को रोका तो शिया समुदाय के लोग गिरफ्तारी देने के लिए अतुर थे। परन्तु शहर की शांति व्यवस्था के मुददे नज़र जिला प्रशासन ने गिरफ्तारी लेने से इनकार कर दिया तथा आश्वासन दिया कि इस जुलूस की अनुमति एवं मांगो को उच्च अधिकारियो के समक्ष रखेंगे। जिसके उपरांत तंजीम के महासचिव प्रिंस इक़बाल मिर्जा ने मौलाना मीसम जैदी ,मौलाना यासूब अब्बास,मौलाना मुमताज अली,मौलाना सदफ जौनपुरी,मौलाना बाक़र की मौजूदगी में मुख्यमंत्री के नाम लिखित ज्ञापन ए०सी०एम० दितीय को दिया।

जुलूस से पूर्व विशाल सभा तथा मिलाद का आयोजन किया गया जिसका उद्घाटन मौलाना मुमताज अली ने किया जिसकी अध्यक्ष्ता मौलाना यासूब अब्बास ने की। महफिले मीलाद को सम्बोधित करते हुए मौलाना मीसम जैदी ने कहा कि हमे पैगंबरे इस्लाम और उनके सच्चे सहाबा से मोहब्बत करना चाहिए। मौलाना सदफ जौनपुरी ने मिलाद को सम्बोधित करते हुए कहा कि हुजूरे पाक से सच्ची मोहब्बत है तो उनके अगलेबैत से मोहब्बत करो। इस मौके पर अंजुमने फिरोजिया के साहेबे ब्यॉज अबुल हसन तथा दीगर अंजुमनों ने नतिया कलम पेश किया। अंजुमनों ने बैनर पर हज़रत मोहम्मद स० अ० व पंजेतन के नाम इसके अलावा हज़रत अम्मारे यासिर ,हज़रत मुख़्तार,हजरत बिलाल,हज़रत मालिके-अश्तर,हज़रत अबू गफ़्फ़ारि के नाम लिखे थे। इस मौके पर अंजुमने फिरोजिया के साहेबे बयाज अबुल हसन,अंजुमन शमशीरे-मुख़्तार के साहेबेबयाज रहबर हुसैन,अंजुमने बिलालिया के साहेबेबयाज अब्बास मेहंदी और अणहुंणे जनिसाराने-मुख़्तार के साहेबे बयाज नय्यर मजीदी ने भी बेहतरीन कलाम पेश किये।
सभा में शासन/प्रशासन से निम्नलिखित मांगे की गयी
1. शिया समुदाय के समस्त 953 पारम्परिक जुलूसो को अविलम्ब उठवाया जाये।
2. शिया समुदाय को भी भारतीय सविधान की धारा 11 तथा 15 के अंतर्गत समान जुलूस जुलूसे-मदहे सहाबा 17 रबीउलअव्वल के अबसर पर दिया जाये क्योकि शिया समुदाय 17 रबीउलअव्वल को हजरत मोहम्मद साहब का जन्म दिवस मनाता है।
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